भारतीय दंड संहिता वस्तुनिष्ठ प्रश्न भाग 5 | Ipc quiz in hindi part 5

आज के इस आर्टिकल में मै आपको “ भारतीय दंड संहिता वस्तुनिष्ठ प्रश्न भाग 5 | Ipc quiz in hindi part 5 “, के बारे में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा ।

भारतीय दंड संहिता वस्तुनिष्ठ प्रश्न भाग 5 | Ipc quiz in hindi part 5

1 – ठ इन्दौर में एक प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष एक अभियोजन साक्षी था । न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने पर उसे साक्षी के रूप में शपथ दिलाई गई, मजिस्ट्रेट उसके बाद अन्य मामले में साक्ष्य लेने में व्यस्त हो गए अत: उन्होंने साक्षी को निर्देश दिया कि वह अपने निष्पादन लिपिक के पास जाए वहाँ लिपिक द्वारा उसका परीक्षण हुआ उसके द्वारा लिपिक के दिए गए उत्तरों में से कतिपय कथन मिथ्या थे। ठ द्वारा कौन सा अपराध किया गया ?

(अ) मिथ्या साक्ष्य देने का अपराध

(ब) मिथ्या कथन करने का अपराध

(स) गलत जानकारी देना

(द) उपरोक्त में से कोई नहीं

 

2 –  ‘अ’अपने इलेक्ट्रिॉनिक रिकार्ड में मिथ्या प्रविष्टि इस प्रयोजन से करता है कि वह न्यायालय में सम्पोषक साक्ष्य के रूप में काम में लाई जाये । ‘अ’ ने :

(अ) मिथ्या साक्ष्य गढ़ा है

(ब) मिथ्या साक्ष्य नहीं गढ़ा है ।

(स) गलत जानकारी देना

(द) उपरोक्त में से कोई नहीं

IPC – Indian Penal Code In Hindi

3 – न्यायालय में मिथ्या साक्ष्य देने पर दण्ड निर्धारित है :

(अ) धारा 198 भा.द.सं.

(ब) धारा 193 भा.द.सं.

(स) धारा 196 भा.द.सं.

(द) धारा 197 भा.द.सं.

 

4 – न्यायालय में झूठी गवाही देने के अभियुक्त व्यक्ति को कितना दण्ड दिया जा सकता है ?

(अ) सात वर्ष का कारावास

(ब) सात वर्ष तक का कारावास एवं जुर्माना

(स) सात वर्ष तक का कारावास या जुर्माना

(द) पाँच वर्ष का कारावास एवं जुर्माना

 

5 – आपराधिक विधि (संशोधन) अधिनियम, 2006 द्वारा भारतीय दण्ड संहिता में कौनसी धारा सम्मिलित की गई थी?

(अ) धारा 498-क

(ब) धारा 153-कक

(स) धारा 229-क

(द) धारा 195-क

IPC 1860 MOCK TEST

6 – धारा 195-क भा.दं.सं. संबंधित है –

(अ) साक्षी की सुरक्षा से

(ब) आहत की सुरक्षा से

(स) मिथ्या साक्ष्य देने के लिए धमकी

(द) इनमें से कोई नहीं

 

7- यदि सत्य बोलने हेतु कोई व्यक्ति आबद्ध है और यह जानते हए कि असत्य है, असत्य कथन करता है, निम्न में से कौनसी स्थिति सही होगी?

(अ) यदि उसने पुलिस अधिकारी को असत्य कथन दिया हो तो मिथ्या देने के अपराध का दोषी होगा

(ब) वह किसी भी अपराध का दोषी नहीं होगा

(स) वह मिथ्या साक्ष्य देने के अपराध का केवल तब ही दोषी होगा जबकि उसने वह कथन न्यायिक कार्यवाही की किसी अवस्था में दिया हो

(द) वह मिथ्या साक्ष्य देने के अपराध का दोषी होगा, यदि उसने किसी वरिष्ठ अधिकारी को बयान दिया

