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वादपत्र का नामंजूर किया जाना | Order 7 Rule 11 Cpc

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Order 7 Rule 11 Cpc

आज के इस आर्टिकल में मै आपको “वादपत्र का नामंजूर किया जाना | Order 7 Rule 11 Cpc | Rejection of plaint ” के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

वादपत्र का नामंजूर किया जाना |  Rejection of plaint 

सिविल प्रक्रिया संहिता , 1908 के आदेश 7 नियम 11 उपनियम क-च तक 6 ऐसी दशाओं का उपबंध किया गया जिनके अंर्तगत वादपत्र नामंजूर कर दिया जाएगा वे निम्नलिखित हैं –

(i) जहाँ वह वाद-हेतुक प्रकट नहीं किया गया है।

(ii) जहाँ जिस दावे पर अनुतोष का मूल्यांकन कम किया है और वादी को मूल्यांकन ठीक किए जाने हेतु न्यायालय द्वारा समय दिए जाने पर भी ऐसा ठीक करने में असफल रहता है।

(iii) जहाँ दावा किए गए वाद में मूल्यांकन ठीक है परंतु वादपत्र अपर्याप्त स्टाम्प-पत्र पर लिखा गया है और वादी द्वारा अपेक्षित स्टाम्प पत्र देने के लिये न्यायालय द्वारा चाहे गए उस समय के भीतर जो न्यायालय ने नियत किया है ऐसा करने में असफल रहता है,

(iv) जहाँ वाद पत्र में वर्णित कथन से यह दृष्टगत होता है कि वाद किसी विधि द्वारा बाधित है,

(v) जहाँ वाद-पत्र दो प्रतियों में दायर (फाइल) नहीं किया है,

(vi) जहाँ वादी इसी आदेश के नियम 9 के उपबंध अर्थात समन की तामील की तारीख से सात दिनों के भीतर वाद पत्र, की उतनी प्रतियाँ जितने प्रतिवादी पर समनों की तामील के लिए अपेक्षित है फीस के साथ प्रस्तुत करने में असफल रहता है।

Order 7 Rule 11 Cpc in hindi


प्रश्न -क्या वाद नामंजूर करने वाला आदेश आज्ञप्ति की श्रेणी में आएगा? (MPCJ-06 )

उ. – वादपत्र को नामंजूर करने वाला आदेश डिक्री की श्रेणी में आता है, क्योंकि व्यवहार प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 2 की उपधारा (2) में डिक्री की परिभाषा में उपर्युक्त वादपत्र को नामंजूर करने वाला आदेश डिक्री होने के कारण अपील योग्य है।

प्रश्न – वादपत्र नामंजूर होने की दशा में क्या वादी नया वादपत्र प्रस्तुत करने से प्रतिवारित रहेगा? (MPCJ-06 )

उ. वादपत्र को नामंजूर करने वाला आदेश को न्यायालय गंभीर त्रुटि नहीं मानती तथा आदेश 07 नियम 13 में प्रावधनिक उपबंध के अनुसार वादपत्र के नामंजूर होने की दशा में उसी वाद-हेतूक पर दूसरा वाद लाया जा सकता है। वाद पत्र नामंजूर होने पर वाद लाया जा सकेगा या अपील की जा सकेगी। इसी संहिता की धारा 12 अतिरिक्त वाद का वर्जन इस आदेश पर प्रभावी नहीं होंगा।


Rejection of plaint | Order 7 Rule 11 Cpc

The plaint shall be rejected in the following cases :

(a) where it does not disclose a cause of action;

(b) where the relief claimed is undervalued, and the plaintiff, on being required by the Court to correct the valuation within a time to be fixed by the Court, fails to do so;

(c) where the relief claimed is properly valued but the plaint is written upon paper insufficiently stamped, and the plaintiff, on being required by the Court to supply the requisite stamp-paper within a time to be fixed by the Court, fails to do so;

(d) where the suit appears from the statement in the plaint to be barred by any law;

(e) where it is not filed in duplicate;

(f) where the plaintiff fails to comply with the provisions of rule 9 :

“[Provided that the time fixed by the Court for the correction of the valuation or supplying of the requisite stamp-paper shall not be extended unless the Court, for reasons to be recorded, is satisfied that the plaintiff was prevented by any cause of an exceptional nature for correcting the valuation or supplying the requisite stamp-paper, as the case may be, within the time fixed by the Court and that refusal to extend such time would cause grave injustice to the plaintiff.]”

Rejection of plaint

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