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धारा 126 संविदा अधिनियम | Section 126 Indian Contract act in Hindi

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आज के इस आर्टिकल में मै आपको ““प्रत्याभूति की संविदा’, “प्रतिभू, “मूलऋणी और “लेनदार’ | भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 126 क्या है | Section 126 Indian Contract act in Hindi | Section 126 of Indian Contract act | धारा 126 भारतीय संविदा अधिनियम | “Contract of guarantee”, “surety”, “principal debtor” and “creditor”के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 126 |  Section 126 of Indian Contract act

[ Indian Contract act Sec. 126 in Hindi ] –

“प्रत्याभूति की संविदा’, “प्रतिभू, “मूलऋणी और “लेनदार’-

“प्रत्याभूति की संविदा किसी पर-व्यक्ति द्वारा व्यतिक्रम की दशा में उसके वचन का पालन या उसके दायित्व का निर्वहन करने की संविदा है । वह व्यक्ति जो प्रत्याभूति देता है “प्रतिभू” कहलाता है, वह व्यक्ति, जिसके व्यतिक्रम के बारे में प्रत्याभूति दी जाती है “मूलऋणी कहलाता है, और वह व्यक्ति जिसको प्रत्याभूति दी जाती है “लेनदार” कहलाता है। प्रत्याभूति या तो मौखिक या लिखित हो सकेगी।

धारा 126 Indian Contract act

[ Indian Contract act Sec. 126  in English ] –

““Contract of guarantee”, “surety”, “principal debtor” and “creditor””–

A “contract of guarantee” is a contract to perform the promise, or discharge the liability, of a third person in case of his default. The person who gives the guarantee is called the “surety”; the person in respect of whose default the guarantee is given is called the “principal debtor”, and the person to whom the guarantee is given is called the “creditor”. A guarantee may be either oral or written.

धारा 126 Indian Contract act

भारतीय संविदा अधिनियम 

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Section 1 of limitation act Section 1 of limitation act

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