धारा 143 संविदा अधिनियम | Section 143 Indian Contract act in Hindi

आज के इस आर्टिकल में मै आपको “छिपाव द्वारा अभिप्राप्त प्रत्याभूति अविधिमान्य होगी | भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 143 क्या है | Section 143 Indian Contract act in Hindi | Section 143 of Indian Contract act | धारा 143 भारतीय संविदा अधिनियम | Guarantee obtained by concealment invalidके विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 143 |  Section 143 of Indian Contract act

[ Indian Contract act Sec. 143 in Hindi ] –

छिपाव द्वारा अभिप्राप्त प्रत्याभूति अविधिमान्य होगी—

कोई भी प्रत्याभूति जो लेनदार ने तात्त्विक परिस्थिति के बारे में मौन धारण से अभिप्राप्त की है, अविधिमान्य है।

दृष्टांत

(क) क अपने लिए रुपए का संग्रहण करने के लिए ख को लिपिक के तौर पर रखता है। ख अपनी कुल प्राप्तियों का सम्यक् लेखा देने में असफल रहता है और परिणामस्वरूप क उससे यह अपेक्षा करता है कि वह अपने द्वारा सम्यक् रूप से लेखा दिए जाने के लिए प्रतिभूति दे । ख द्वारा सम्यक् रूप से लेखा दिए जाने की प्रत्याभूति ग दे देता है । ग को ख के पिछले आचरण से क अवगत नहीं करता है। तत्पश्चात् ख लेखा देने में व्यतिक्रम करता है। प्रत्याभूति अविधिमान्य है।

(ख) ग द्वारा ख को 2,000 टन परिणाम तक प्रदाय किए जाने वाले लोहे के लिए संदाय की प्रत्याभूति ग को क देता है । ख और ग ने प्राइवेट तौर पर करार कर लिया है कि ख बाजार-दाम से पांच रुपया प्रति टन अधिक देगा जो अधिक रकम एक पुराने ऋण के समापन में उपयोजित की जाएगी। यह करार कैसे छिपाया गया है। क प्रतिभू के तौर पर दायी नहीं है।

धारा 143 Indian Contract act

[ Indian Contract act Sec. 143  in English ] –

“Guarantee obtained by concealment invalid”–

Any guarantee which the creditor has obtained by means of keeping silence as to material circumstances, is invalid.

Illustrations

(a) A engages B as clerk to collect money for him. B fails to account for some of his receipts, and A in consequence calls upon him to furnish security for his duly accounting. C gives his guarantee for B‟s duly accounting. A does not acquaint C with B‟s previous conduct. B afterwards makes default. The guarantee is invalid.

(b) A guarantees to C payment for iron to be supplied by him to B to the amount of 2,000 tons. B and C have privately agreed that B should pay five rupees per ton beyond the market price, such excess to be applied in liquidation of an old debt. This agreement is concealed from A. A is not liable as a surety.

धारा 143 Indian Contract act

भारतीय संविदा अधिनियम 

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Section 1 of limitation actSection 1 of limitation act
Updated: May 10, 2020 — 11:35 am

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