IPC – Indian Penal Code In Hindi

8 – ‘ख’ को डकैती के लिए दोषसिद्ध करने के अभिप्राय से ‘क’ न्यायालय में मिथ्या साक्ष्य देता है। डकैती के लिए दण्ड आजीवन या 10 वर्ष का कठोर कारावास एवं अर्थदण्ड है। ‘क’ को मिथ्या साक्ष्य देने के लिए अधिकतम कितनी अवधि के कारावास का दण्ड दिया जा सकता है :

(अ) दस वर्ष

(ब) सात वर्ष

(स) आजीवन कारावास

(द) केवल अर्थदण्ड

 

9 – साक्ष्य के रूप में किसी इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख को पेश किया जाना निवारित करने के लिए नष्ट करने का अपराध भा.द.सं. के तहत दण्डनीय है :

(अ) धारा 201 में

(ब) धारा 202 में

(स) धारा 203 में

(द) धारा 204 में

 

10 – ‘क’ ‘ख’ को वैध दण्ड से प्रतिच्छादित करने के आशय से संश्रय देता है जिसके बारे में वह जानता है कि उसने मृत्युदण्ड से दण्डनीय अपराध किया है। ‘क’ दण्डित किया जायेगा :

(अ) न्यूनतम 2 वर्ष के कारावास से

(ब) अधिकतम 5 वर्ष के कठोर कारावास से

(स) किसी भांति का अधिकतम 7 वर्ष तक के कारावास से

(द) जुर्माना से

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11 – बलात्संग के पीड़ित का परिचय प्रकटन किस धारा में दंडनीय है:

(अ) धारा 376-घ, भारतीय दण्ड संहिता

(ब) धारा 229, भारतीय दण्ड संहिता

(स) धारा 228, भारतीय दण्ड संहिता

(द) धारा 228-क, भारतीय दण्ड संहिता

 

12  – धारा 228-क भारतीय दण्ड संहिता में सम्मिलित की गई:

(अ) 1983 में

(ब) 1969 में

(स) 2005 में

(द) इनमें से कोई नहीं

 

13 – भारतीय दण्ड संहिता का अध्याय XII संबंधित है:

(अ) मिथ्या साक्ष्य और लोक न्याय के विरुद्ध अपराधों से

(ब) निर्वाचन संबंधी अपराधों से

(स) सिक्कों और सरकारी स्टांपों संबंधी अपराधों से

(द) बांटों और मापों संबंधी अपराधों से

IPC – Indian Penal Code In Hindi

14 – भारतीय दण्ड संहिता की धारा 230 के अनुसार ‘भारतीय सिक्का’ में सम्मिलित है :

(अ) कौड़ियाँ

(ब) कम्पनी का रुपया

(स) फर्रुखाबादी रुपया

(द) (ब) तथा (स) दोनों

 

15 – भा.द.सं. में “सिक्का ” में सम्मिलित नहीं है –

(अ) कौड़ियाँ

(ब) अस्टाम्पित तांबे के टुकड़े

(स) पदक

(द) ये सभी

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16 – लोक उपताप से अभिप्रेत है :

(अ) जनता द्वारा किया गया उपताप

(ब) किसी व्यक्ति द्वारा जनता के समक्ष किया गया उपताप

(स) किसी व्यक्ति द्वारा किया गया उपताप, जो समाज को प्रभावित करे

(द) किसी व्यक्ति द्वारा किया गया उपताप जो समाज के प्रत्येक व्यक्ति को प्रभावित करे

 

17 – निम्नलिखित में से कौन-सा सही है ?

बाधा:

(अ) केवल आपराधिक दोष है।

(ब) केवल सिविल दोष है

(स) आपराधिक और सिविल दोष है

(द) इनमें से कुछ नहीं है

 

18 – क एक व्यक्ति जिसने लोक न्यसेंस का अपराध किया है, को निम्न बचाव उपलब्ध नहीं है –

(अ) उसने अपराध नहीं किया

(ब) उसने अपराध जानबूझकर नहीं किया

(स) उसने अपराध किसी दबाव में किया

(द) उसके कार्य से कुल सुविधा या भलाई कारित होती है

IPC – Indian Penal Code In Hindi

19 – लोक अपदूषण के सामान्य प्रकार के लिए दण्ड उपबंधित है ?

