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कंपनी अधिनियम धारा 102 | Section 102 of Companies Act in Hindi

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आजके इस आर्टिकल में मै आपको ” सूचना के साथ संलग्न किया जाने वाला विवरण | Statement to be annexed to notice | कंपनी अधिनियम धारा 102  | Section 102 of Companies Act in Hindi | कंपनी अधिनियम की धारा 102  के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

Section 102 of Companies Act in Hindi

[ Companies Act Sec. 102 in Hindi ] –

सूचना के साथ संलग्न किया जाने वाला विवरण –

(1) किसी साधारण अधिवेशन में संव्यवहार किए जाने वाले विशेष कारबार की प्रत्येक मद से संबंधित निम्नलिखित तात्त्विक तथ्यों को उपवर्णित करने वाला एक विवरण ऐसा अधिवेशन बुलाने वाली सूचना से संलग्न किया जाएगा, अर्थात्ः–

(क) निम्नलिखित की प्रत्येक मद के संबंध में समुत्थान का स्वरूप या हित, वित्तीय या अन्यथा, यदि कोई हो, –

(i) प्रत्येक निदेशक और प्रबन्धक, यदि कोई हो;

(ii) प्रत्येक अन्य मुख्य प्रबन्धकीय कार्मिक; और

(iii) उपखंड (i) और उपखंड (ii) में वर्णित व्यक्तियों के नातेदार;

(ख) ऐसी अन्य सूचना और तथ्य जो सदस्यों को, कारबार की मदों के अर्थ, विस्तार और विविक्षाओं को समझने में और उन पर विनिश्चय करने में समर्थ बना सकें ।

(2) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए —

(क) किसी वार्षिक साधारण अधिवेशन की दशा में, निम्नलिखित से भिन्न उसमें संव्यवहृत सभी कारबारों को विशेष समझा जाएगा —

(i) वित्तीय विवरणों और निदेशक बोर्ड और संपरीक्षकों की रिपोर्टों पर विचार करना; (ii) किसी लाभांश की घोषणा करना;

(iii) निवृत्त होने वाले निदेशकों के स्थान पर नए निदेशकों की नियुक्ति करना; (iv) संपरीक्षकों की नियुक्ति करना और उनके पारिश्रमिक नियत करना; और

(ख) किसी अन्य अधिवेशन की दशा में, सभी कारबार विशेष समझे जाएंगे : परंतु जहां कंपनी के अधिवेशन में संव्यवहार किए जाने वाले विशेष कारबार की कोई मद, किसी अन्य कंपनी से संबंधित है या उसे प्रभावित करती है, वहां प्रथम उल्लिखित कंपनी के प्रत्येक प्रवर्तक, निदेशक, प्रबंधक यदि कोई हो और प्रत्येक अन्य मुख्य प्रबंधकीय कार्मिक के उस अन्य कंपनी में शेयर धारण के हित की सीमा को भी, यदि ऐसे शेयर धारण की सीमा, उस कंपनी की समादत्त शेयर पूंजी के दो प्रतिशत से अन्यून है, विवरण में उपवर्णित किया जाएगा ।

( 3 ) जहां कारबार की कोई मद, ऐसे किसी दस्तावेज के प्रतिनिर्देश करती है, जिस पर अधिवेशन में विचार किया जाना है, वहां उपधारा (1) के अधीन विवरण में वह समय और स्थान विनिर्दिष्ट किया जाएगा, जहां ऐसे दस्तावेज का निरीक्षण किया जा सकता है ।

(4) जहां किसी संप्रवर्तक, निदेशक, प्रबंधक या अन्य मुख्य प्रबंधकीय कार्मिक द्वारा किए गए उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी विवरण के, यदि कोई हो, अप्रकटीकरण या अपर्याप्त प्रकटन के परिणामस्वरूप ऐसे संप्रवर्तक, निदेशक, प्रबंधक या अन्य मुख्य प्रबंधकीय कार्मिक या उसके नातेदारों को या तो प्रत्यक्ष रूप से या अप्रत्यक्ष रूप से कोई फायदा प्रोद्भूत होता है, वहां, यथास्थिति, ऐसा संप्रवर्तक, निदेशक, प्रबंधक या अन्य मुख्य प्रबंधकीय कार्मिक, कंपनी के लिए न्यास के रूप में उस फायदे को धारित करेगा और इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन उसके विरुद्ध कोई अन्य कार्रवाई किए जाने पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उसके द्वारा प्राप्त किए गए फायदे की सीमा तक कंपनी की क्षतिपूर्ति करने के लिए दायी होगा ।

(5) यदि इस धारा के उपबंधों का अनुपालन करने में कोई व्यतिक्रम किया गया है, तो प्रत्येक ऐसा संप्रवर्तक, निदेशक, प्रबंधक या अन्य मुख्य प्रबन्धकार कार्मिक जो व्यतिक्रमी है, ऐसे जुर्माने से, जो पचास हजार रुपए का या संप्रवर्तक, निदेशक, प्रबंधक या अन्य मुख्य प्रबंधकीय कार्मिक या उनके किन्हीं नातेदारों को प्रोद्भूत होने वाले फायदे की रकम के पांच गुना तक का हो सकेगा, इनमें से जो भी अधिक हो, दंडनीय होगा ।

कंपनी अधिनियम  धारा 102

[ Companies Act Section 102 in English ] –

Statement to be annexed to notice”–

(1) A statement setting out the following material facts concerning each item of special business to be transacted at a general meeting, shall be annexed to the notice calling such meeting, namely:—
(a) the nature of concern or interest, financial or otherwise, if any, in respect of each item of—
(i) every director and the manager, if any;
(ii) every other key managerial personnel; and
(iii) relatives of the persons mentioned in sub-clauses (i) and (ii);
(b) any other information and facts that may enable members to understand the meaning, scope, and implications of the items of business and to take decisions thereon.
(2) For the purposes of subsection (1),—
(a) in the case of an annual general meeting, all business to be transacted thereat shall be deemed special, other than—
(i) the consideration of financial statements and the reports of the Board of Directors and auditors;
(ii) the declaration of any dividend;
(iii) the appointment of directors in place of those retiring;
(iv) the appointment of, and the fixing of the remuneration of, the auditors; and
(b) in the case of any other meeting, all business shall be deemed to be special:
Provided that where any item of special business to be transacted at a meeting of the company relates to or affects any other company, the extent of shareholding interest in that other company of every promoter, director, manager, if any, and of every other key managerial personnel of the first mentioned company shall, if the extent of such shareholding is not less than two percent. of the paid-up share capital of that company, also be set out in the statement.
(3) Where any item of business refers to any document, which is to be considered at the meeting, the time and place where such document can be inspected shall be specified in the statement under subsection (1).
(4) Where as a result of the non-disclosure or insufficient disclosure in any statement referred to in sub-section (1), being made by a promoter, director, manager, if any, or other key managerial personnel, any benefit which accrues to such promoter, director, manager, or other key managerial personnel or their relatives, either directly or indirectly, the promoter, director, manager, or other key managerial personnel, as the case may be, shall hold such benefit in trust for the company, and shall, without prejudice to any other action being taken against him under this Act or under any other law for the time being in force, be liable to compensate the company to the extent of the benefit received by him.
(5) If any default is made in complying with the provisions of this section, every promoter, director, manager or other key managerial personnel who is in default shall be punishable with fine which may extend to fifty thousand rupees or five times the amount of benefit accruing to the promoter, director, manager or other key managerial personnel or any of his relatives, whichever is more.

कंपनी अधिनियम धारा 102


कंपनी अधिनियम 2013  

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