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दहेज प्रथा कब और कहां से शुरू हुई | Dahej kya hai

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दहेज प्रथा कब और कहां से शुरू हुई | Dahej kya hai

Dahej kya hai

हेल्लो दोस्तों आज के इस आर्टिकल में मै आपको दहेज़ के महत्वपूर्ण विषय में बताने जा रा हूँ , चुकी यह बहुत ही गंभीर मुद्दा है , मै आपको दहेज़ के महत्वपूर्ण मुद्दों से अवगत करने जा रहा हूँ , आशा करता हूँ आपको आर्टिकल पसंद आएगा .

दहेज क्या है

सबसे पहले हम आपको बता दें कि दहेज क्या होता है वैसे तो दहेज का मतलब आज के समय में सभी लोग जानते हैं क्योंकि हमारे देश में लगभग बहुत कम लोग ऐसे हैं .

जो कि दहेज के बिना शादी करते हैं लेकिन वह उसका सीधा सा मतलब यही होता है कि दुल्हन के परिवार के लोग उसके माता पिता दूल्हे के परिवार वालों को किसी तरह की नगद राशि का भुगतान करते हैं या उसको किसी तरह की गाड़ी बाइक या कोई अन्य गहने जवाहरात या कुछ और चीज देते हैं जो कि दूल्हे के घर वाले मांगकर भी लेते हैं.

वैसे तो लोग लड़कियों की जान के पीछे जन्म से लेकर जब तक उसकी जान जाएगी तब तक उसके पीछे ही पड़े रहते हैं क्योंकि जब उसका जन्म होता है तब उसको गालियां सुननी पड़ती है और जब वह बड़ी होती है और शादी करती है तो उसके ससुराल वालों को दहेज चाहिए होते हैं इसलिए उसे गाली पड़ती है और कई लोग तो इतने बेरहम होते हैं कि अपनी बेटी को कोख में ही मरवा देते हैं कन्या भ्रूण हत्या एक बहुत बड़ा पाप है और इसी तरह ही दहेज प्रथा भी एक बहुत बड़ा अभिशाप है

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माना जाता है कि लड़का लड़की के साथ इसलिए शादी करता है ताकि वह अपने जीवन को आसानी से जिसके और दोनों एक दूसरे के साथ मिल कर रहे .

लेकिन आज के समय में लोग सिर्फ दहेज के लिए ही शादी करते हैं और यह हमारे आसपास आज के समय में होने वाली आम घटनाएं है. और इन सभी घटनाओं के बारे में आप भी लगभग हर रोज TV अखबार रेडियो समाचार पत्र न्यूज़ आदि में सुनते होंगे देखते होंगे और हमारे देश में दहेज प्रथा एक बहुत बड़ी बीमारी की तरह फैल गई है जिसको खत्म करना लगभग अब नामुनकिन सही है.

 लेकिन हमारे देश में दहेज प्रथा को कानून अपराध समझता है और अगर कोई इस अपराध को करता है तो उस को कड़ी से कड़ी सजा भी दी जाती है लेकिन फिर भी दहेज प्रथा बहुत ज्यादा चल रही है.

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दहेज प्रथा कब और कहां से शुरू हुई

हमारे देश में बहुत अलग अलग तरह की रीति रिवाज है जो कि हमारे देश को दुनिया से अलग बनाते हैं भारत में आज से नहीं बल्कि बहुत पुराने समय से इन रीति-रिवाजों का प्रचलन होता आ रहा है लेकिन इसमें से कुछ बहुत अच्छी रीति रिवाज है और कुछ बहुत बुरी रीति रिवाज है जिनके कारण कि बहुत से लोगों को जान भी गंवानी पड़ती हैं,

हमारे देश में सबसे बड़ी बुरी रीति-रिवाज जो है जिसमें की एक सती प्रथा का नाम आता है और दूसरी दहेज प्रथा यह दोनों हमारे समाज में एक बहुत बड़ा अभिशाप बन चुकी है लेकिन सती प्रथा को बंद कर दिया गया है.

लेकिन दहेज प्रथा अभी भी हमारे देश में बहुत बड़ा अभिशाप बन कर चल रही है जिससे की बहुत सी लड़कियों की बिना वजह की जान चली जाती है. तो आज मैं आपको इस पोस्ट में दहेज प्रथा से संबंधित कुछ बातें बताऊंगा दहेज प्रथा कब शुरू हुई और कहां से इसको पहली बार शुरू किया गया तो नीचे आप यह महत्वपूर्ण जानकारी जरूर पढ़ें.