(अ) भा.द.सं. की धारा 268 में

(ब) भा.द.सं. की धारा 269 में

(स) भा.द.सं. की धारा 290 में

(द) भा.द.सं. की धारा 291 में

 

20 – आम रास्ते पर लापरवाही और तेजी से वाहन चलाने के अपराध धारा 279 भारतीय दण्ड संहिता के लिए कौन-सा तथ्य आवश्यक नहीं है ?

(अ) वाहन का चलाना

(ब) आम रास्ते पर ही

(स) वाहन चालन इतनी तेजी या लापरवाही से हो जिससे मानव जीवन संकटापन्न हो

(द) रास्ते पर व्यक्तियों का होना

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21 – उपेक्षा के वाद में वादी को यह सिद्ध करना आवश्यक नहीं है :

(अ) प्रतिवादी का सावधानी बरतने का कर्तव्य था

(ब) प्रतिवादी द्वारा सावधानी बरतने का कर्तव्य भंग हुआ

(स) सावधानी बरतने के कर्तव्य भंग से वास्तविक हानि हुई

(द) प्रतिवादी का ध्यान सावधानी बरतने के कर्तव्य की ओर दिलाया गया था

 

22 – धारा 279 और 273 भारतीय दण्ड संहिता के दोनों अपराधों में निम्न समान तथ्य हैं :

(अ) अपराध सार्वजनिक मार्ग पर कारित किए जाते हैं

(ब) अपराध के लिए समान दण्ड की व्यवस्था है

(स) चोट पहुँचाना

(द) उतावलेपन या उपेक्षा का तत्व विद्यमान है

 

23 – निम्नलिखित साक्ष्य में से कौन लोक मार्ग पर असावधानी अथवा उतावलेपन से वाहन चलाने के कारण जो कि भा.द.सं. की धारा 279 के अधीन दण्डनीय है, अपराध सिद्धि के लिए पर्याप्त साक्ष्य है:

(अ) अत्यधिक तेज गति से वाहन चलाना

(ब) मार्ग की गलत बाजू से वाहन चलाना

(स) केवल एक तथ्य की कोई वाहन द्वारा कुचल दिया गया है

(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं

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24 – सार्वजनिक पथ पर उतावलेपन से गाड़ी चलाने के अपराध के लिए अधिकतम कितनी सजा का प्रावधान है ?

(अ) एक वर्ष की सजा व एक हजार रुपया जुर्माना

(ब) छ: महीने की सजा व एक हजार रुपया जुर्माना

(स) दो वर्ष की सजा व पाँच हजार रुपया जुर्माना

(द) एक वर्ष की सजा व पाँच हजार रुपया जुर्माना

 

25 – ‘अ’ एक अंधे व्यक्ति को अश्लील पत्रिका विक्रय करने के लिए भारतीय दण्ड संहिता की धारा 292 के तहत् आरोपित किया गया, उसका बचाव था कि उसे यह जानकारी नहीं थी कि जो पत्रिका उसने विक्रय की वह अश्लील थी –

(अ) तथ्य की भूल के कारण ‘अ’ सफल होगा

(ब) ‘अ’ असफल होगा

(स) न्यायालय का विवेकाधिकार है

(द) उपरोक्त में से कोई नहीं

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26 – (1) दूसरों को क्षोम, (ii) अश्लील कृत्य, (iii) सार्वजनिक स्थान से निकटता, एवं (iv) सार्वजनिक स्थान में, इन चार घटकों में से उनका निम्न में से कौन-सा संयोजन, भारतीय दण्ड संहिता की धारा 294 के अंतर्गत दण्डनीय, अश्लील कृत्य के अपराध का गठन करेगा ?

