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हत्या और आपराधिक मानव वध में अंतर | Hatya kya hai

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सदोष मानव वध एवं हत्या

Hatya kya hai

इस आर्टिकल में मै आपको भारतीय दंड संहिता की बहुत ही महत्वपूर्ण धारा 299 (आपराधिक मानव वध) और धारा 300 ( हत्या ) के बारे में बताने का प्रयास कर रहा हूँ . आशा करता हूँ की मेरा यह प्रयास आपको पसंद आएगा .तो चलिए जान लेते हैं की –

हत्या और आपराधिक मानव वध क्या है ?

सर्वप्रथम आपको बता दें की भारतीय दंड संहिता की धारा 299 आपराधिक मानव वध को और धारा 300 हत्या को परिभाषित करती है .

धारा 299 (आपराधिक मानव वध) – जो कोई मृत्यु कारित करने के आशय से या ऐसी शारीरिकी क्षति कारित करने के आशय से जिससे मृत्यु कारित हो जाना संभाव्य हो ,  यह ज्ञान रखते हुए की यह संभाव्य है की वह उस कार्य से मृत्यु कारित कर दे , कोई कार्य करके मृत्यु कारित कर देता है , वह आपराधिक मानव वध का अपराध करता है .

इस प्रकार आपराधिक मानव वध के निम्नलिखित तत्व है –

१ – किसी मानव की मृत्यु कारित करना

२ – ऐसी मृत्यु किसी कार्य द्वारा कारित की गयी हो

३ – कार्य –

(क) मृत्यु कारित करने के आशय से ,या

(ख) ऐसी शारीरिक क्षति कारित करने के आशय से जिससे मृत्यु कारित होना संभाव्य हो , या

(ग) इस ज्ञान से की उस कार्य द्वारा मृत्यु कारित होना संभाव्य है ,किया गया हो .

आपराधिक मानव वध के लिए दंड – धारा -304 के अनुसार –

जो कोई ऐसा आपराधिक मानव वध करेगा जो हत्या की कोटि में नहीं आता है, यदि वह कार्य जिससे मृत्यु कारित की गयी है मृत्यु या ऐसी शारीरिक क्षति ,जिससे मृत्यु होना संभाव्य है ,कारित करने के आशय से किया जाये , तो वह आजीवन कारावास से या दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से जिसकी अवधि दस वर्ष तक हो सकेगी दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डित किया जायेगा .

अथवा 

यदि वह कार्य इस ज्ञान के साथ की उससे मृत्यु कारित करना संभाव्य है , किन्तु मृत्यु या ऐसी शारीरिक क्षति जिससे मृत्यु कारित करना संभाव्य है ,कारित करने के किसी आशय के बिना किया जाये तो वह दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से ,जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी ,या जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जायेगा .

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धारा 300 (हत्या) – धारा 300 उन मामलो से सम्बंधित है जिनमे आपराधिक मानव वध हत्या होता है .अतः कोई भी अपराध तब तक हत्या की कोटि में नहीं आ सकता , जब तक वह आपराधिक मानव वध की कोटि में नहीं आता .हत्या आपराधिक मानव वध तो होती ही है , किन्तु आपराधिक मानव वध हत्या हो भी सकती है और नहीं भी .

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आपराधिक मानव वध कब हत्या है ?

आपराधिक मानव वध हत्या तभी होगा यदि वह धारा 300 के चार खंडो में से किसी भी एक खंड के अंतर्गत आता है .

( खंड- १ )-  वह कार्य जिसके द्वारा मृत्यु कारित की गयी है ,मृत्यु कारित करने के आशय से किया जाता है , अथवा

( खंड- 2 )- ऐसी शारीरिक क्षति कारित करने के आशय से , जिससे अपराधी जानता हो की मृत्यु कारित करना संभाव्य हो , अथवा

( aखंड- 3 )- कार्य शारीरिक क्षति कारित करने के आशय से किया गया हो , जो प्रकृति के सामान्य अनुक्रम में मृत्यु कारित करने के लिए पर्याप्त हो , अथवा

( खंड- 4 )- यदि कार्य करने वाला जनता हो की वह इतना आसन्न संकट है की वह मृत्यु कारित कर ही देगा या ऐसी शारीरिक क्षति कारित कर देगा जिससे मृत्यु कारित होना संभाव्य है .

