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धारा 20 विनिर्दिष्ट अनुतोष | Section 20 of Specific relief act in Hindi

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आज के इस आर्टिकल में मै आपको “विनिर्दिष्ट पालन की डिक्री करने के बारे में विवेकाधिकार | विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम की धारा 20 क्या है | Section 20 Specific relief act in Hindi | Section 20 of Specific relief act | धारा 20 विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम | Discretion as to decreeing specific performanceके विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम की धारा 20 |  Section 20 of Specific relief act

[ Specific relief act Sec. 20 in Hindi ] –

विनिर्दिष्ट पालन की डिक्री करने के बारे में विवेकाधिकार-

(1) विनिर्दिष्ट पालन की विक्री करने की अधिकारिता वैवेकिक है और न्यायालय ऐसा अनुतोष अनुदत्त करने के लिए आवद्ध नहीं है केवल इस कारण से कि ऐसा करना विधिपूर्ण है किन्तु न्यायालय का यह विवेकाधिकार मनमाना नहीं है वरन् स्वस्थ और युक्तियुक्त, न्यायिक सिद्धांतों द्वारा मार्गदर्शित तथा अपील न्यायालय द्वारा शुद्धिशक्य है।

(2) निम्नलिखित दशाएं ऐसी हैं जिनमें न्यायालय विनिर्दिष्ट पालन को डिक्री न करने के लिए विवेकाधिकार का उचिततया प्रयोग कर सकेगा-

(क) जहाँ कि संविदा के निबन्धन या संविदा करने के समय पक्षकारों का आचरण या अन्य परिस्थितियाँ, जिनके अधीन संविदा की गई थी, ऐसी हों कि संविदा यद्यपि शून्यकरणीय नहीं है, तथापि वादी को प्रतिवादी के ऊपर अऋजु फायदा देती है; अथवा

(ख) जहाँ कि संविदा का पालन प्रतिवादी को कुछ ऐसे कष्ट में डाल देगा जिसे वह पहले से कल्पना नहीं कर सका था, और उसका अपालन वादी को वैसे किसी कष्ट में नहीं डालेगा;

(ग) जहाँ कि प्रतिवादी ने संविदा ऐसी परिस्थितियों के अधीन को हो जिनसे यद्यपि संविदा शून्यकरणीय तो नहीं हो जाती किन्तु उसके विनिर्दिष्ट पालन का प्रवर्तन असाम्यिक हो जाता है।

स्पष्टीकरण 1-प्रतिफल की अपर्याप्तता मात्र या यह तथ्य मात्र कि संविदा प्रतिवादी के लिए दुर्भर या अपनी प्रकृति से ही अदूरदर्शी है, खण्ड (क) के अर्थ के भीतर अऋजु फायदा, अथवा खण्ड (ख) के अर्थ के भीतर कष्ट न समझा जाएगा।

स्पष्टीकरण 2-यह प्रश्न कि संविदा का पालन खण्ड (ख) के अर्थ के भीतर प्रतिवादी को कष्ट में डाल देगा या नहीं संविदा के समय विद्यमान परिस्थितियों के प्रति निर्देशन से अवधारित किया जाएगा सिवाए उन दशाओं के जिनमें कि कष्ट संविदा के पश्चात् वादी द्वारा किए गए ऐसे किसी कार्य के परिणामस्वरूप हुआ

(3) किसी ऐसी दशा में जहाँ कि वादी ने विनिर्दिष्टतः पालनीय संविदा के परिणामस्वरूप सारवान् कार्य किए हैं या हानियाँ उठाई हैं वहाँ न्यायालय विनिर्दिष्ट पालन की डिक्री करने के विवेकाधिकार का उचिततया प्रयोग कर सकेगा।

(4) न्यायालय किसी पक्षकार को संविदा का विनिर्दिष्ट पालन कराने से इन्कार केवल इस आधार पर नहीं करेगा कि संविदा दूसरे पक्षकार की प्रेरणा पर प्रवर्तनीय नहीं है।

धारा 20 Specific relief act

[ Specific relief act Sec. 20 in English ] –

Discretion as to decreeing specific performance ”–

(1) The jurisdiction decree specific performance is discretionary, and the court is not bound to gram such as merely because it is lawful to do so: but the discretion of the court is not arbitrary but  Sound and reasonable, guided by judicial principles and capable of correction by a court of appeal.

(2) The following are cases in which the court may properly exercise discretion to decree specific performance :

(a) where the terms of the contract or the conduct of the parties at the time of entering into the contract or the other circumstances under which the contract was entered into are such that the contract, though not voidable, gives the plaintiff an unfair advantage over the defendant; or

(b) where the performance of the contract would involve some hardship on the defendant which he did not foresee, whereas its non-performance would involve no such hardship on the plaintiff; or

(c) where the defendant entered into the contract under circumstances which though not rendering the contract voidable, makes it inequitable to enforce specific performance.

Explanation 1 – Mere inadequacy of consideration, or the mere fact that the contract is onerous to the defendant or improvident in its nature, shall not be deemed to constitute an unfair advantage within the meaning of clause (a) or hardship within the meaning of clause (b).

Explanation 2 – The question whether the performance of a contract would involve hardship on the defendant within the meaning of clause (b) shall, except in cases where the hardship has resulted from any act of the plaintiff subsequent to the contract, be determined with reference to the circumstances existing at the time of the contract.

(3) The court may properly exercise discretion to decree specific performance in any case where the plaintiff has done substantial acts or suffered losses in consequence of a contract capable of specific performance.
(4) The court shall not refuse to any party specific performance of a contract merely on the ground that the contract is not enforceable at the instance of the party.

धारा 20 Specific relief act

Specific relief Act Pdf download in hindi

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