(अ) चारों (i), (ii), (iii), (iv) ही घटक

(ब) प्रथम तीन (i), (ii) व (iii) घटक

(स) प्रथम (i), द्वितीय (ii) एवं चतुर्थ

(iv) घटक (द) केवल घटक प्रथम दो (i) व (ii) ही घटक

 

27 – भा.द.सं. की धारा 294 में अश्लीलता के अन्तर्गत सम्मिलित नहीं है –

(अ) किसी लोक स्थान में कोई अश्लील कार्य करना

(ब) किसी लोक स्थान में या उसके समीप अश्लील गाने गाना

(स) लोक स्थान एवं प्राइवेट स्थान में कोई अश्लील कार्य या गाने गाना

(द) उपरोक्त सभी

 

28 – सही कथन छांटिये –

(अ) मानव वध सदैव विधिविरुद्ध होता है

(ब) मानव वध सदैव विधिपूर्ण होता है

(स) मानव वध विधिपूर्ण या विधिविरुद्ध कैसा भी हो सकता है

(द) मानव वध सदैव न्यायानुमत होता है।

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29 – आपराधिक मानव वध परिभाषित किया गया है –

(अ) धारा 299 भारतीय दण्ड संहिता के अंतर्गत

(ब) धारा 300 भारतीय दण्ड संहिता के अंतर्गत

(स) धारा 302 भारतीय दण्ड संहिता के अंतर्गत

(द) धारा 304 भारतीय दण्ड संहिता के अंतर्गत

 

30 – भारतीय दण्ड संहिता की धारा 299 के अधीन आवश्यक दोषी मन:स्थिति है:

(अ) आशय अथवा ज्ञान

(ब) आशय अथवा उपेक्षा

(स) आशय अथवा उतावलापन

(द) उपेक्षा अथवा विद्वेष

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31 – माता के गर्भ में स्थित शिशु की मृत्यु कारित करना :

(अ) सदैव मानववध है

(ब) मानववध है यदि आशय गर्भपात करना हो

(स) सदोष मानववध है।

(द) सदोष मानववध है, यदि ऐसे शिशु का कोई भाग बाहर निकल आया हो, यद्यपि उस शिशु ने श्वास न ली हो या पूर्णत: उत्पन्न न हुआ हो।

 

32 – एक मुर्गे को मारकर चुराने के आशय से ‘अ’ उस पर गोली चलाता है और ‘ब’ जो कि एक झाड़ के पीछे था, को मार देता है। ‘अ’ को ‘ब’ के वहाँ होने का ज्ञान नहीं था । यदि ‘अ’ का हत्या के लिए विचारण किया जाता है, तब आपका क्या निष्कर्ष होगा :

(अ) कि, ‘अ’ ने हत्या के अपराध को कारित किया है।

(ब) कि, ‘अ’ ने आपराधिक मानववध के अपराध को कारित किया है

(स) कि, ‘अ’ ने हत्या की कोटि में न आने वाले आपराधिक मानववध के अपराध को भी कारित नहीं किया है

(द) कि, ‘अ’ लूटपाट का दोषी है

 

33 – ‘अ’ अप्राधिकृत रूप से एक राजमार्ग में गड्ढा खोद देता है। ‘ब’ उस गड्ढे में गिर जाता है एवं उसका पांव टूट जाता है। राज्य ‘अ’ के विरुद्ध आपराधिक दोष के लिए मुकदमा चलाता है। ‘ब’ अपकृत्य के लिए सिविल क्षतिपूर्ति की माँग करता है । ‘अ’:

(अ) दोहरे जोखिम के सिद्धांत के अन्तर्गत ‘ब’ की अपनी असावधानी थी कि वह गड्ढे को नहीं देख सका

(ब) ‘ब’ की कार्यवाही से संरक्षित है, क्योंकि यह ‘ब’ की अपनी असावधानी थी कि वह गड्ढे को नहीं देख सका एवं उसमें गिर गया

(स) ‘ब’ की कार्यवाही से संरक्षित है क्योंकि जब गड्ढे को खोदा उसका ‘ब’ को क्षति करने का कोई विचार नहीं था, जो कि पूर्णतया अपरिचित था

(द) आपराधिक एवं सिविल दोनों कार्यवाहियों में दायी है

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34 – जब कोई आरोपी इस विश्वास के साथ कि एक स्त्री में प्रेतात्मा प्रवेश कर गई है, उसे निकालने के प्रयास में उसकी पिटाई करता है, जिसके परिणामस्वरूप उस स्त्री की मृत्यु हो जाती है। वह आरोपी है:

(अ) हत्या की कोटि में न आने वाले आपराधिक मानववध हेतु

(ब) स्वेच्छया चोट पहुँचाने हेतु

(स) हत्या

(द) कोई अपराध नहीं

 

