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धारा 21 संविदा अधिनियम | Section 21 Indian Contract act in Hindi

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आज के इस आर्टिकल में मै आपको विधि के बारे की भूलों का प्रभाव  | भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 21 क्या है | Section 21 Indian Contract act in Hindi | Section 21 of Indian Contract act | धारा 21 भारतीय संविदा अधिनियम | Effect of mistakes as to lawके विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 21 |  Section 21 of Indian Contract act

[ Indian Contract act Sec. 21 in Hindi ] –

विधि के बारे की भूलों का प्रभाव-

कोई संविदा इस कारण ही शून्यकरणीय नहीं है कि वह [भारत) में प्रवृत्त विधि के बारे की किसी भूल के कारण की गई थी, किन्तु किसी ऐसी विधि के बारे की, जो भारत में प्रवृत्त नहीं है, किसी भूल का वही प्रभाव है जो तथ्य की भूल का है।

दृष्टांत

क और ख इस गलत विश्वास पर संविदा करते हैं कि एक विशिष्ट ऋण भारतीय परिसीमा विधि द्वारा वारित है । संविदा शून्यकरणीय नहीं है।

धारा 21 Indian Contract act

[ Indian Contract act Sec. 21  in English ] –

“Effect of mistakes as to law”–

A contract is not voidable because it was caused by a mistake as to any law in force in 1[India]; but a mistake as to a law not in force in 1[India] has the same effect as a mistake of fact.

Illustration

A and B make a contract grounded on the erroneous belief that a particular debt is barred by the Indian Law of Limitation; the contract is not voidable.

धारा 21 Indian Contract act

भारतीय संविदा अधिनियम 

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Indian contract act 

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Section 1 of limitation act Section 1 of limitation act

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