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धारा 352 CrPC | Section 352 CrPC in Hindi | CrPC Section 352

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section 352 CrPC in Hindi

आज के इस आर्टिकल में मै आपको “कुछ न्यायाधीशों और मजिस्ट्रेटों के समक्ष किए गए अपराधों का उनके द्वारा विचारण न किया जाना | दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 352 क्या है | section 352 CrPC in Hindi | Section 352 in The Code Of Criminal Procedure | CrPC Section 352 | Certain Judges and Magistrates not to try certain offences when committed before themselvesके विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 352 |  Section 352 in The Code Of Criminal Procedure

[ CrPC Sec. 352 in Hindi ] –

कुछ न्यायाधीशों और मजिस्ट्रेटों के समक्ष किए गए अपराधों का उनके द्वारा विचारण न किया जाना—

धारा 344,345,349 और 350 में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, (उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से भिन्न) दंड न्यायालय का कोई भी न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट धारा 195 में निर्दिष्ट किसी अपराध के लिए किसी व्यक्ति का विचारण उस दशा में नहीं करेगा, जब वह अपराध उसके समक्ष या उसके प्राधिकार का अवमान करके किया गया है अथवा किसी न्यायिक कार्यवाही के दौरान ऐसे न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट की हैसियत में उसके ध्यान में लाया गया है।

धारा 352 CrPC

[ CrPC Sec. 352 in English ] –

“ Certain Judges and Magistrates not to try certain offences when committed before themselves”–

Except as provided in sections 344, 345, 349 and 350, no Judge of a Criminal Court (other than a Judge of a High Court) or Magistrate shall try any person for any offence referred to in section 195, when such offence is committed before himself or in contempt of his authority, or is brought under his notice as such Judge or Magistrate in the course of a judicial proceeding.

धारा 352 CrPC

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