35 – अ ने ब  को क्षति करने के उद्देश्य से लात मारी जिससे ‘ब’ पीछे गिरा और एकळीला पत्थर सिर में लगने से उसकी मृत्यु हो गई। ‘अ’ दोषी होगा –

(अ) हत्या का

(ब) सदोष मानववध का जो हत्या नहीं है

(स) घोर उपहति का

(द) साधारण उपहति का

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36 – भारतीय दण्ड संहिता की …….. हत्या’ को परिभाषित करती है –

(अ) धारा 299

(ब) धारा 300

(स) धारा 301

(द) धारा 302

 

37 – सर्वोच्च न्यायालय ने धारा 300 के खंड (3) के अर्थ एवं परिधि को स्पष्ट किया था –

(अ) विरसा सिंह बनाम पंजाब राज्य में

(ब) पाण्डुरंग बनाम हैदराबाद राज्य में

(स) हनुमंत सिंह बनाम म.प्र. राज्य में

(द) अमजद खान बनाम म.प्र. राज्य मे

 

38 – ‘क’, ‘ग’ को यह सोचते हुए कि वह ‘ख’ है, मार डालता है। ‘क’ निम्नलिखित धारा के अन्तर्गत दण्डनीय अपराध का दोषी है –

(अ) 301

(ब) 304 भाग-1

(स) 302

(द) 304 भाग-2

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39 – ‘आपराधिक मानव-वध जो कि हत्या नहीं है’ की श्रेणी में आने वाले कृत्यों का वर्णन भा.द.सं. की किस धारा में किया गया है :

(अ) धारा 300

(ब) धारा 299

(स) धारा 299 तथा 300

(द) धारा 302

 

40 – आपराधिक मानव हत्या नहीं है यदि अपराधी अचानक एवं गम्भीर प्रकोपन से आत्मसंयम की शक्ति से वंचित होकर प्रकोपन देने वाले की मृत्यु कारित करे । इस मामले में प्रकोपन का प्रश्न –

(अ) तथ्य का प्रश्न है

(ब) विधि का प्रश्न है

(स) तथ्य एवं विधि का मिश्रित प्रश्न है

(द) इनमें से कोई नहीं

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41 – निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘हत्या’ शब्द की सही परिभाषा है :

(अ) उस कार्य का जिससे मृत्यु कारित की गई है साशय ऐसी शारीरिक क्षति करना है जिससे मृत्यु कारित हो जाना संभाव्य है

(ब) मृत्यु यह ज्ञान रखते हुए कारित की गई है कि यह संभाव्य है कि वह अपने कार्य से मृत्यु कारित करेगा

(स) मृत्यु ऐसी शारीरिक क्षति कारित करने के आशय से कारित हुई है जिसके बारे में अपराधी यह ज्ञान रखता है कि जिस व्यक्ति को क्षति कारित की जा रही है उसकी क्षति से मृत्यु कारित होना अधिसंभाव्य है

(द) गंभीर और अचानक प्रकोपन से मृत्यु कारित हुई है

 

42 – एक व्यक्ति हत्या का अपराधी तभी माना जा सकता है, जब :

(अ) यदि वह व्यक्ति को शारीरिक क्षति करने के आशय से किया गया हो जो मृत्यु कारित करने के लिए हो

(ब) यदि वह शारीरिक क्षति कारित करने के आशय से किया गया हो जिसमें अपराधी जानता हो कि उस व्यक्ति की मृत्यु कारित करना संभाव्य है जिसको वह अपहानि कारित की गई है

(स) हत्या इस जानकारी से की गई है कि वह जो कार्य कर रहा है उससे मृत्यु कारित होने की संभावना है

(द) जब हत्या गंभीर और अचानक प्रकोपन के प्रभाव में की गई है

 

43 – जब उपहति साशय हो एवं प्रकृति के सामान्य अनुक्रम में मृत्यु कारित करने के लिए पर्याप्त हो तथा परिणामस्वरूप मृत्यु कारित हुई हो तो यह अपराध है :

