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कंपनी अधिनियम धारा 43 | Section 43 of Companies Act in Hindi

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Section 43 of Companies Act in Hindi

आजके इस आर्टिकल में मैआपकोशेयर पूंजी के प्रकार | कंपनी अधिनियम धारा 43  | Section 43 of Companies Act in Hindi | कंपनी अधिनियम की धारा 43 | के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

Section 43 of Companies Act in Hindi

[ Companies Act Sec. 43 in Hindi ] –

शेयर पूंजी के प्रकार

शेयरों द्वारा परिसीमित किसी कंपनी की शेयर पूंजी दो प्रकार की होगी, अर्थात् :

(क) साधारण शेयर पूंजी,

(i) मतदान अधिकारों सहित; या

(ii) ऐसे नियमों के अनुसार जो विहित किए जाएं, लाभांश, मतदान के बारे में या अन्यथा विशेष अधिकारों सहित: और

परंतु इस अधिनियम की कोई बात ऐसे अधिमानी शेयर धारकों के अधिकारों पर प्रभाव नहीं डालेगी, जो इस अधिनियम के प्रारंभ से पूर्व परिसमापन की कार्यवाहियों में भाग लेने के लिए हकदार हैं।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, –

(i) शेयरों द्वारा परिसीमित किसी कंपनी के प्रति निर्देश से, “साधारण शेयर पूंजी” से ऐसी सभी शेयर पूंजी अभिप्रेत है, जो अधिमानी शेयर पूंजी नहीं है;

(ii) शेयरों द्वारा परिसीमित किसी कंपनी के प्रति निर्देश से “अधिमानी शेयर पूंजी” से कंपनी की निर्गमित शेयर पूंजी का वह भाग अभिप्रेत है जो निम्नलिखित के संबंध में कोई अधिमानी अधिकार रखता है या रखेगा

(क) लाभांश का संदाय, चाहे नियत रकम के रूप में या किसी नियत दर पर परिकलित रकम के रूप में, जो या तो आय-कर से मुक्त या उसके अधीन हो; और

(ख) परिसमापन या पूंजी के प्रतिसंदाय की दशा में समादत्त या समादत्त समझी गई शेयर पूंजी की रकम का प्रतिसंदाय, चाहे कंपनी के ज्ञापन या अनुच्छेदों में किसी नियत प्रीमियम या किसी नियत मान पर प्रीमियम के संदाय का अधिमानी अधिकार हो या नहीं;

(iii) पूंजी को इस बात के होते हुए भी अधिमानी पूंजी समझा जाएगा कि वह निम्नलिखित किसी एक या दोनों अधिकारों के लिए. हकदार है, अर्थात् :

(क) खंड के उपखंड (क) में विनिर्दिष्ट रकमों के अधिमानी अधिकारों के अतिरिक्त लाभांश के संबंध में उसे पूर्वोक्त अधिमानी अधिकार के लिए गैर-हकदार पूंजी में भाग लेने का, चाहे पूर्णतः या सीमित सीमा तक,

अधिकार है; – (ख) खंड (ii) के उपखंड (ख) में विनिर्दिष्ट रकमों के परिसमापन पर ‘ प्रतिसंदाय के अधिमानी अधिकारों के अतिरिक्त, पूंजी के संबंध में उसे ऐसे किसी अधिशेष में, जो संपूर्ण पूंजी का प्रतिसंदाय करने के पश्चात् शेष बचे, उस अधिमानी अधिकार के लिए गैर-हकदार पूंजी में भाग लेने का, चाहे पूर्णतः या सीमित सीमा तक, अधिकार है।

कंपनी अधिनियम धारा 43

[ Companies Act Section 43  in English ] –

 Kinds of share capital”–

The share capital of a company limited by shares shall be of two kinds,  namely:— 

(a) equity share capital— 

(i) with voting rights; or 

(ii) with differential rights as to dividend, voting or otherwise in accordance with such rules  as may be prescribed; and 

(b) preference share capital: 

Provided that nothing contained in this Act shall affect the rights of the preference shareholders who  are entitled to participate in the proceeds of winding up before the commencement of this Act. 

Explanation.—For the purposes of this section,— 

(i) ‗‗equity share capital‘‘, with reference to any company limited by shares, means all share  capital which is not preference share capital; 

(ii) ‗‗preference share capital‘‘, with reference to any company limited by shares, means that part  of the issued share capital of the company which carries or would carry a preferential right with  respect to— 

(a) payment of dividend, either as a fixed amount or an amount calculated at a fixed rate,  which may either be free of or subject to income-tax; and 

(b) repayment, in the case of a winding up or repayment of capital, of the amount of the share  capital paid-up or deemed to have been paid-up, whether or not, there is a preferential right to the  payment of any fixed premium or premium on any fixed scale, specified in the memorandum or  articles of the company; 

(iii) capital shall be deemed to be preference capital, notwithstanding that it is entitled to either or  both of the following rights, namely:—

(a) that in respect of dividends, in addition to the preferential rights to the amounts specified  in sub-clause (a) of clause (ii), it has a right to participate, whether fully or to a limited extent,  with capital not entitled to the preferential right aforesaid; 

(b) that in respect of capital, in addition to the preferential right to the repayment, on a  winding up, of the amounts specified in sub-clause (b) of clause (ii), it has a right to participate,  whether fully or to a limited extent, with capital not entitled to that preferential right in any  surplus which may remain after the entire capital has been repaid. 

कंपनी अधिनियम धारा 43


कंपनी अधिनियम 2013  

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