प्रस्थापना की संसूचना | The communication of proposal

प्रस्थापना की संसूचना | The communication of proposal

The communication of proposal

प्रस्थापना को करने एवं उसके प्रतिसंहरण सम्बन्धी नियम भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 3 ,4 एवं 5 में दिए गये हैं .

प्रस्ताव किस प्रकार किया जाता है

aप्रस्ताव प्रतिगृहिता को संसूचित करके किया जाता है , प्रस्ताव की संसूचना प्रस्ताव करने वाले पक्षकार के किसी ऐसे कार्य या लोप से हुई समझी जाती है जिसके द्वारा वह ऐसा प्रस्ताव संसूचित करने का आशय रखता है या उसे संसूचित करने का प्रयास करता हो ( धारा -3)

प्रस्ताव की संसूचना तब पूर्ण हो जाती है जब वह उस व्यक्ति के ज्ञान में आ जाती है .जिसे वह की गयी है . ( धारा -4)

प्रस्थापना का प्रतिसंहरण

प्रस्ताव का प्रतिसंहरण , उसे करने वाले पक्षकार के किसी कार्य या लोप से हुआ समझा जाता है जिसके द्वारा वह ऐसे प्रतिसंहरण को संसूचित करने का आशय रखता हो या उसे संसूचित करने का प्रयास करता हो . ( धारा -3)

प्रतिसंहरण की संसूचना उसे करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध तब पूर्ण हो जाती है जब वह उस व्यक्ति के प्रति , जिससे प्रतिसंहरण किया गया हो ,इस प्रकार पारेषण के अनुक्रम में कर दी जाती है , की वह उस व्यक्ति की शक्ति से बहार हो जाये जो उसे करता है .

उस व्यक्ति के विरुद्ध , जिससे प्रतिसंहरण किया गया है , तब पूर्ण हो जाती है , जब वह उसके ज्ञान में आती है .( धारा -4)

The communication of proposal

प्रस्ताव का प्रतिसंहरण कब तक किया जा सकता है

किसी भी प्रस्ताव का प्रतिसंहरण , स्वीकृति की संसूचना प्रस्तावकर्ता के विरुद्ध पूर्ण होने से पहले किसी भी समय किया जा सकता है , परन्तु उसके बाद प्रस्ताव का प्रतिसंहरण नहीं हो सकता .( धारा -5)

प्रस्थापना के प्रतिसंहरण का ढंग

प्रस्थापना का प्रतिसंहरण निम्न तरीके से हो सकता है

१ – प्रस्तावकर्ता द्वारा दुसरे पक्षकार को प्रतिसंहरण की सुचना भेजने पर .

२ – यदि प्रस्ताव में स्वीकृति का समय निर्धारित है तो उसके बीत जाने पर , परन्तु जब प्रस्ताव में स्वीकृति का समय निर्धारित नहीं है तब युक्तियुक्त समय की समाप्ति पर .

३ – स्वीकृति कर्ता द्वारा प्रस्ताव में वर्णित शर्त को पूरा न करने पर .

४ – प्रस्तावकर्ता की मृत्यु होने पर अथवा पागल हो जाने पर , परन्तु यह तब जब प्रस्तावकर्ता की मृत्यु या उसके पागलपन का तथ्य स्वीकृति कर्ता के ज्ञान में स्वीकृति से पहले आ जाता है . ,परन्तु जहाँ उक्त ज्ञान स्वीकृति के बाद आता है वहां प्रस्ताव का प्रतिसंहरण नहीं हो सकता .( धारा -6 )

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डाक अथवा टेलीफोन के द्वारा किया गया प्रस्ताव

डाक द्वारा – डाक द्वारा अथवा तार द्वारा प्रतिग्रहण देने की स्थिति में प्रतिग्रहण देने की संसूचना जहाँ तक प्रस्थापक का सम्बन्ध है , उसी समय और उसी स्थान पर पूर्ण हो जाती है जब की पत्र डाक में दल दिया जाता है ,अथवा तार पोस्ट ऑफिस को दिया जाता है और पत्र डाक में डाले जाने के बाद अथवा तार पोस्ट ऑफिस को दिए जाने के पश्चात् प्रस्थापक अपनी प्रस्थापना वापस नहीं ले सकता है . भले ही प्रतिगृहीता को पत्र अथवा तार न मिला हो .

टेलीफोन अथवा टेलेक्स द्वारा प्रतिग्रहण

टेलीफोन अथवा टेलेक्स द्वारा प्रतिग्रहण  की दशा में प्रतिग्रहण की संसूचना तब सम्पूर्ण हो जाती है जबकि वह प्रस्थापक को प्राप्त हो जाती है और संविदा उस स्थान पर होती है जहाँ पर प्रस्थापक प्रतिग्रहण की संसूचना को प्राप्त करता है .

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Updated: June 23, 2019 — 3:30 pm

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