धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण | Section 7 Prevention of corruption act Hindi

आज के इस आर्टिकल में मै आपको “लोक सेवक द्वारा पदीय कार्य के लिए वैध पारिश्रमिक से भिन्न परितोषण लिया जाना | भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 क्या है | Section 7 Prevention of corruption act in hindi | Section 7 of Prevention of corruption act | धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम | Public servant taking gratification other than legal remuneration in respect of an official actके विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 |  Section 7 of Prevention of corruption act

[ Prevention of corruption act Sec. 7 in Hindi ] –

लोक सेवक द्वारा पदीय कार्य के लिए वैध पारिश्रमिक से भिन्न परितोषण लिया जाना–

जो कोई लोक सेवक होते हुए या होने की प्रत्याशा रखते हुए वैध पारिश्रमिक से भिन्न किसी प्रकार का भी कोई परितोषण इस बात के करने के लिए हेतु या इनाम के रूप में किसी व्यक्ति से अपने लिए या किसी अन्य व्यक्ति के लिए प्रतिगृहीत या अभिप्राप्त करेगा या प्रतिगृहीत करने को सहमत होगा या अभिप्राप्त करने का प्रयत्न करेगा कि वह लोक सेवक अपना कोई पदीय कार्य करे या करने से प्रविरत रहे अथवा किसी व्यक्ति को अपने पदीय कृत्यों के प्रयोग में कोई अनुग्रह या अननुग्रह दिखाए या दिखाने से प्रविरत रहे अथवा केंद्रीय सरकार या किसी राज्य की सरकार या संसद् या किसी राज्य विधान-मंडल में या धारा 2 के खंड (ग) में निर्दिष्ट किसी स्थानीय प्राधिकारी, निगम या सरकारी कंपनी में या किसी लोक सेवक के यहाँ, चाहे वह नामित हो या नहीं, किसी व्यक्ति का कोई उपकार या अपकार करे या करने का प्रयत्न करे, वह कारावास से, जिसकी अवधि [तीन वर्ष से कम नहीं होगी किंतु सात वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी दंडित किया जाएगा।

स्पष्टीकरण—(क) “लोक सेवक होने की प्रत्याशा रखते हुए यदि कोई व्यक्ति जो किसी पद पर होने की प्रत्याशा न रखते हुए, दूसरों को प्रवंचना से यह विश्वास करा कर कि वह किसी पद पर होने वाला है और यह कि तब वह उनका उपकार करेगा, उससे परितोषण अभिप्राप्त करेगा, तो वह छल करने का दोषी हो सकेगा किंतु वह इस धारा में परिभाषित अपराध का दोषी नहीं है।

(ख) “परितोषण –“परितोषण” शब्द से धन संबंधी परितोषण तक, या उन परितोषणों तक ही, जो धन में आंके जाने योग्य हैं, निर्बंधित नहीं है।

(ग) “वैध पारिश्रमिक – वैध पारिश्रमिक शब्द उस पारिश्रमिक तक ही निर्बंधित नहीं हैं जिसकी मांग कोई लोक सेवक विधि पूर्ण रूप से कर सकता है, किंतु इसके अंतर्गत वह समस्त पारिश्रमिक आता है जिसको प्रतिगृहीत करने के लिए उस सरकार या संगठन द्वारा, जिसकी सेवा में है, उसे अनुज्ञा दी गई है।

(च) “करने के लिए हेतुक या इनाम —वह व्यक्ति जो वह कार्य करने के लिए हेतुक या इनाम के रूप में, जिसे करने का उसका आशय नहीं है, या जिसे करने की स्थिति में वह नहीं है या जो उसने नहीं किया है, परितोषण प्राप्त करता है, इस पद के अंतर्गत आता है।

(ङ) जहां कोई लोक सेवक किसी व्यक्ति को यह गलत विश्वास करने के लिए उत्प्रेरित करता है कि सरकार में उसके असर से उस व्यक्ति को कोई हक अभिप्राप्त हुआ है, और इस प्रकार उस व्यक्ति को इस सेवा के लिए पुरस्कार के रूप में लोक सेवक को धन या कोई अन्य परितोषण देने के लिए उत्प्रेरित करता है, तो यह इस धारा के अधीन लोक सेवक द्वारा किया गया अपराध होगा।

धारा 7 Prevention of corruption act

[ Prevention of corruption act Sec. 7 in English ] –

Public servant taking gratification other than legal remuneration in respect of an official act ”–

Whoever, being, or expecting to be a public servant, accepts or obtains or agrees to accept or attempts to obtain from any person, for himself or for any other person, any gratification whatever, other than legal remuneration, as a motive or reward for doing or forbearing to do any official act or for showing or forbearing to show, in the exercise of his official functions, favour or disfavour to any person or for rendering or attempting to render any service or disservice to any person, with the Central Government or any State Government or Parliament or the Legislature of any State or with any local authority, corporation or Government company referred to in clause (c) of section 2, or with any public servant, whether named or otherwise, shall be punishable with imprisonment which shall be not less than 1[three years] but which may extend to 2[seven years] and shall also be liable to fine. 

Explanations.—(a) “Expecting to be a public servant.” If a person not expecting to be in office obtains a gratification by deceiving others into a belief that he is about to be in office, and that he will then serve them, be may be guilty of cheating, but he is not guilty of the offence defined in this section. 

(b) “Gratification.” The word “gratification” is not restricted to pecuniary gratifications or to gratifications estimable in money. 

(c) “Legal remuneration.” The words “legal remuneration” are not restricted to remuneration which a public servant can lawfully demand, but include all remuneration which he is permitted by the Government or the organisation, which he serves, to accept. 

(d) “A motive or reward for doing.” A person who receives a gratification as a motive or reward for doing what he does not intend or is not in a position to do, or has not done, comes within this expression. 

(e) Where a public servant induces a person erroneously to believe that his influence with the Government has obtained a title for that person and thus induces that person to give the public servant, money or any other gratification as a reward for this service, the public servant has committed an offence under this section. 

धारा 7 Prevention of corruption act

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम  

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Updated: May 17, 2020 — 2:06 pm

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