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धारा 18 विनिर्दिष्ट अनुतोष | Section 18 of Specific relief act in Hindi

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Section 18 of Specific relief act

आज के इस आर्टिकल में मै आपको “फेरफार किए बिना अप्रवर्तन | विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम की धारा 18 क्या है | Section 18 Specific relief act in Hindi | Section 18 of Specific relief act | धारा 18 विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम | Non-enforcement except with variationके विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम की धारा 18 |  Section 18 of Specific relief act

[ Specific relief act Sec. 18 in Hindi ] –

फेरफार किए बिना अप्रवर्तन-

जहाँ कि वादी ऐसी किसी लिखित संविदा का विनिर्दिष्ट पालन कराना चाहता है, जिसमें फेरफार होना प्रतिवादी अभिकथित करता है, वहाँ वादी, ऐसे अभिकथित फेरफार के बिना ईप्सित पालन निम्नलिखित दशाओं में, अभिप्राप्त नहीं कर सकता, अर्थात् :

(क) जहाँ कि ऐसी लिखित संविदा जिसका पालन ईप्सित है, कपट, तथ्य की भूल अथवा दुर्व्यपदेशन के कारण, अपने निबन्धनों और प्रभाव में उससे भिन्न हो जिसका पक्षकारों ने करार किया था अथवा जिसमें पक्षकारों के बीच करार किए गए वे सारे निबन्धन अन्तर्विष्ट न हों जिनके आधार पर प्रतिवादी ने संविदा की थी;

(ख) जहाँ कि पक्षकारों का उद्देश्य ऐसा कोई विधिक परिणाम पैदा करना था जो यह संविदा, जैसी वह विरचित की गई है, पैदा करने के लिए परिकल्पित न हों;

(ग) जहाँ कि संविदा के निष्पादन के पश्चात् पक्षकारों ने उसके निवन्धनों में फेरफार कर दिया हो।

धारा 18 Specific relief act

[ Specific relief act Sec. 18 in English ] –

“ Non-enforcement except with variation ”–

Where a plaintiff seeks specific performance of a contract in writing, to which the defendant sets up a variation, the plaintiff cannot obtain the performance sought, except with the variation so set up, in the following cases, namely:—

(a) where by fraud, mistake of fact or mis-representation, the written contract of which performance is sought is in its terms or effect different from what the parties agreed to, or does not contain all the terms agreed to between the parties on the basis of which the defendant entered into the contact;

(b) where the object of the parties was to produce a certain legal result which the contract as framed is not calculated to produce;

(c) where the parties have, subsequently to the execution of the contract, varied its terms.

धारा 18 Specific relief act

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