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उपहति क्या है | Ghor uphati kya hai | Dhara 323 ipc

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Ghor uphati kya hai | Dhara 323 ipc

उपहति क्या है | Ghor uphati kya hai | Dhara 323 ipc

Ghor uphati kya hai | Dhara 323 ipc

इस आर्टिकल में मै आपको भारतीय दंड संहिता की बहुत ही महत्वपूर्ण धारा 319 उपहति व् धारा 320 घोर उपहति के बारे में बताने का प्रयास कर रहा हूँ . आशा करता हूँ की मेरा यह प्रयास आपको पसंद आएगा . तो चलिए जान लेते हैं की –

उपहति क्या है ?

धारा – 319 – उपहति – जो कोई किसी व्यक्ति को शारीरिक पीड़ा , रोग या अंग-शेथिल्य कारित करता है , वह उपहति करता है , यह कहा जाता है .

Ghor uphati kya hai | Dhara 323 ipc

घोर उपहति क्या है ?

धारा – 320 – घोर उपहति –  उपहति की केवल निचे लिखी किस्मे ही ” घोर ” कहलाती हैं –

१ – पुंसत्वहरण

२ – दोनों में से किसी नेत्र की दृष्टी का स्थायी विच्छेद

३ – दोनों में से किसी भी कान की श्रवण शक्ति का स्थायी विच्छेद

४ –  किसी भी अंग या जोड़ का स्थायी विच्छेद

५ – किसी भी अंग या जोड़ की शक्ति का नाश या स्थायी विच्छेद

६ – सर या चेहरे का स्थायी विद्रुपिकरण

७ – अस्थि या दांत का भंग या विसंधान

८ – कोई उपहति जो जीवन को संकटापन्न करती है या जिसके कारण उपहत व्यक्ति बीस दिन तक तीव्र शारीरिक पीड़ा में रहता है , या अपने मामूली कामकाज को करने में असमर्थ रहता है .

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स्वेच्छया उपहति कारित करना क्या है ?

धारा – 321 – स्वेच्छया उपहति कारित करना – जो कोई किसी कार्य को इस आशय से करता है की तदद्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित करे , या इस ज्ञान के साथ करता है की यह संभाव्य है की वह तदद्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित करे और तदद्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित करता है वह स्वेच्छया उपहति कारित करता है यह कहा जाता है .

स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना क्या है ?

धारा – 322  – स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना – जो कोई स्वेच्छया उपहति कारित करता है , यदि वह उपहति , जिसे कारित करने का उसका आशय है या जिसे वह जानता है की उसके द्वारा उसका किया जाना संभाव्य है ,घोर उपहति है . और यदि वह उपहति , जो वह कारित करता है , घोर उपहति हो , तो वह स्वेच्छया घोर उपहति करता है यह कहा जाता है .

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स्वेच्छया उपहति कारित करने के लिए दंड

धारा – 323 – स्वेच्छया उपहति कारित करने के लिए दंड – उस दशा के सिवाय , जिसके लिए धारा 334 में उपबंध है , जो कोई स्वेच्छया उपहति कारित करेगा , वह दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी , या जुर्माने से , जो एक हजार रूपये तक का हो सकेगा , या दोनों से दण्डित किया जायेगा .

धारा – 324 खतरनाक आयुधो या साधनों द्वारा स्वेच्छया उपहति कारित करना– उस दशा के सिवाय , जिसके लिए धारा 334 में उपबंध है , जो कोई असन , वेधन , या काटने के किसी उपकरण द्वारा जो यदि आक्रामक आयुध के तौर पर प्रयोग में लाया जाये , तो उससे मृत्यु कारित होना संभाव्य है या अग्नि या किसी तप्त पदार्थ द्वारा, या किसी विष या संक्षारक पदार्थ द्वारा या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा या किसी ऐसे पदार्थ द्वारा , जिसका श्वास में जाना या निगलना या रक्त में पहुंचना मानव शरीर के लिए हानिकारक है , या किसी जिव जंतु द्वारा स्वेच्छया उपहति कारित करेगा वह दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से , जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी , या जुर्माने से , या दोनो से दण्डित किया जायेगा .

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स्वेच्छया घोर उपहति कारित करने के लिए दंड

धारा – 325 – स्वेच्छया घोर उपहति कारित करने के लिए दंड – उस दशा के सिवाय , जिसके लिए धारा 335 में उपबंध है , जो कोई स्वेच्छया घोर उपहति कारित करेगा वह दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से , या दोनों से दण्डित किया जायेगा .

धारा -326 – खतरनाक आयुधो या साधनों द्वारा स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना – उस दशा के सिवाय , जिसके लिए धारा 335 में उपबंध है , जो कोई असन , वेधन , या काटने के किसी उपकरण द्वारा जो यदि आक्रामक आयुध के तौर पर प्रयोग में लाया जाये , तो उससे मृत्यु कारित होना संभाव्य है या अग्नि या किसी तप्त पदार्थ द्वारा, या किसी विष या संक्षारक पदार्थ द्वारा या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा या किसी ऐसे पदार्थ द्वारा , जिसका श्वास में जाना या निगलना या रक्त में पहुंचना मानव शरीर के लिए हानिकारक है , या किसी जिव जंतु द्वारा स्वेच्छया घोर उपहति कारित करेगा , वह आजीवन कारावास से , या दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से , जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी , या जुर्माने से , या दोनो से दण्डित किया जायेगा .

भारतीय दंड संहिता की धारा 319 (उपहति) और धारा -320 ( घोर उपहति ) की परिभाषा एवं दंड ओरिजनल बुक के अनुसार नीचे पीडीएफ फाइल में देखिये .

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