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धारा 63 सम्पत्ति अन्तरण | Section 63 of Transfer of property Act Hindi

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आज के इस आर्टिकल में मै आपको “बंधक-संपत्ति में अनुवृद्धि | सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम की धारा 63 क्या है | Section 63 Transfer of property Act in hindi | Section 63 of Transfer of property Act | धारा 63 सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम | Accession to mortgaged propertyके विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम की धारा 63 |  Section 63 of Transfer of property Act | Section 63 Transfer of property Act in Hindi

[ Transfer of property Act Section 63 in Hindi ] –

बंधक-संपत्ति में अनुवृद्धि–

जहां कि बंधकदार के कब्जे में की बंधक-सम्पत्ति में अनुवृद्धि बंधक चालू रहने के दौरान होती है, वहां तत्प्रतिकूल संविदा न हो तो मोचन किए जाने पर बंधकदार के विरुद्ध बंधककर्ता ऐसी अनुवृद्धि का हकदार होगा।

अंतरित स्वामित्व के आधार पर अर्जित अनुवृद्धि–जहाँ कि ऐसी अनुवृद्धि बंधकदार के व्यय से अर्जित की गई है. और मल सम्पत्ति का अपाय हुए बिना पृथक् कब्जे या उपभोग के योग्य है, वहां उस अनुवृद्धि को लेने की बांछा करने वाला बंधककर्ता उसे अर्जित करने का व्यय बंधकदार को देगा। यदि ऐसा पृथक् कब्जा या उपभोग संभव न हो तो वह् अनुवृद्धि, सम्पत्ति के साथ परिदत्त करनी होगी और बंधककर्ता दायी होगा कि ऐसी दशा में, जब उस सम्पत्ति को नाश, समपहरण या विक्रय से परिरक्षित रखने के लिए अर्जन आवश्यक हो, या ऐसी दशा में, जब अर्जन बंधककर्ता की अनुमति से किया गया हो, उस अर्जन में लगे उचित खों को उन पर उसी दर से, जो मूलधन पर देय है, या जहां कि ऐसी कोई दर नियत नहीं की गई है, वहां नौ प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज सहित] मूलधन में जोड़कर दे।

अंतिम वर्णित दशा में अनुवृद्धि में उत्पन्न होने वाले लाभ, यदि कोई हों, बंधकर्ता के नाम जमा किए जाएंगे।

जहां कि बन्धक भोग-बन्धक है और अनुवृद्धि बन्धकदार के व्यय से अर्जित की गई है, वहां अनुवृद्धि से उद्भुत लाभ, यदि कोई हो, प्रतिकूल संविदा न हो तो ऐसे व्यय किए गए धन पर देय ब्याज मद्धे, यदि कोई हो, मुजरा कर दिए जाएंगे।

धारा 63 Transfer of property Act

[ Transfer of property Act Sec. 63 in English ] –

Accession to mortgaged property ”–

Where mortgaged property in possession of the mortgagee has, during the continuance of the mortgage, received any accession, the mort- gagor, upon redemption, shall, in the absence of a contract to the contrary, be entitled as against the mortgagee to such accession. 

Accession acquired in virtue of transferred ownership.—Where such accession has been acquired at the expense of the mortgagee, and is capable of separate possession or enjoyment without detriment to the principal property, the mortgagor desiring to take the accession must pay to the mortgagee the expense of acquiring it. If such separate possession or enjoyment is not possible, the accession must be delivered with the property; the mortgagor being liable, in the case of an acquisition necessary to preserve the property from destruction, forfeiture or sale, or made with his assent, to pay the proper cost thereof, as an addition to the principal money, 1[with interest at the same rate as is payable on the principal, or, where no such rate is fixed, at the rate of nine per cent. per annum]. 

In the case last mentioned the profits, if any, arising from the accession shall be credited to the mortgagor. 

Where the mortgage is usufructuary and the accession has been acquired at the expense of the mortgagee, the profits, if any, arising from the accession shall, in the absence of a contract to the contrary, be set off against interest, if any, payable on the money so expended.

धारा 63 Transfer of property Act 

सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम  

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