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धारा 37 विनिर्दिष्ट अनुतोष | Section 37 of Specific relief act in Hindi

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आज के इस आर्टिकल में मै आपको “अस्थायी और शाश्वत व्यादेश | विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम की धारा 37 क्या है | Section 37 Specific relief act in Hindi | Section 37 of Specific relief act | धारा 37 विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम | Temporary and perpetual injunctionsके विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम की धारा 37 |  Section 37 of Specific relief act

[ Specific relief act Sec. 37 in Hindi ] –

अस्थायी और शाश्वत व्यादेश-

(1) अस्थायी व्यादेश ऐसे होते हैं जिन्हें विनिर्दिष्ट समय तक या न्यायालय के अतिरिक्त आदेश तक बने रहना है तथा वे वाद के किसी भी प्रक्रम में अनुदत्त किए जा सकेंगे और सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) द्वारा विनियमित होते हैं।

(2) शाश्वत व्यादेश वाद की सुनवाई पर और उसके गुणागुण के आधार पर की गई डिक्री द्वारा ही अनुदत किया जा सकता है। तद्वारा प्रतिवादी किसी अधिकार का ऐसा प्राख्यान या कोई ऐसा कार्य जो वादी के अधिकारों के प्रतिकूल हो, न करने के लिए शाश्वत काल के लिए व्यादिष्ट कर दिया जाता है।

धारा 37 Specific relief act

[ Specific relief act Sec. 37 in English ] –

“ Temporary and perpetual injunctions”–

(1) Temporary injunctions are such as are to continue until a specific time, or until the further order of the court, and they maybe granted at any stage of a suit, and are regulated by the Code of Civil Procedure, 1908 (5 of 1908).

(2) A perpetual injunction can only be granted by the decree made at the hearing and upon the merits of the suit; the defendant is thereby perpetually enjoined from the assertion of a right, or from the commission of an act, which would be contrary to the rights of the plaintiff.

धारा 37 Specific relief act

Specific relief Act Pdf download in hindi

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