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हमारे देश में लड़कियों को लक्ष्मी का रूप माना जाता है और उसे देवी के रूप में भी माना जाता है लेकिन कई बार उन लड़कियों की बिना वजह से ही मौत हो जाती है क्योंकि वह सिर्फ अपने घर से ससुराल चल जाती है .

वहां पर दहेज ना ले जाने के कारण उनको अपनी जान कहां देनी पड़ती है हमारे देश में यह एक बहुत बड़ी बुराई है जोकि आज के समय में बहुत ज्यादा चल रही है दहेज प्रथा एक इतनी बड़ी बुराई है जो कि हमारे देश में हर 90 मिनट में एक लड़की की दहेज ना मिलने के कारण मृत्यु हो जाती है कई बार उस लड़की के ससुराल वाले उसका पति ससुर सास जैसे लोग उसको जान से मार देते हैं और कई बार वह उनके डर से खुद अपने आप अपनी जान गंवा देती है.

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दहेज प्रथा का इतिहास

दहेज प्रथा का इतिहास बहुत पुराना है लगभग दहेज प्रथा बहुत सदियों से ही सलाह आ रहा है लेकिन पुराने समय का दहेज प्रथा आज की दहेज प्रथा से बिल्कुल अलग था उस समय सिर्फ यह एक उपहार होता था लेकिन आज के समय में दहेज में लड़की वालों से मांग कर लिया जाता है ना कि उसे उपहार के रूप में लिया जाता है तो नीचे मैं आपको इनके इतिहास के बारे में बता रहा हूं

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वैदिक काल

यदि हम बात करें दहेज प्रथा के बारे में तो  वैदिक काल में दहेज प्रथा का कोई औचित्य या मान्यता नहीं होती की अथर्ववेद  के अनुसार उत्तर वैदिक काल में वहतु  के रूप में इस प्रथा का प्रचलन हुआ था जो की हमारे आज के समय में जिसे दहेज प्रथा को माना जाता है उस समय में यह बिल्कुल अलग था उस समय में लड़की के घर वाले लड़के को शादी के समय पर कुछ चीजें उपहार में देते थे लेकिन उस चीज के बारे में ना तो पहले बताया जाता था और ना ही उनसे उन कुछ चीजें चीज मांगी जाती थी उस समय में लड़की का पिता अपनी मर्जी से खुद कोई भी चीज उपहार में लड़के को दे सकता था लेकिन वह उसकी मर्जी होती थी और आज के समय में सिर्फ लड़की के पिता की मर्जी नहीं चलती है लेकिन उसकी मजबूरी होती है आज के समय में दहेज मांग कर लिया जाता है और ना देने पर बहुत बार लड़की का शोषण भी किया जाता है.

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मध्य काल

फिर वैदिक काल के बाद मध्यकाल में इस दहेज को स्त्री धन के नाम से भी जाना जाने लगा और इस समय में भी दहेज बिल्कुल वैदिक काल की तरह ही होता था इस समय में लड़की का पिता अपनी हैसियत और इच्छा के अनुसार अपने घर से बेटी को तोहफे में कुछ चीजें देकर विदा करता था इस समय में जो उपहार के रूप में लड़की का पिता अपनी बेटी को देता था वह चीज इसलिए दी जाती थी ताकि बुरे समय में उसके पति और उसके घरवालों को वह चीजें काम में आ सके इसके लिए भी लड़की के पिता के ऊपर किसी तरह का दबाव नहीं होता था लेकिन इसकी बुरी बात यह थी कि यह विदाई के समय एक रिवाज की तरह शुरू कर दिया गया ताकि जब बेटी को विदा किया जाता तो उस समय यह चीजें देनी ही होती थी.

