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धारा 278 CrPC | Section 278 CrPC in Hindi | CrPC Section 278

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section 278 CrPC in Hindi

आज के इस आर्टिकल में मै आपको “जब ऐसा साक्ष्य पूरा हो जाता है तब उसके संबंध में प्रक्रिया | दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 278 क्या है | section 278 CrPC in Hindi | Section 278 in The Code Of Criminal Procedure | CrPC Section 278 | Procedure in regard to such evidence when completed के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 278 |  Section 278 in The Code Of Criminal Procedure

[ CrPC Sec. 278 in Hindi ] –

जब ऐसा साक्ष्य पूरा हो जाता है तब उसके संबंध में प्रक्रिया–

(1) जैसे-जैसे प्रत्येक साक्षी का साक्ष्य जो धारा 275 या धारा 276 के अधीन लिया जाए, पूरा होता जाता है, वैसे-वैसे वह, यदि अभियुक्त हाजिर हो तो उसकी, या यदि वह प्लीडर द्वारा हाजिर हो तो उसके प्लीडर की उपस्थिति में साक्षी को पढ़कर सुनाया जाएगा और यदि आवश्यक हो तो शुद्ध किया जाएगा।

(2) यदि साक्षी साक्ष्य के किसी भाग की शुद्धता से उस समय इनकार करता है जब वह उसे पड़कर सुनाया जाता है तो मजिस्ट्रेट या पीठासीन न्यायाधीश साक्ष्य को शुद्ध करने के बजाय उस पर साक्षी द्वारा उस बाबत की गई आपत्ति का ज्ञापन लिख सकता है और उसमें ऐसी टिप्पणियां जोड़ देगा जैसी वह आवश्यक समझे।

(3) यदि साक्ष्य का अभिलेख उस भाषा से भिन्न भाषा में है जिसमें वह दिया गया है और साक्षी उस भाषा को नहीं समझता है तो, उसे ऐसे अभिलेख का भाषान्तर उस भाषा में जिसमें वह दिया गया था अथवा उस भाषा में जिसे वह समझता हो, सुनाया जाएगा।

धारा 278 CrPC

[ CrPC Sec. 278 in English ] –

“ Procedure in regard to such evidence when completed ”–

(1) As the evidence of each witness taken under section 275 or section 276 is completed, it shall be read over to him in the presence of the accused, if in attendance, or of his pleader, if he appears by pleader, and shall, if necessary, be corrected.
(2) If the witness denies the correctness of any part of the evidence when the same is read over to him, the Magistrate or presiding Judge may, instead of correcting the evidence, make a memorandum thereon of the objection made to it by the witness and shall add such remarks as he thinks necessary.
(3) If the record of the evidence is in a language different from that in which it has been given and the witness does not understand that language, the record shall be interpreted to him in the language in which it was given, or in a language which he understands.

धारा 278 CrPC

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