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Samvida kalp ya Abhasi samvida | संविदा कल्प या आभासी संविदा

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Samvida kalp ya Abhasi samvida

आज के इस आर्टिकल में मै आपको “Samvida kalp ya Abhasi samvida | संविदा कल्प या आभासी संविदा “ क्या होती है , यह बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए  संविदा कल्प या आभासी संविदा  के बारे में विस्तार से जानते हैं ।

Samvida kalp ya Abhasi samvida | संविदा कल्प या आभासी संविदा क्या है ?

कल्प संविदा या आभासी संविदा- जिन संविदाओं को आंग्ल विधि में संविदा कल्प हा जाता है उन्हें भारतीय विधि में संविदा द्वारा सृजित संबंधों के सदृश उत्तरदायित्व उत्पन्न करने वाले संबंधों के नाम से संबोधित किया जाता है। इनका उल्लेख भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 68 से 72 तक में किया गया है।

“जब दो या अधिक व्यक्तियों के बीच किसी संबंध में वास्तविक तथा स्पष्ट रूप से प्रस्ताव एवं स्वीकृति नहीं होती, परंतु उनके आपसी व्यवहार से सामान्य परिस्थितियों के आधार पर उनके आचरण से यह दिखाई देता है कि दोनों पक्षकारों की ओर से प्रस्ताव और स्वीकृति जैसा आचरण किया गया है जिससे उनके बीच संविदा सदृश संबंध स्थापित हुआ है तो इसे कल्प संविदा कहते है।”

कल्प संविदायें तथ्यतः संविदायें नहीं है किंतु विधिक दायित्व उत्पन्न करती है।

  1. धारा 68 के अनुसार वह व्यक्ति जो किसी ऐसे व्यक्ति को जो संविदा करने में असमर्थ हैं या किसी ऐसे व्यक्ति को जिसके पालन-पोषण के लिये वह वैध रूप से आबद्ध हो, जीवन में उसकी स्थिति के योग्य आवश्यक वस्तुयें प्रदाय करता है, उस असमर्थ व्यक्ति की सम्पत्ति से प्रतिपूर्ति पाने का हकदार होता है।
  2. धारा 69 के अनुसार जब कोई व्यक्ति किसी धन का सदांय करने के लिये विधि द्वारा आबद्ध है, वह ऐसे धन का सदांय नहीं करता है, तब वह व्यक्ति जो ऐसे संदाय में हितबद्ध है, संदाय कर देता है, उस व्यक्ति से जो विधि द्वारा आबद्ध है, प्रतिपूर्ति पाने का हकदार है।
  3. Dhara (धारा 70) के अनुसार जहां कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के लिये कोई बात विधिपूर्वक करता है और उसका आशय उसे आनुग्रहिकतः अर्थात नि:शुल्क करने का नहीं रहता है, वह पश्चात कथित व्यक्ति उसका फायदा उठा लेता है, वहाँ वह पूर्वकथित व्यक्ति पश्चात कथित व्यक्ति से प्रतिकर प्राप्त करने का हकदार होता है।
  4. धारा 71 के अनुसार जहाँ किसी व्यक्ति को कोई पड़ा हुआ माल मिलता है, वहां वह उस माल के प्रति उपनिहिति हो जाता है और उस माल के प्रति उसका वही उत्तरादायित्व होता है जो उपनिहिति का होता है।
  5. भूल या प्रपीड़न के अधीन धारा 72 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति धन संदत्त कर देता है या यी चीज का परिदान कर देता है तो वह ऐसे धन या चीज को पुनः प्राप्त करने का हकदार होता है।

संविदा कल्प क्या है

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