स्वीकृति क्या है | What is Acceptance in contract law

स्वीकृति क्या है | What is Acceptance

What is Acceptance

आज के इस आर्टिकल में मै आपको स्वीकृति क्या है यह बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा , तो चलिए जान लेते हैं की –

स्वीकृति क्या है

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 2 (ख) में स्वीकृति की परिभाषा दी गयी है जिसके अनुसार – ” जबकि वह व्यक्ति जिसे प्रस्ताव किया जाता है  उसके प्रति अपनी अनुमति प्रदान करता है तब कहा जाता है की प्रस्ताव स्वीकृत हो गया .

वैध स्वीकृति के आवश्यक तत्व

१ –  स्वीकृति की वैध संसूचना – स्वीकृति की परिभाषा से स्पष्ट होता है की वैध स्वीकृति के लिए स्वीकृति की संसूचना आवश्यक है .

२ –  स्वीकृति की संसूचना उस व्यक्ति द्वारा की जनि चाहिए जिसे स्वीकार करने का अधिकार है – वैध संस्वीकृति के लिए आवश्यक है की संसूचना या तो वह व्यक्ति स्वयं करे जिसे प्रस्ताव किया गया है या उसका कोई एजेंट करे , किसी अन्य व्यक्ति द्वारा स्वीकृति की संसूचना वैध नहीं होती .

३ – स्वीकृति स्पष्ट या गर्भित हो सकती है – यह आवश्यक नहीं की स्वीकृति सदैव व्यक्त हो , इसका निष्कर्ष पक्षकारो के आचरण से भी लगाया जा सकता है .

४ – स्वीकृति पूर्ण तथा बिना शर्त होना चाहिए – धारा 7 के अनुसार वैध स्वीकृति के लिए आवश्यक है की वह पूर्ण तथा बिना शर्त के होना चाहिए .

स्वीकृति का ढंग – स्वीकृति उसी ढंग से की जानी चाहिये जिस ढंग से प्रस्ताव निर्धारित करता है , यदि प्रस्ताव में कोई ढंग प्रस्तावित नहीं किया गया है तो स्वीकृति उसी प्रकार से होनी चाहिए जैसा की आम तौर पर होता है .

स्वीकृति कब पूर्ण होती है 

प्रस्ताव के विरुद्ध संस्वीकृति की संसूचना तभी पूर्ण होती है जबकि वह उसका पारेषण कर देता है , जिससे वह स्वीकृति करने वाले की शक्ति से परे हो जाये , परन्तु स्वीकृति करने वाले के विरुद्ध तभी पूर्ण होती है जब वह प्रस्तावक के ज्ञान में आ जाती है . ( धारा 4)

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Updated: June 23, 2019 — 6:30 pm

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