धारा 38 सम्पत्ति अन्तरण | Section 38 of Transfer of property Act Hindi

आज के इस आर्टिकल में मै आपको “कुछ परिस्थितियों में ही अंतरण करने के लिए प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा अंतरण | सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम की धारा 38 क्या है | Section 38 Transfer of property Act in hindi | Section 38 of Transfer of property Act | धारा 38 सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम | Transfer by person authorised only under certain circumstances to transfer के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम की धारा 38 |  Section 38 of Transfer of property Act | Section 38 Transfer of property Act in Hindi

[ Transfer of property Act Section 38 in Hindi ] –

कुछ परिस्थितियों में ही अंतरण करने के लिए प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा अंतरण-

जहां कि कोई व्यक्ति, जो ऐसी परिस्थितियों में ही, जिनमें प्रकृत्या फेरफार होता रहता है. स्थावर सम्पत्ति का ब्ययन करने के लिए प्राधिकृत है, ऐसी परिस्थितियों के वर्तमान होने का अभिकथन करके ऐसी सम्पत्ति को प्रतिफल के लिए अंतरित करता है, वहां यदि अंतरिती ने ऐसी परिस्थितियों में होने का अभिनिश्चय करने के लिए युक्तियुक्त सावधानी बरतने के पश्चात् सद्भावपूर्वक कार्य किया है, तो जहां तक एक ओर अन्तरिती का और दूसरी ओर अन्तरक और ऐसे अन्य व्यक्तियों के (यदि कोई हों), जिन पर प्रभाव पड़ा है, बीच का संबंध है यह समझा जाएगा कि वे परिस्थितियां वर्तमान थीं।

दृष्टांत

हिन्दु विधवा क जिसका पति साम्पाश्चिक वारिस छोड़ गया है, यह अभिकथित करते हुए कि ऐसे रूप में उसके द्वारा धारित सम्पत्ति उसके भरणपोषण के लिए अपर्याप्त है, एक खेत को, जो उस सम्पत्ति का भाग है ख को ऐसे प्रयोजनों के लिए, जो न तो धार्मिक है और न खैराती है, बेचने का करार करती है । ख युक्तियुक्त जांच के बाद अपना यह समाधान कर लेता है कि क के भरणपोषण के लिए सम्पत्ति की आय अपर्याप्त है और खेत का विक्रय आवश्यक है, और सद्भावपूर्वक कार्य करते हुए क से खेत खरीद लेता है। जहां तक कि एक ओर ख और दूसरी ओर क और साम्पाविक वारिसों के बीच का संबंध है यह समझा जाएगा कि उक्त विक्रय को आवश्यकता वर्तमान थी।

धारा 38 Transfer of property Act

[ Transfer of property Act Sec. 38 in English ] –

Transfer by person authorised only under certain circumstances to transfer”–

Where any person, authorised only under circumstances in their nature variable to dispose of immoveable property, transfers such property for consideration, alleging the existence of such circumstances, they shall, as between the transferee on the one part and the transferor and other persons (if any) affected by the transfer on the other part, be deemed to have existed, if the transferee, after using reasonable care to ascertain the existence of such circumstances, has acted in good faith. 

Illustration 

A, a Hindu widow, whose husband has left collateral heirs, alleging that the property held by her as such is insufficient for her maintenance, agrees, for purposes neither religious nor charitable, to sell a field, part of such property, to B. B satisfies himself by reasonable enquiry that the income of the property is insufficient for A’s maintenance, and that the sale of the field is necessary, and acting in good faith, buys the field from A. As between B on the one part and A and the collateral heirs on the other part, a necessity for the sale shall be deemed to have existed. 

धारा 38 Transfer of property Act 

सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम  

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Updated: May 24, 2020 — 8:51 pm

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