(अ) हत्या का प्रयास

(ब) सदोष मानव वध जो हत्या की श्रेणी में नहीं आता हो

(स) हत्या

(द) घोर उपहति

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44 – आपराधिक मानववध हत्या नहीं है, यदि वह किया जाता है:

(अ) जब अपराधी क्रोध में कार्य कर रहा है।

(ब) जब अपराधी पागलपन में कार्य कर रहा है

(स) पीड़ित की सहमति से, जो 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका है

(द) पीड़ित की सहमति से, जो 12 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका है

 

45 – आपराधिक मानववध, हत्या नहीं है, यदि वह किया जाए :

(अ) गम्भीर और अचानक प्रकोपन के अधीन

(ब) पागलपन में

(स) नैतिक आस्था में

(द) क्रोध में

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46 – सदोष मानववध हत्या नहीं है यदि वह कारित होती है :

(अ) गम्भीर एवं अकस्मात उत्तेजना के अंतर्गत

(ब) स्वयं विषाक्त पदार्थ लेने के अंतर्गत

(स) अप्रतिरोध्य आकर्षण के अंतर्गत

(द) उपर्युक्त सभी

 

47 – गंभीर एवं अकस्मात उत्तेजना :

(अ) तथ्य का प्रश्न

(ब) विधि का प्रश्न

(स) दोनों (अ) एवं (ब)

(द) विधि के अंतर्गत एक धारणा

 

48 – गम्भीर और अचानक प्रकोपन है –

(अ) तथ्य का प्रश्न

(ब) विधि का प्रश्न

(स) तथ्य व विधि का मिला-जुला प्रश्न

(द) विधि के अंतर्गत एक उपधारणा

IPC – Indian Penal Code In Hindi

49 – गंभीर और अचानक प्रकोपन के विषय में निम्नलिखित में से एक सही नहीं है :

(अ) यह कि प्रकोपन को बुलावा नहीं दिया गया

(ब) यह कि आरोपी स्वेच्छया प्रकोपित नहीं हुआ कि दूसरे की जान लेने का बहाना बन जाए

(स) यह कि लोकसेवक द्वारा अपनी वैधानिक शक्ति के प्रयोग में प्रकोपन नहीं हआ है

(द) यह आवश्यक नहीं है कि आरोपी ने अपना आत्मनियंत्रण खो दिया हो

 

50 – निम्नलिखित में से एक भारतीय दण्ड संहिता में परिभाषित हत्या के आवश्यक तत्वों में से नहीं है:

(अ) यदि कार्य इस प्रकार की शारीरिक क्षति पहुँचाने के आशय से किया गया है जिसमें मृत्यु संभावित है।

(ब) यदि कार्य जिससे मृत्यु कारित की गई है, मृत्यु कारित करने के आशय से किया गया है।

(स) – यदि कार्य उस प्रकार की शारीरिक क्षति कारित करने के आशय से किया गया है जो प्रकति के सामान्य प्रक्रिया में मृत्यु कारित करने के लिए पर्याप्त है

(द) यदि कार्य करने वाले व्यक्ति को यह ज्ञान है कि वह इतना खतरनाक है कि वह सारी संभावनाओं में मृत्यु  कारित करेगा

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51 – निम्नलिखित में से किस मामले में हत्या को हत्या की कोटि में न आने वाले आपराधिक मानव वध माना जायेगा : (

अ) जहाँ अपराधी गम्भीर प्रकोपन से आत्मसंयम की शक्ति से वंचित हो

(ब) जहाँ अपराधी अचानक प्रकोपन से आत्मसंयम की शक्ति से वंचित हो गया हो

(स) जहाँ अपराधी गम्भीर और अचानक प्रकोपन से आत्मसंयम की शक्ति से वंचित हो गया हो।

(द) उपर्युक्त किसी से नहीं

 

52 –  यदि यह सन्देह से परे सिद्ध हो जाता है कि मृतक के शरीर पर पाई गई चोटें जानबूझकर मारी गई थी , वे मृत्यु कारित करने के लिए प्रकृति के मामूली (सामान्य) अनुक्रम में पर्याप्त थी, ऐसी दशा में जो अपराध हुआ है, वह है :

(अ) मानव वध

(ब) आपराधिक मानववध परन्तु हत्या के समतुल्य नहीं

(स) आपराधिक मानववध

(द) हत्या

 

