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धारा 27 विनिर्दिष्ट अनुतोष | Section 27 of Specific relief act in Hindi

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आज के इस आर्टिकल में मै आपको “विखंडन कब न्यायनिर्णीत या नामंजूर किया जा सकेगा | विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम की धारा 27 क्या है | Section 27 Specific relief act in Hindi | Section 27 of Specific relief act | धारा 27 विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम | When rescission may be adjudged or refusedके विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम की धारा 27 |  Section 27 of Specific relief act

[ Specific relief act Sec. 27 in Hindi ] –

विखंडन कब न्यायनिर्णीत या नामंजूर किया जा सकेगा-

(1) किसी संविदा में हितबद्ध कोई भी व्यक्ति उसे विखंडित कराने के लिए वाद ला सकेगा और ऐसा विखंडन निम्नलिखित दशाओं में से किसी में भी न्यायालय द्वारा न्यायनिर्णीत किया जा सकेगा, अर्थात् :

(क) जहाँ कि संविदा बादी द्वारा शून्यकरणीय या पर्यवसेय हो;

(ख) जहाँ कि संविदा ऐसे हेतुकों से विधिविरुद्ध हो जो उसके देखने ही से प्रकट नहीं है और प्रतिवादी का दोष वादी से अधिक है।

(2) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, न्यायालय संविदा का विखंडन नामंजूर कर सकेगा

(क) जहाँ कि वादी ने अभिव्यक्तत: या विवक्षित संविदा को अनुसमर्पित कर दिया है; अथवा

(ख) जहाँ कि परिस्थितियों में ऐसी तब्दीली के कारण, जो संविदा के किए जाने के पश्चात् (स्वयं प्रतिवादी के किसी कार्य के कारण नहीं) हो गई हो, पक्षकारों को उसी स्थिति में सारतः प्रत्यावर्तित न किया जा सके जिसमें वे सब थे जब संविदा की गई थी; अथवा

(ग) जहाँ कि संविदा के अस्तित्व के दौरान पर व्यक्तियों ने सद्भावपूर्वक सूचना के बिना और मूल्यार्थ अधिकार अर्जित कर लिए हों, अथवा

(घ) जहाँ कि संविदा के केवल एक भाग का ही विखंडन ईप्सित हो और ऐसा भाग संविदा के शेष भाग से पृथक् न किया जा सकता हो।

स्पष्टीकरण-इस धारा में संविदा से उन राज्यक्षेत्रों के सम्बन्ध में, जिन पर सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम, 1882 (1882 का 4) का विस्तार नहीं है, लिखित “संविदा” अभिप्रेत है।

धारा 27 Specific relief act

[ Specific relief act Sec. 27 in English ] –

“ When rescission may be adjudged or refused ”–

(1) Any person interested in a contract may sue to have it rescinded, and such rescission may be adjudged by the court in any of the following cases, namely:—

(a) where the contract is voidable or terminable by the plaintiff;

(b) where the contract is unlawful for causes not apparent on its face and the defendant is more to blame than the plaintiff.

(2) Notwithstanding anything contained in sub-section (1), the court may refuse to rescind the contract—

(a) where the plaintiff has expressly or impliedly ratified the contract; or

(b) where, owing to the change of circumstances which has taken place since the making of the contract (not being due to any act of the defendant himself), the parties cannot be substantially restored to the position in which they stood when the contract was made; or

(c) where third parties have, during the subsistence of the contract, acquired rights in good faith without notice and for value; or

(d) where only a part of the contract is sought to be rescinded and such part is not severable from the rest of the

Explanation.—In this section “contract” in relation to the territories to which the Transfer of Property Act, 1882 (4 of 1882), does not extend, means a contract in writing.

धारा 27 Specific relief act

Specific relief Act Pdf download in hindi

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