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धारा 393 CrPC | Section 393 CrPC in Hindi | CrPC Section 393

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section 393 CrPC in Hindi

आज के इस आर्टिकल में मै आपको “अपील पर आदेशों और निर्णयों का अंतिम होना | दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 393 क्या है | section 393 CrPC in Hindi | Section 393 in The Code Of Criminal Procedure | CrPC Section 393 | Finality of judgments and orders on appeal के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 393 |  Section 393 in The Code Of Criminal Procedure

[ CrPC Sec. 393 in Hindi ] –

अपील पर आदेशों और निर्णयों का अंतिम होना-

अपील में अपील न्यायालय द्वारा पारित निर्णय या आदेश धारा 377, धारा 378, धारा 384 की उपधारा (4) या अध्याय 30 में उपबंधित दशाओं के सिवाय अंतिम होंगे :

परन्तु किसी मामले में दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील का अंतिम निपटारा हो जाने पर भी, अपील न्यायालय-

(क) धारा 378 के अधीन दोषमुक्ति के विरुद्ध उसी मामले से पैदा होने वाली अपील को ; अथवा

(ख) धारा 377 के अधीन दंडादेश में वृद्धि के लिए उसी मामले से पैदा होने वाली अपील को, सुन सकता है और गुणागुण के आधार पर उसका निपटारा कर सकता है।

धारा 393 CrPC

[ CrPC Sec. 393 in English ] –

“Finality of judgments and orders on appeal”–

 Judgments and orders passed by an Appellate Court upon an appeal shall be final, except in the cases provided for in section 377, section 378, sub- section (4) of section 384 or Chapter XXX: Provided, that notwithstanding the final disposal of an appeal against conviction in any case, the Appellate Court may hear and dispose of, oil the merits,-

(a) an appeal against acquittal under section 378, arising out of the same case, or
(b) an appeal for the enhancement of sentence under section 377, arising out of the same case.

धारा 393 CrPC

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