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प्रतिफल क्या है | Pratifal kya hai janiye hindi me

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Pratifal kya hai

प्रतिफल क्या है | Pratifal kya hai janiye hindi me

Pratifal kya hai

आज के इस आर्टिकल में मै आपको प्रतिफल क्या है यह बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा , तो चलिए जान लेते हैं की –

प्रतिफल क्या है

प्रतिफल की परिभाषा भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 2 (घ) में दी गयी है जिसके अनुसार –

जब की वचनदाता की वांछा पर वचनगृहीता या कोई अन्य व्यक्ति कुछ कर चूका है या करने से विरत रहा है , या करता है या करने से प्रविरत रहता है , या करने का या करने से प्रविरत रहने का वचन देता है , तब ऐसा कार्य या प्रविरत या वचन उस वचन के लिए प्रतिफल कहलाता है .

Pratifal kya hai

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा -25 के अनुसार –

प्रतिफल के बिना करार शुन्य है, सिवाय जबकि वह लिखित तथा रजिस्ट्रीकत हो या की गई | किसी बात के लिए प्रतिकर देने का वचन हो, या परिसीमा विधि द्वारा वर्जित किसीऋण के संदाय का वचन हो — प्रतिफल के बिना किया गया करार शून्य है, जबकि वह —

(1) लिखित रूप में अभिव्यक्त और दस्तावेजों के रजिस्ट्रीकरण के लिए तत्समय प्रवृत्त विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत और एक दूसरे के साथ निकट संबंध वाले पक्षकारों के बीच नैसर्गिक प्रेम और सेह के कारण किया गया हो; अथवा

(2) किसी ऐसे व्यक्ति को पूर्णत: या भागत: प्रतिकर देने के लिए वचन हो, जिसने वचनदाता के लिए स्वेच्छया पहले ही कोई बात कर दी हो अथवा ऐसी कोई बात कर दी हो, जिसे करने के लिए वचनदाता वैध रूप से विवश किए जाने का दायीं था; अथवा

(3) जिस ऋण का संदाय वादों की परिसीमा विषयक विधि द्वारा वारित न होने की दशा में लेनदार करा लेता, उसके पूर्णत: या भागत: संदाय के लिए उस व्यक्ति द्वारा जिसे उस वचन से भारित किया जाना है या तन्निमित साधारण या विशेष रूप से प्राधिकृत उसके अधिकर्ता द्वारा, किया गया लिखित और हस्ताक्षरित वचन हो। इनमें से किसी भी दशा में ऐसा करार संविदा है।

Pratifal kya hai janiye hindi me

स्पष्टीकरण 1– इस धारा की कोई भी बात वस्तुत: दिए गए किसी दान की विधिमान्यता पर, जहाँ तक कि दाता और आदाता के बीच का संबंध है, प्रभाव नहीं डालेगी।

स्पष्टीकरण 2 — कोई करार, जिसके लिए वचनदाता की सम्मति स्वतन्त्रता से दी गई है, केवल इस कारण शून्य नहीं है कि प्रतिफल अपर्याप्त है, किन्तु इस प्रश्न को अवधारित करने में कि बचनदाता की सम्मति स्वतन्त्रता से दी गई थी या नहीं, प्रतिफल की अपर्याप्तता न्यायालय द्वारा गणना में भी ली जा सकेगी।

 दृष्टान्त – 

(क) ‘ख’ को किसी प्रतिफल के बिना 1,000 रुपये देने का ‘क’ वचन देता है, यह करार शून्य है।

(ख) ‘क’ नैसर्गिक प्रेम और स्नेह से अपने पुत्र ‘ख’ को 1,000 रुपये देने का वचन देता है। ‘ख’ के प्रति अपने वचन को ‘क’ लेखबद्ध करता है और उसे रजिस्ट्रीकृत करता है। यह संविदा है।

(ग) ‘ख’ की थैली ‘क’ पड़ी पाता है और उसे उसको दे देता है। ‘क’ को ‘ख’ 50 रुपये देने का वचन देता है। यह संविदा है।

(घ) ‘ख’ के शिशु पुत्र का पालन ‘क’ करता है। वैसा करने में हुए ‘क’ के व्ययों के संदाय का ‘ख’ वचन देता है। यह संविदा है।

(ङ) ‘ख’ के 1,000 रुपये ‘क’ द्वारा देय हैं, किन्तु वह ऋण परिसीमा अधिनियम द्वारा वारित है। ‘क’ उस ऋण के मद्दे ‘ख’ को 500 रुपये देने का लिखित वचन हस्ताक्षरित करता है। यह संविदा है।

प्रतिफल क्या है

(च) ‘क’ 1,000 रुपये के मूल्य के घोड़े को 10 रुपये में बेचने का करार करता है। इस करार के लिए ‘क’ की सम्मति स्वतन्त्रता से दी गई थी। प्रतिफल अपर्याप्त होते हुए भी यह करार संविदा है।

(छ) ‘क’ 1,000 रुपये के मूल्य के घोड़े को 10 रुपये में बेचने का करार करता है। ‘क इससे इन्कार करता है कि इस करार के लिए उसकी सम्मति स्वतन्त्रता से दी गई थी।

प्रतिफल की अपर्याप्तता ऐसा तथ्य है, जिसे न्यायालय को यह विचार करने में गणना में लेना चाहिए कि ‘क’ की सम्मति स्वतन्त्रता से दी गई थी या नहीं।

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