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धारा 439 CrPC | Section 439 CrPC in Hindi | CrPC Section 439

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आज के इस आर्टिकल में मै आपको “जमानत के बारे में उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय की विशेष शक्तियां | दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 439 क्या है | section 439 CrPC in Hindi | Section 439 in The Code Of Criminal Procedure | CrPC Section 439 | Special powers of High Court or Court of Session regarding bailके विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 439 |  Section 439 in The Code Of Criminal Procedure

[ CrPC Sec. 439 in Hindi ] –

जमानत के बारे में उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय की विशेष शक्तियां-

 (1) उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय यह निदेश दे सकता है कि

(क) किसी ऐसे व्यक्ति को, जिस पर किसी अपराध का अभियोग है और जो अभिरक्षा में है, जमानत पर छोड़ दिया जाए और यदि अपराध धारा 437 की उपधारा (3) में विनिर्दिष्ट प्रकार का है, तो वह ऐसी कोई शर्त, जिसे वह उस उपधारा में वर्णित प्रयोजनों के लिए आवश्यक समझे, अधिरोपित कर सकता है;

(ख) किसी व्यक्ति को जमानत पर छोड़ने के समय मजिस्ट्रेट द्वारा अधिरोपित कोई शर्त अपास्त या उपांतरित कर दी जाए: परन्तु उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय किसी ऐसे व्यक्ति की, जो ऐसे अपराध का अभियुक्त है जो अनन्यतः सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है, या जो यद्यपि इस प्रकार विचारणीय नहीं है, आजीवन कारावास से दंडनीय है, जमानत लेने के पूर्व जमानत के लिए आवेदन की सूचना लोक अभियोजक को उस दशा के सिवाय देगा जब उसकी, ऐसे कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएंगे यह राय है कि ऐसी सूचना देना साध्य नहीं है।

(2) उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय, किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसे इस अध्याय के अधीन जमानत पर छोड़ा जा चुका है, गिरफ्तार करने का निदेश दे सकता है और उसे अभिरक्षा के लिए सुपुर्द कर सकता है।

धारा 439 CrPC

[ CrPC Sec. 439 in English ] –

“Special powers of High Court or Court of Session regarding bail”–

(1) A High Court or Court of Session may direct-

(a) that any person accused of an offence and in custody be released on bail, and if the offence is of the nature specified in subsection (3) of section 437, may impose any condition which it considers necessary for the purposes mentioned in that sub- section;
(b) that any condition imposed by a Magistrate when releasing an person on bail be set aside or modified: Provided that the High Court or the Court of Session shall, before granting bail to a person who is accused of an offence which is triable exclusively by the Court of Session or which, though not so triable, is punishable with imprisonment for life, give notice of the application for bail to the Public Prosecutor unless it is, for reasons to be recorded in writing, of opinion that it is not practicable to give such notice.
(2) A High Court or Court of Session may direct that any person who has been released on bail under this Chapter be arrested and commit him to custody.

धारा 439 CrPC

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