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आधुनिक काल

अगर बात करें आज के समय में दहेज प्रथा कि बात करे तो आज के समय में दहेज मांग कर लिया जाती है  पहले के जैसे बिल्कुल नहीं है आज के समय में धन दौलत पैसा गाड़ी या कुछ दूसरा समान बहुत दबाव देकर बेटी वालों के ऊपर फिर उनसे मांगा जाता है और अगर कई बार किसी गरीब लड़की के घरवाले किसी लड़के को अपनी मजबूरी के कारण यह चीज नहीं दे पाते हैं  लेकिन पहले इन सब से अलग एक बात और भी होती थी कि पहले जमाने में लड़कियों का स्वयंवर होता था पुरुष स्वयंबर में अलग-अलग जगहों से अलग-अलग लड़के आते थे और वह लड़के लड़की के लिए उपहार लाते थे और अलग अलग तरह से अपनी बहादुरी दिखाते थे फिर लड़की अपनी मर्जी से अपनी पसंद का लड़का उन लड़कों में से  चुनती थी 11 वीं शताब्दी से पहले कोई भी दहेज जैसी चीज का सवाल नहीं करता था इसलिए जैसे मैंने आपको उपर बताया था कि लड़की का बाप अपनी बेटी के को इसलिए कुछ चीजें ऊपर में देता था.

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ताकि बुरा समय जब आए तो वह चीजें उसके पति और उसके घरवालों को काम आ सके इसलिए मां बाप अपनी बेटी को अपनी संपत्ति का आधा हिस्सा दे देते थे और यदि उस समय में अगर मां बाप का कोई और बेटा नहीं होता. तो पूरी जायदाद में बेटी का हिस्सा होता था और यदि बेटी के साथ उसका कोई भाई भी होता तो उसको चौथा हिस्सा मिलता था और भारत में दहेज सिस्टम को शुरू करने का सबसे बड़ा कारण ब्रिटिश सरकार को जाता है उससे पहले इतना ज्यादा दहेज सिस्टम नहीं होता था और ना ही उस समय में उस चीज को दहेज माना जाता था लेकिन ब्रिटिश राज के आने के बाद भारत में दहेज प्रथा शुरू हुई ब्रिटिश सरकार के आने से उनका सबसे घटिया नियम यह था कि मां बाप की जायदाद में बेटी का कोई हिस्सा नहीं होगा इसके बाद जब बेटी की शादी होती थी तो उसकी सारी जायदाद उसके पति के नाम कर दी जाती थी तो वहां से लड़कियों का शोषण का यह इतिहास शुरू होता है.

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कानून

जब ब्रिटिश राज गया तो उस समय तक भारत में दहेज प्रथा बहुत ज्यादा रूप ले चुकी थी और इसी को देखते हुए भारत सरकार ने ब्रिटिश राज्य के जाने के बाद बहुत से ऐसे कानून बनाए जो कि दहेज प्रथा को खत्म करने के लिए बनाए गए थे लेकिन फिर भी यह प्रथा खत्म नहीं हुई और इस तरह के आज के समय में बहुत और भी कानून बनाए गए हैं

पहली बार दहेज के विरुद्ध 1961 में कानून बनाया गया था उस कानून के अनुसार अगर कोई दहेज लेता है या लेने के लिए मजबूर करता है तो उसको 5 साल तक की कैद और ₹15000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता हैधारा 498 A  के अनुसार यदि किसी भी लड़की को दहेज के लिए पीड़ित किया जाता है या उसका शोषण किया जाता है तो उसके पति उसके रिश्तेदार या उसके सास ससुर को 3 साल तक की कैद और जुर्माना या दोनों भी हो सकते हैंयदि शादी के 7 साल के अंदर किसी लड़की की किसी तरह से मौत हो जाती है तो उसका जिम्मेदार उसके साथ ससुर और उसके पति को दहेज मांगने के लिए ठहराया जाता है और उस अवस्था में भारतीय कानून की धारा 304 बी के अंतर्गत है उसके परिवार वालों को कम से कम 7 साल से लेकर उम्र कैद की सजा भी हो सकती है यदि यह साबित हो जाता है कि पहले उसे देश के लिए प्रताड़ित किया जाता था.1985 में और भी बहुत से नियम बनाए तो गए थे लेकिन उनको लागू नहीं किया गया.

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मृत्यु

1997 में एक रिपोर्ट के अनुसार यह बताया गया कि प्रत्येक वर्ष में 5000 महिलाओं की मौत सिर्फ दहेज के कारण होती है उन्हें जिंदा जला दिया जाता है या वह खुद अपने आप को मौत के हवाले कर देती है और जिसे दुल्हन की आहुति के नाम से भी जाना जाता हैएक रिपोर्ट के अनुसार हर 60 से 90 मिनट के बीच में हमारे देश में एक लड़की की मृत्यु दहेज के कारण होती है.राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार 2007 से 2011 के मध्य में सबसे ज्यादा लड़कियों की मौत दहेज के कारण हुई और यह अब तक के सबसे ज्यादा आंकड़े रहे हैं.भारत में विभिन्न राज्यों में 2012 में दहेज प्रथा के कारण 8,233 मामले सामने आए थे और इन आंकड़ों से अनुमान लगाया जाता है कि प्रत्येक 1 घंटे में एक महिला दहेज के कारण मौत की बलि चढ़ी.

