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राज्यपाल की नियुक्ति | Governors of state

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Governors of state

राज्यपाल की नियुक्ति | Governors of state

Governors of state

आज के इस आर्टिकल में मै आपको राज्यपाल के निर्वाचन की प्रक्रिया के बारे में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा , तो चलिए जान लेते हैं की –

राज्यपाल के निर्वाचन की प्रक्रिया क्या है

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 153 से अनुच्छेद 161 में राज्यपाल के निर्वाचन की प्रक्रिया के बारे में बताया गया है जिसके अनुसार –

अनुच्छेद 153- राज्यों के राज्यपाल

प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा :
[परन्तु इस अनुच्छेद की कोई बात एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों के लिए राज्यपाल नियुक्त किए जाने से निवारित नहीं करेगी।]

अनुच्छेद -154 -राज्य की कार्यपालिका शक्ति

(1) राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होगी और वह इसका प्रयोग इस संविधान के अनुसार स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के द्वारा करेगा।
(2) इस अनुच्छेद की कोई बात–
(क) किसी विद्यमान विधि द्वारा किसी अन्य प्राधिकारी को प्रदान किए गए कृत्य राज्यपाल को अंतरित करने वाली नहीं समझी जाएगी; या
(ख) राज्यपाल के अधीनस्थ किसी प्राधिकारी को विधि द्वारा कृत्य प्रदान करने से संसद‌ या राज्य के विधान-मंडल को निवारित नहीं करेगी।

अनुच्छेद 155 -राज्यपाल की नियुक्ति

राज्य के राज्यपाल को राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा नियुक्त करेगा।

अनुच्छेद 156 – राज्यपाल की पदावधि

(1) राज्यपाल, राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करेगा।
(2) राज्यपाल, राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा।
(3) इस अनुच्छेद के पूर्वगामी उपबंधों के अधीन रहते हुए, राज्यपाल अपने पदग्रहण की तारीख से पाँच वर्ष की अवधि तक पद धारण करेगा:
परन्तु राज्यपाल, अपने पद की अवधि समाप्त हो जाने पर भी, तब तक पद धारण करता रहेगा जब तक उसका उत्तराधिकारी अपना पद ग्रहण नहीं कर लेता है।

अनुच्छेद -157 – राज्यपाल नियुक्त होने के लिए अहर्ता

कोई व्यक्ति राज्यपाल नियुक्त होने के लिए पात्र तभी होगा जब वह भारत का नागरिक हो और पैंतीस वर्ष की आयु पूरी कर चूका हो

अनुछेद -158 – राज्यपाल के पद के लिए शर्तें –

(१) राज्यपाल संसद के किसी भी सदन का या प्रथम अनुसूची में निर्दिष्ट किसी राज्य के विधानमंडल के किसी सदन का सदस्य नहीं होगा, और यदि संसद के किसी भी सदन का या ऐसे किसी राज्य के विधानमंडल के किसी सदन का सदस्य राज्यपाल नियुक्त हो जाता है , तो यह समझा जायेगा की उसने उस सदन में अपना स्थान राज्यपाल के रूप में पद गृहन की तारीख से रिक्त कर दिया है .

(२) राज्यपाल लाभ का कोई अन्य पद धारण नहीं करेगा .

(3) राज्यपाल , बिना किराये दिए , अपने शासकीय निवासो के उपयोग का हक़दार होगा और ऐसी उपलब्धियों भत्तो और विशेषाधिकारो का भी , जो संसद विधि द्वारा अवधारित करे और जब तक इस निमित्त इस प्रकार उपबंध नहीं किया जाता है तब तक ऐसी उपलब्धियों , भत्तो और विशेषाधिकारो का जो दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं हक़दार होगा .

(3 ए) जहां एक ही व्यक्ति को दो या दो से अधिक राज्यों के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया जाता है, वहां उस राज्यपाल को संदेय उपलब्धियां और भत्ते उन राज्यों के बीच ऐसे अनुपात में आवंटित किये जायेंगे जो राष्ट्रपति आदेश द्वारा अवधारित करे.

(४) राज्यपाल की उपलब्धियां और भत्ते उसकी पदावधि के दौरान कम नहीं किये जायेंगे

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अनुच्छेद -159 राज्यपाल द्वारा शपथ और प्रतिज्ञान –

प्रत्येक राज्यपाल और प्रत्येक व्यक्ति, जो राज्यपाल के रूप में कार्य कर रहा है या उसके कृत्यों का निर्वहन कर रहा है, अपना पद ग्रहण करने से पहले उस राज्य के सम्बन्ध में अधिकारिता का प्रयोग करने वाले  उच्चन्यायालय के  मुख्‍य न्यायमूर्ति या उसकी अनुपस्थिति में उस न्यायालय में उपलब्ध ज्येष्ठतम न्यायाधीश के समक्ष निम्नलिखित प्ररूप में शपथ लेगा या प्रतिज्ञान करेगा और उस पर अपने हस्ताक्षर करेगा, अर्थात्‌: —
ईश्वर की शपथ लेता हूँ

“मैं, अमुक ——————————-कि मैं श्रद्धापूर्वक ………..( राज्य का नाम ) सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूँ।

के राज्य पालके पद का कार्यपालन (अथवा राज्यपाल के कृत्यों का निर्वहन) करूंगा तथा अपनी पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करूँगा और मैं …………………( राज्य का नाम ) की जनता की सेवा और कल्याण में निरत रहूँगा।”

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अनुच्छेद -160 – कुछ आकस्मिकताओं में राज्यपाल के कृत्यों का निर्वहन –

राष्ट्रपति ऐसी आकस्मिकताओ में , जो इस अध्याय में उपबंधित नहीं है , राज्य के राज्यपाल के कृत्यों के निर्वहन के लिए ऐसा उपबंध कर सकेगा जो वह ठीक समझता है .

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अनुच्छेद -161 – क्षमा आदि की और कुछ मामलों में दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण की राज्यपाल की शक्ति-

किसी राज्य के राज्यपाल को उस विषय संबंधी, जिस विषय पर उस राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार है, किसी विधि के विरुद्ध किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराए गए किसी व्यक्ति के दंड को क्षमा, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की अथवा दंडादेश में निलंबन, परिहार या लघुकरण की शक्ति होगी।

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