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धारा 427 CrPC | Section 427 CrPC in Hindi | CrPC Section 427

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आज के इस आर्टिकल में मै आपको “ऐसे अपराधी की दंडादेश जो अन्य अपराध के लिए पहले से दंडादिष्ट है | दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 427 क्या है | section 427 CrPC in Hindi | Section 427 in The Code Of Criminal Procedure | CrPC Section 427 | Sentence on offender already sentenced for another offenceके विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 427 |  Section 427 in The Code Of Criminal Procedure

[ CrPC Sec. 427 in Hindi ] –

ऐसे अपराधी की दंडादेश जो अन्य अपराध के लिए पहले से दंडादिष्ट है—

(1) जब कारावास का दंडादेश पहले से ही भोगने वाले व्यक्ति को पश्चात्वर्ती-दोषसिद्धि पर कारावास या आजीवन कारावास का दंडादेश दिया जाता है तब जब तक न्यायालय यह निदेश न दे कि पश्चात्वर्ती दंडादेश ऐसे पूर्व दंडादेश के साथ-साथ भोगा जाएगा, ऐसा कारावास या आजीवन कारावास उस कारावास की समाप्ति पर, जिसके लिए, वह पहले दंडादेश हुआ था, प्रारंभ होगा: ।

परन्तु, जहाँ उस व्यक्ति को, जिसे प्रतिभूति देने में व्यतिक्रम करने पर धारा 122 के अधीन आदेश द्वारा कारावास का दंडादेश दिया गया है ऐसा दंडादेश भोगने के दौरान ऐसे आदेश के दिए जाने के पूर्व किए गए अपराध के लिए कारावास का दंडादेश दिया जाता है, वहां पश्चात्कथित दंडादेश तुरन्त प्रारंभ हो जाएगा।

(2) जब किसी व्यक्ति को, जो आजीवन कारावास का दंडादेश पहले से ही भोग रहा है, पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि पर किसी अवधि के कारावास या आजीवन कारावास का दंडादेश दिया जाता है तब पश्चात्वर्ती दंडादेश पूर्व दंडादेश के साथ-साथ भोगा जाएगा।

धारा 427 CrPC

[ CrPC Sec. 427 in English ] –

“Sentence on offender already sentenced for another offence ”–

(1) When a person already undergoing a sentence of imprisonment is sentenced on a subsequent conviction to imprisonment or imprisonment for life, such imprisonment or imprisonment for life shall commence at the expiration of the imprisonment to which he has been previously sentenced, unless the Court directs that the subsequent sentence shall run concurrently with such previous sentence: Provided that where a person who has been sentenced to imprison- ment by an order under section 122 in default of furnishing security is, whilst undergoing such sentence, sentenced to imprisonment for an offence committed prior to the making of such order, the latter sentence shall commence immediately.
(2) When a person already undergoing a sentence of imprisonment for life is sentenced on a subsequent conviction to imprisonment for a term or imprisonment for life, the subsequent sentence shall run con- currently with such previous sentence.

धारा 427 CrPC

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