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 कौन सी चीज दहेज को ज्यादा बढ़ावा देती है

कई बार दहेज कारण लड़की के माता-पिता भी होता है क्योंकि उसके माता-पिता जब बेटी की शादी करते हैं तो यही बात सिखाते हैं कि उसको अगर कुछ भी दिक्कत होती है तो अपने सास-ससुर या पति की बात को नहीं डालना है उनकी सभी बाते सहनी होगी. और इसी तरह से उसका पति इन बातों का फायदा उठाकर उसे प्रताड़ित करता है और उसे बार-बार अपने घर से दहेज लाने के लिए बोलता है तो ऐसी बातें भी दहेज को बहुत बढ़ावा देती हैं

कई बार इन चीजों में लड़की के माता-पिता का भी हाथ बहुत ज्यादा होता है क्योंकि अगर किसी लड़की में कोई कमी है तो उसके मां-बाप बस यही सोचते हैं कि उसकी शादी कर देंगे और जब लड़के वाले उसे दहेज मांगते हैं तो वह उस बात के लिए राजी हो जाते हैं और उसे कह दे देते हैं लेकिन यह मांग आगे शादी के बाद बढती जाती है यह चीज़े दहेज को बहुत बढ़ावा दे रही है

और कई बार दहेज का कारण उसके आसपास के लोग भी बनते हैं क्योंकि जब लड़की की शादी बिना दहेज के हो जाती है तो आसपास के लोग या उसके रिश्तेदार यह बोलते हैं कि लड़की शादी में क्या लेकर आई है जिससे कि उसके पति या उसके ससुर को बुरा लगता है और वह बाद में दहेज के लिए उसे प्रताड़ित करने लगते हैं

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दहेज प्रथा रोकने के उपाय

1.आज की युवा पीढ़ी की मानसिक सोच को बदलने की जरूरत है अगर वह शादी बिना दहेज के करेंगे तो इस चीज को बढ़ावा बिल्कुल भी नहीं मिलेगा.

2. अगर किसी लड़की के ऊपर दहेज के लिए जुर्म होता है तो उसे इस को सहना नहीं चाहिए बल्कि इसके लिए उन्हें अपने पति और अपने सास-ससुर के खिलाफ सजा दिलाने की कोशिश करनी चाहिए

3. अगर लड़की के मां-बाप उसकी शादी में दहेज मांगने वाले लड़के से कर रहे हैं तो उसको इस बात के लिए कभी राजी नहीं होना चाहिए बल्कि उसके खिलाफ वह केस भी कर सकती है क्योंकि अगर किसी लड़की की शादी उसकी जबरदस्ती किसी और से करवाई जा रही है जो कि लड़की खुद नहीं चाहती है तो इसके लिए कानून उन लोगों को बहुत सजा देता है और यह कानून की नजर में गुनाह माना जाता है.

4.और सरकार को इसके खिलाफ और सख्त कानून लागू करना चाहिए

5. ऐसी फिल्म और TV सीरियल को चलाया जाना चाहिए जो कि दहेज प्रथा के विरुद्ध हो और दहेज प्रथा का खंडन करती हो. इससे भी लोगों में जागरूकता आती है.

6. यदि आपके आसपास भी ऐसी कोई घटना होती है या आप ऐसे किसी लड़की को शोषण का शिकार होते हुए देख रहे हैं तो आप तुरंत पुलिस में रिपोर्ट  करे.

तो यदि हम इन बातों का ध्यान रखते हैं तो शायद इस प्रथा को धीरे-धीरे कम करके बंद किया जा सकता है

आज हमने आपको इस पोस्ट में एक बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी बताई है हमने आपको आज इस पोस्ट में दहेज प्रथा के बारे में बताया है और आप यह सभी जानते होंगे कि दहेज प्रथा एक बहुत बड़ी कुरीति है जो कि हमारे देश और हमारे समाज के ऊपर एक बहुत बड़ा कलंक का रुप ले चुकी है और हमें इस कुरीति को हमेशा के लिए अगर बंद करना है तो आज की युवा पीढ़ी को इसके लिए बहुत आगे आने की जरूरत है .

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