53 – यह कथन सही है कि:

(अ) प्रत्येक सदोष मानववध हत्या है

(ब) प्रत्येक हत्या सदोष मानववध है

(स) उक्त कोई कथन सही नहीं है

(द) उक्त दोनों कथन (अ) एवं (ब) सही हैं

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54 – कथन (A) : एक मनुष्य द्वारा दूसरे मनुष्य की मृत्यु कारित करना मानववध है।

कथन (R) : मानववध सदैव विधिविरुद्ध होता है।

(अ) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है

(ब) (A) और (R) दोनों सही हैं परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है

(स) (A) सही है परन्तु (R) गलत है

(द) (A) गलत है परन्तु (R) सही है।

 

55 – ‘अ’ की उम्र 21 वर्ष और उसकी प्रेमिका ‘ब’ की उम्र 19 वर्ष है, दोनों आत्महत्या करने को तैयार होते हैं। ‘अ’, ‘ब’ की हत्या कर देता है, परन्तु हिम्मत टूटने से अपने को नहीं मारता है, तब ‘अ’ ने अपराध किया :

(अ) हत्या

(ब) आपराधिक मानववध जो हत्या नहीं है

(स) आत्महत्या का प्रयत्न

(द) कोई अपराध नहीं

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56 – ‘क’, ‘व’ को मारता है, ‘ख’ बीच-बचाव करता है जिसमें ‘ख’ के कन्धे पर सो रहे बच्चे को ‘क’ के मुक्के की चोट लगती है और वह मर जाता है। ‘क’ ने निम्न अपराध किया है :

(अ) साधारण उपहति

(ब) गम्भीर उपहति

(स) सदोष मानववध

(द) हत्या

 

57 – ‘अ’, ‘य’ की नाक खींचने का प्रयास करता है ‘य’ प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार के प्रयोग में ऐसा करने से रोकने के लिए ‘अ’ को पकड़ लेता है। परिणामस्वरूप ‘अ’ को अचानक तीन आवेश आ जाता है और वह ‘य’ का वध कर देता है। ‘अ’ ने अपराध किया:

(अ) हत्या

(ब) आपराधिक मानववध जो हत्या नहीं है

(स) कोई अपराध नहीं है

(द) उपरोक्त में से कोई नहीं

 

58 – एक सपेरे ने साँपों का खेल दिखाते हुए दावा किया कि वह सर्पदंश को ठीक कर देता है। मृतक ने सर्प से अपने को कटवा लिया परन्तु उसे ठीक नहीं कर पाया । सपेरा उत्तरदायी है:

(अ) हत्या के लिए

(ब) छल के लिए

(स) सदोष मानववध के लिए उत्तरदायी हो सकता है

(द) किसी अपराध के लिए उत्तरदायी नहीं है

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59 – ‘क’, ‘ख’ को मारता है । ‘ख’ इस बात को लेकर अत्यधिक क्रोधित हो जाता है। ‘ग’ जो वहीं खड़ा हुआ था, ‘ख’ के क्रोध का लाभ लेते हए तथा ‘क’ की मृत्यु कारित कर देने के उद्देश्य से ‘ख’ को चाकू पकड़ा देता है। ‘ख’ उस चाकू से ‘क’ की मृत्यु कारित कर देता है। इस समस्या में :

(अ) दोनों हत्या की कोटि में न आने वाले आपराधिक मानववध के लिए दोषी है।

(ब) ‘ग’ हत्या के दुष्प्रेरण का दोषी है, जबकि ‘ख’ हत्या की कोटि में न आने वाले मानववध का दोषी है

(स) दोनों हत्या के अपराध के दोषी हैं

(द) दोनों ने कोई अपराध नहीं किया है

 

60 – ‘अ’ पर ‘झ’ आघात करता है ‘ब’ को इस प्रकोपन से तीव्र क्रोध आ जाता है । ‘अ’ जो निकट ही खडा हुआ है ‘ब’ के क्रोध का लाभ उठाने और उससे ‘झ’ का वध कराने के आशय से उसके हाथ में एक छुरी उस प्रयोजन के लिए दे देता है । ‘ब’ उस छुरी से ‘ग’ का वध कर देता है । ‘अ’ किस अपराध का दोषी है ?

