धारा 174 संविदा अधिनियम | Section 174 Indian Contract act in Hindi

आज के इस आर्टिकल में मै आपको “जिस ऋण या वचन के लिए माल गिरवी रखा गया है, पणयमदार उससे भिन्न ऋण या वचन के लिए उसका प्रतिधारण नहीं करेगा। पश्चात्वर्ती उधारों के बारे में उपधारणा | भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 174 क्या है | Section 174 Indian Contract act in Hindi | Section 174 of Indian Contract act | धारा 174 भारतीय संविदा अधिनियम | Pawnee not to retain for debt or promise other than that for which goods pledged. Presumption in case of subsequent advancesके विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 174 |  Section 174 of Indian Contract act

[ Indian Contract act Sec. 174 in Hindi ] –

जिस ऋण या वचन के लिए माल गिरवी रखा गया है, पणयमदार उससे भिन्न ऋण या वचन के लिए उसका प्रतिधारण नहीं करेगा। पश्चात्वर्ती उधारों के बारे में उपधारणा–

पणयमदार उस ऋण या वचन से भिन्न किसी ऋण या वचन के लिए, जिसके लिए माल गिरवी रखा गया है, उस माल का प्रतिधारण उस प्रभाव की संविदा के अभाव में न करेगा, किन्तु तत्प्रतिकूल किसी बात के अभाव में ऐसी संविदा की उपधारणा पणयमदार द्वारा दिए गए पश्चात्वर्ती उधारों के बारे में कर ली जाएगी।

धारा 174 Indian Contract act

[ Indian Contract act Sec. 174  in English ] –

“Pawnee not to retain for debt or promise other than that for which goods pledged. Presumption in case of subsequent advances”–

The pawnee shall not, in the absence of a contract to that effect, retain the goods pledged for any debt or promise other than the debt or promise for which they are pledged; but such contract, in the absence of anything to the contrary, shall be presumed in regard to subsequent advances made by the pawnee.

धारा 174 Indian Contract act

भारतीय संविदा अधिनियम 

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Section 1 of limitation actSection 1 of limitation act
Updated: May 10, 2020 — 8:33 pm

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