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धारा 19 विनिर्दिष्ट अनुतोष | Section 19 of Specific relief act in Hindi

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आज के इस आर्टिकल में मै आपको “पक्षकारों के और उनसे व्युत्पन्न पश्चात्वर्ती हक के अधीन दावा करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध अनुतोष | विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम की धारा 19 क्या है | Section 19 Specific relief act in Hindi | Section 19 of Specific relief act | धारा 19 विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम | Relief against parties and persons claiming under them by subsequent titleके विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम की धारा 19 |  Section 19 of Specific relief act

[ Specific relief act Sec. 19 in Hindi ] –

पक्षकारों के और उनसे व्युत्पन्न पश्चात्वर्ती हक के अधीन दावा करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध अनुतोष–

इस अध्याय द्वारा यथा उपबन्धित के सिवाय संविदा के विनिर्दिष्ट पालन का प्रवर्तन निम्नलिखित के विरुद्ध कराया जा सकेगा-

(क) उसमें का कोई पक्षकार;

(ख) ऐसे मूल्यार्थ अन्तरिती के सिवाय, जिसने अपना धन सद्भावपूर्वक तथा मूल संविदा की सूचना के बिना दिया हो, ऐसा कोई दूसरा व्यक्ति, जो उससे व्युत्पन्न ऐसे हक के अधीन दावा कर रहा हो जो संविदा के पश्चात् उद्भूत हुआ हो;

(ग) ऐसा कोई व्यक्ति जो ऐसे हक के अधीन दावा कर रहा हो जो हक, यद्यपि संविदा के पहले का और वादी की जानकारी में था, तथापि प्रतिवादी द्वारा विस्थापित किया जा सकता था;

(घ) जबकि किसी कम्पनी ने कोई संविदा की हो और उसके पश्चात् किसी दूसरी कम्पनी से समामेलित हो गई हो तब ऐसे समामेलन से उद्भूत नई कम्पनी;

(ङ) जबकि किसी कम्पनी के सम्प्रवर्तकों ने उसके निगमन के पहले कोई संविदा कम्पनी के प्रयोजन

के लिए की हो और संविदा ऐसी हो जो निगमन के निबन्धनों द्वारा समर्थित हो, तब वह कम्पनी: परन्तु यह तब जब कि कम्पनी ने संविदा को प्रतिगृहीत कर लिया हो और संविदा के दूसरे पक्षकार को ऐसा प्रतिग्रहण संसूचित कर दिया हो।

धारा 19 Specific relief act

[ Specific relief act Sec. 19 in English ] –

“ Relief against parties and persons claiming under them by subsequent title ”–

Except as otherwise provided by this Chapter, specific performance of a contract may be enforced against—

(a) either party thereto;

(b) any other person claiming under him by a title arising subsequently to the contract, except a transferee for value who has paid his money in good faith and without notice of the original contract;

(c) any person claiming under a title which, though prior to the contract and known to the plaintiff, might have been displaced by the defendant;

(d)  when a company has entered into a contract and subsequently becomes amalgamated with another company, the new company which arises out of the amalgamation;

(e) when the promoters of a company have, before its incorporation, entered into a contract for the purpose of the company and such contract is warranted by the terms of the incorporation, the company:

Provided that the company has accepted the contract and communicated such acceptance to the other party to the contract.

धारा 19 Specific relief act

Specific relief Act Pdf download in hindi

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