धारा 42 सम्पत्ति अन्तरण | Section 42 of Transfer of property Act Hindi

आज के इस आर्टिकल में मै आपको “पूर्वतर अंतरण का प्रतिसंहरण करने का प्राधिकार रखने वाले व्यक्ति द्वारा अंतरण | सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम की धारा 42 क्या है | Section 42 Transfer of property Act in hindi | Section 42 of Transfer of property Act | धारा 42 सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम | Transfer by person having authority to revoke former transfer के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम की धारा 42 |  Section 42 of Transfer of property Act | Section 42 Transfer of property Act in Hindi

[ Transfer of property Act Section 42 in Hindi ] –

पूर्वतर अंतरण का प्रतिसंहरण करने का प्राधिकार रखने वाले व्यक्ति द्वारा अंतरण-

जहां कि कोई किसी स्थावर सम्पत्ति को यह शक्ति आरक्षित रखते हुए अन्तरित करता है कि वह उस अन्तरण का प्रतिसंहरण कर सकेगा और तत्पश्चात् उस सम्पत्ति को किसी अन्य अन्तरिती को प्रतिफलार्थ अन्तरित कर देता है वहां ऐसा अंतरण (ऐसी किसी शर्त के अध्यधीन, जो उस शक्ति के प्रयोग से बद्ध है) उस पूर्वतर अन्तरण के प्रतिसंहरण के रूप में ऐसे अंतरिती के पक्ष में उस शक्ति के विस्तार तक प्रवृत्त होता है।

दृष्टांत

ख को क एक गृह पट्टे पर देता है और यह शक्ति आरक्षित रखता है कि यदि ख उसका ऐसा उपयोग करेगा जिससे उस गृह का मूल्य विनिर्दिष्ट सर्वेक्षक की राय में गिर जाएगा, तो वह पट्टे को प्रतिसंहृत कर देगा। इसके पश्चात क यह सोच कर कि ऐसा उपयोग किया गया है वह उस गृह को पट्टे पर ग को देता है । इसके अध्यधीन कि ख द्वारा किए गए उस गृह के उपयोग के बारे में सर्वेक्षक की यह राय हो कि उस गृह का मूल्य गिर गया है, यह अन्तरण ख के पट्टे के प्रतिसंहरण के रूप में क्रियाशील होता है।

धारा 42 Transfer of property Act

[ Transfer of property Act Sec. 42 in English ] –

Transfer by person having authority to revoke former transfer”–

Where a person transfers any immoveable property, reserving power to revoke the transfer, and subsequently transfers the property for consideration to another transferee, such transfer operates in favour of such transferee (subject to any condition attached to the exercise of the power) as a revocation of the former transfer to the extent of the power. 

Illustration 

A lets a house to B, and reserves power to revoke the lease if, in the opinion of a specified surveyor, B should make a use of it detrimental to its value. Afterwards a, thinking that such a use has been made, lets the house to C. This operates as a revocation of B’s lease subject to the opinion of the surveyor as to B’s use of the house having been detrimental to its value

धारा 42 Transfer of property Act 

सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम  

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Updated: May 25, 2020 — 1:08 pm

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