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वादपत्र का लौटाया जाना | Return of plaint in CPC

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Return of plaint

आज के इस आर्टिकल में मै आपको “वादपत्र का लौटाया जाना | Return of plaint in CPC ” के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

वादपत्र का लौटाया जाना | Return of plaint

वादपत्र को लौटाये जाने से संबंधित प्रावधान व्य.प्र.सं. के आदेश 7 नियम 10 में दिये गये हैं, जो निम्न हैं –

1 – नियम 10 क के उपबंधों के अधीन रहते हुए, वादपत्र वाद के किसी भी प्रक्रम में उस न्यायालय में उपस्थित किए जाने के लिए लौटा दिया जाएगा जिसमें वाद संस्थित किया जाना चाहिए था।

स्पष्टीकरण :- शंकाओं को दूर करने के लिए इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि अपील या पुनरीक्षण न्यायालय, वाद में पारित डिक्री को अपास्त करने के पश्चात् इस उपनियम के अधीन वादपत्र के लौटाए जाने का निदेश दे सकेगा।

2 – न्यायाधीश वादपत्र के लौटाए जाने पर उस पर उसके उपस्थित किए जाने की और लौटाए जाने की तारीख , उपस्थित करने वाले पक्षकार का नाम और उसके लौटाए जाने के कारणो का कथन पृष्ठांकित करेगा।

आदेश 7  नियम 10क के अनुसार –

जहाँ वादपत्र उसके लौटाए जाने के पश्चात् फाइल किया जाना है वहाँ न्यायालय में उपसंजाति के लिए तारीख नियत करने की न्यायालय की शक्ति –

  1. जहाँ किसी वाद में प्रतिवादी के उपसंजान होने के पश्चात् न्यायालय की यह राय है कि वादपत्र लौटाया जाना चाहिए वहाँ वह ऐसा करने के पूर्व वादी को अपने विनिश्चय की सूचना देगा।
  2. वादी को उपनियम(1) के अधीन सूचना दी मई हो वहाँ वादी न्यायालय से –

क. उस न्यायालय को विनिर्दिष्ट करते हुए जिसमें वह वादपत्र के लौटाए जाने के पश्चात् वादपत्र प्रस्तुत करने की प्रस्थापना करता है,

ख. यह प्रार्थना करते हुए कि न्यायालय उक्त न्यायालय में पक्षकारों की उपसंजाति के लिए तारीख नियत करें, और

ग. यह अनुरोध करते हुए कि इस प्रकार नियत तारीख की सूचना उसे और जाए, आवेदन कर सकेगा।

वादपत्र का लौटाया जाना

  1. जहाँ वादी द्वारा उपनियम(2) के अधीन आवेदन किया जाता है । वहां न्यायालय वादपत्र लौटाए जाने के पूर्व और इस बात के होते हुए भी उसके द्वारा वादपत्र के लौटाए जाने का आदेश इस आधार पर किया जाता था कि उसे वाद का विचारण करने की अधिकारिता नही थी –

क. उस न्यायालय में जिसमें वादपत्र के उपस्थित किए जाने का प्रस्थापना हे ,पक्षकारो की उपसंजाति के लिए तारीख नियत करेगा, और .

ख. उपसंजाति की ऐसी तारीख की सूचना वादी और प्रतिवादी को देगा

 4. जहाँ उपनियम(3) के अधीन उपसंजाति की तारीख की सूचना दी जाती है , वहां –

क. उस न्यायालय के लिए जिसमें वादपत्र उसके लौटाए जाने के पश्चात् उपस्थित किया जाता है, तब तक वह आवश्यक नहीं होगा कि वह वाद में उपसंजाति के लिए समन प्रतिवादी पर तामील करे। जब तक की वह न्यायालय अभिलिखित किए जाने वाले कारणों से अन्यथा निदेश न दे और

ख. उक्त सूचना उस न्यायालय में जिसमें वादपत्र के लौटाने वाले न्यायालय द्वारा इस प्रकार नियत तारीख को वादपत्र उपस्थित किया जाता है प्रतिवादी की उपसंजाति के लिए समन समझी जाएगी।

5. जहाँ न्यायालय वादी द्वारा उपनियम(2) के अधीन किए गए आवेदन को मंजूर कर लेता है वहाँ वादी लौटाए जाने के आदेश के विरुद्ध अपील करने का हकदार नहीं होगा।

Return of plaint

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