आपराधिक मानव वध हत्या तभी होगा , जब वह धारा 300 में वर्णित चार खंडो में आता हो . यदि वह इन चार खंडो में से किसी में नहीं आता है तो वह हत्या नहीं होगा .

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आपराधिक मानव वध कब हत्या नहीं है ?

aआपराधिक मानव वध हत्या नहीं है यदि वह धारा 300 में वर्णित पांच अपवादों में से किसी भी अपवाद के अंतर्गत आता है .

( अपवाद १)- आपराधिक मानव वध हत्या नहीं है यदि अपराधी उस समय जबकि वह गंभीर और अचानक प्रकोपन से आत्मसंयम की शक्ति से वंचित हो , उस व्यक्ति की जिसने की वह प्रकोपन दिया है मृत्यु कारित करे या किसी अन्य व्यक्ति की मृत्यु भूल या दुर्घटना वश कारित करे .

परन्तु –

(क) प्रकोपन किसी व्यक्ति का वध करने या अपहानि करने के लिए अपराधी द्वारा प्रति हेतु के रूप में इप्सित न हो या स्वेच्छया प्रकोपित न हो .

(ख) प्रकोपन ऐसी किसी बात द्वारा न दिया गया हो जो विधि के पालन में या लोक सेवक द्वारा ऐसे लोकसेवक की शक्तियों के विधिपूर्ण प्रयोग में की गयी हो

(ग) प्रकोपन किसी ऐसी बात द्वारा न दिया गया हो , जो प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार के विधिपूर्ण प्रयोग में की गयी हो .

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( अपवाद २)- यदि अपराधी शरीर या सम्पति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार को सद्भावनापूर्वक प्रयोग में लाते हुए विधि द्वारा दी गयी शक्ति का अतिक्रमण कर दे और पूर्व चिंतन बिना और ऐसी प्रतिरक्षा के प्रयोजन से जितनी अपहानि करना आवश्यक हो उससे अधिक अपहानि करने के आशय के बिना उस व्यक्ति की मृत्यु कारित कर दे जिसके विरुद्ध वह प्रतिरक्षा का ऐसा अधिकार प्रयोग में ला रहा हो .

( aअपवाद 3)- यदि अपराधी ऐसा लोकसेवक होते हुए या ऐसे लोकसेवक को मदद देते हुए जो लोकन्याय की अग्रसरता में कार्य कर रहा है . उसे विधि द्वारा दी गयी शक्ति से आगे बढ़ जाये और कोई ऐसा कार्य करके जिसे वह विधिपूर्ण और ऐसे लोकसेवक के नाते उसके कर्तव्य से सम्यक निर्वहन के लिए आवश्यक होने का सदभावनापूर्वक विश्वास करता है और उस व्यक्ति के प्रति जिसकी की मृत्यु कारित की गयी है वैमनस्य के बिना करता है .

( अपवाद 4)- यदि वह मानव वध अचानक झगडा जनित आवेश की तीव्रता में हुई अचानक लडाई से पूर्वचिन्तन बिना और अपराधी द्वारा अनुचित लाभ उठाये बिना या क्रूरता पूर्ण या अप्रायिक रीती से कार्य किये बिना किया गया हो .

( अपवाद 5)- वह व्यक्ति जिसकी मृत्यु कारित की जाये अठारह वर्ष से अधिक आयु का होते हुए अपनी सम्मति से मृत्यु होना सहन करे या मृत्यु का जोखिम उठाये .

तो यह है आपराधिक मानव वध और हत्या के बीच अन्तर जो प्रतियोगिया परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है . 

हत्या के लिए दंड – धारा 302 के अनुसार –

जो कोई हत्या करेगा वह मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डित होगा .

 

भारतीय दंड संहिता की धारा 299 (आपराधिक मानव वध) और धारा 300 (हत्या) की परिभाषा और दृष्टांत ओरिजनल बुक के अनुसार नीचे पीडीएफ फाइल में देखिये .

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