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कौन से करार संविदा हैं | What agreements are contracts

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What agreements are contracts

कौन से करार संविदा हैं | What agreements are contracts

What agreements are contracts

एक संविदा के लिए आवश्यक है की एक करार होना चाहिए , बिना करार के संविदा नहीं हो सकती . अतः यह कहना सही ही है की सभी संविदाएं करार होती हैं , परन्तु यह कहना सही नहीं है की सभी करार संविदाएं होती हैं .

भारतीय संविदा अधिनियम में दी गयी संविदा की परिभाषा इसे स्पष्ट करती है की ऐसा करार जो विधि द्वारा प्रवर्तनीय है संविदा कहलाता है .

इसका अर्थ है ऐसा करार जो पक्षकारो में विधिक अधिकार एवं बाध्यता का सृजन करता हो तथा जिनका विधिक मूल्य होता है .कुछ ऐसे करार हैं जिनको विधि द्वारा प्रवर्तित नहीं कराया जा सकता जैसे – A द्वारा B को सिनेमा दिखने का करार .

कौन से करार विधि द्वारा प्रवर्तनीय है इस बारे में धारा 10 भारतीय संविदा अधिनियम उपबंध करती है .

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धारा 10 के अनुसार कोई करार संविदा है यदि संविदा में निम्न आवश्यक तत्व विधमान है –

१ – एक करार हो

२ – सक्षम पक्षकार

३ – स्वतंत्र सम्मति

४ – विधिपूर्ण प्रतिफल

५ – विधिपूर्ण उद्देश्य

६ – ऐसे करार जिन्हें विधि द्वारा शून्य घोषित न कर दिया गया हो

७ – अन्य वैध आवश्यकताएं

धारा 10 में वर्णित उक्त आवश्यकताओ को अधिनियम की धारा 11 से 30 तक व अन्य अनेक धाराओ में विस्तार पूर्वक बताया गया है .

१ – एक करार हो – संविदा निर्माण के लिए एक करार का होना आवश्यक ई , संविदा का जन्म करार से होता है , एक वैध करार के लिए प्रस्ताव तथा प्रस्ताव पर स्वीकृति होनी चाहिए .

धारा 2(e) करार को परिभाषित करती है – ” हर एक वचन और ऐसे वचनों का हर एक संवर्ग , जो एक दुसरे के लिए प्रतिफल हो , करार है ”

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२ – सक्षम पक्षकार – कौन पक्षकार सक्षम है इसको धारा 11 उपबंधित करती है पक्षकार संविदा करने में सक्षम है यदि वह –

अ – वयस्क हो

ब- स्वस्थचित्त हों

स – विधि द्वारा निर्हित न हो

३ – स्वतन्त्र सम्मति – वैध संविदा के लिए आवश्यक है की पक्षकारो की सम्मति स्वतन्त्र रूप से प्राप्त की गयी हो . धारा 13 एवं 14 के अनुसार स्वतन्त्र सम्मति तब मानी जाती है जब –

अ – दो या अधिक व्यक्ति एक ही बात पर एक ही भाव में सहमत होते हैं ( धारा-13)

ब – ऐसी सम्मति निम्न के द्वारा प्राप्त न की गयी हो ( धारा-14)

स – उत्पीडन द्वारा ( धारा-15)

द – असम्यक असर ( धारा-16)

न- कपट ( धारा-17)

प  – दुर्व्यप्देशन ( धारा-18)

फ – भूल द्वारा ( धारा-20 , 21 , 22)

कौन से करार संविदा हैं

४ – विधिपूर्ण प्रतिफल एवं विधिपूर्ण उद्देश्य – संविदा का एक आवश्यक तत्व विधिपूर्ण प्रतिफल एवं उद्देश्य है . धारा 23 के अनुसार कोई प्रतिफल और उद्देश्य विधिपूर्ण तब होता है जब –

अ – वह विधि द्वारा निषिद्ध न हो

ब – किसी विधि के उपबंधो को विफल न करे

स – वह कपट न हो

द – वह किसी व्यक्ति के शरीर या संपत्ति को क्षति अन्तर्वलित न करता हो

न – अनैतिक न हो

प – वक् लोक निति के विरुद्ध न हो

कौन से करार संविदा हैं

५ – करार शून्य घोषित न किए गए हों – यदि करार शून्य घोषित कर दिए गये हैं तो ऐसी संविदा शून्य संविदा होगी . निम्न करारो को शून्य घोषित किया गया है –

अ – प्रतिफल बिना करार ( धारा-25)

ब  – विवाह अवरोधक करार ( धारा-26)

स – व्यापर अवरोधक करार ( धारा-27)

द – विधिक कार्यवाहियों के अवरोधक करार ( धारा-28)

न – अनिश्चितता रखने वाले करार ( धारा-29)

प – बाजी के करार ( धारा-30)

फ – असंभव घटना पर समाश्रित संविदा ( धारा-36)

ध – असंभव कार्य के करार ( धारा-56)

 

६ – अन्य वैध आवश्यकताएं – यदि किसी विधि द्वारा आवश्यक है की संविदा लिखित होनी चाहिए , साक्षी द्वारा प्रमाणित होनी चाहिए या पंजीकृत होनी चाहिए तो ऐसी सभी विधिक आवश्यकताएं पूर्ण होनी चाहिए . जैसे – दान की संविदा लिखित होना चाहिये .

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