(अ) हत्या की कोटि में न आने वाला आपराधिक मानव-वध

(ब) आपराधिक मानव वध करने के लिए दुष्प्रेरण

(स) हत्या का प्रयत्न

(द) हत्या

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61 – ‘x’ ने ‘Z’ की मृत्यु कारित करने के आशय से उसके सिर पर गंभीर वार किया । ‘Z’ अचेत हो गया, ‘x’ ने यह विश्वास करते हुए कि ‘Z’ मर गया है, साक्ष्य गढ़ने की दृष्टि से एक तालाब में फेंक दिया । यह पाया गया कि ‘Z’ पानी में डूबने से मरा । ‘x’ दोषी है:

(अ) हत्या करने के प्रयास का

(ब) हत्या का

(स) आपराधिक मानववध का जो हत्या की कोटि में नहीं आता है

(द) किसी अपराध का नहीं

 

62 – ‘Z”ने ‘B’ पर वार किया। ‘B’ इस उकसाने वाले कार्य से तीव्र रूप से क्रोधित हो गया । ‘A’ जो पास खड़ा था, ने ‘B’ के हाथ में चाकू दे दिया। ‘B’ ने चाकू से ‘Z की हत्या कर दी। बताइये कि भारतीय दण्ड संहिता की किस धारा के अन्तर्गत ‘A’ ने अपराध किया

(अ) धारा 300

(ब) धारा 299

(स) धारा 307

(द) धारा 107

 

63 – बिना किसी कारण के A एक भीड़ पर भरी तोप से दागता है और उसमें

(अ) ‘A’ हत्या का अपराधी है।

(ब) ‘A’ हत्या का अपराधी नहीं है

(स) ‘A’ केवल मानववध का अपराधी है क्योंकि उसने मृतक पर शाना नहीं साधा था

(द)भारतीय दण्ड संहिता के अन्तर्गत A ने कोई अपराध नहीं किया

IPC – Indian Penal Code In Hindi

64 – ‘अ’, ‘ब’ को मार डालने के आशय से ‘ब’ पर गोली चलाता है, परिणामस्वरूप ‘ब’ मर जाता है। ‘अ’ दोषी है:

(अ) हत्या के लिए

(ब) मानववध के लिए

(स) गंभीर चोट के लिए

(द) मानववध, जो हत्या नहीं है, के लिए

 

65 ‘z’ से गंभीर और अचानक प्रकोपन प्राप्त होने पर ‘Z’ पर ‘A’ पिस्तौल से गोली चलाता है। ‘Z’ की मृत्यु होती है। ” दोषी है:

(अ) हत्या के प्रयत्न का

(ब) आपराधिक मानववध जो हत्या नहीं है, का

(स) आपराधिक मानववध के प्रयत्न का

(द) घोर उपहति का

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66 – ‘X’ जानता है कि ‘Y’ एक ऐसे रोग से ग्रसित है जिसमें वह एक साधारण चोट से ही मर सकता है। ‘x’ने ‘Y’ को एक साधारण चोट इस आशय से कारित की कि उसे शारीरिक क्षति पहुँचे । ‘Y’ की मृत्यु हो जाती है। भारतीय दण्ड संहिता के अधीन ‘x’ दोषी है :

(अ) हत्या का

(ब) आपराधिक मानववध जो हत्या नहीं है

(स) गंभीर चोट पहुँचाने का मन

(द) साधारण चोट पहुंचाने का

 

67 – ‘क’ यह जानते हुए कि ‘ख’ सिर में बीमारी से ग्रस्त है एवं ‘ख’ के सिर पर एक वार से उसकी मृत्यु होना संभाव्य है। ‘क’, ‘ख’ के सिर पर चूंसे से वार करता है। ‘ख’ मर जाता है। ‘क’ दोषी है –

(अ) केवल आपराधिक मानव वध का

(ब) हत्या का

(स) उपहति कारित करने का

(द) कोई अपराध नहीं

 

68 – ‘अ’ ने अपनी पत्नी को पीटा । वह बेहोश होकर गिर पड़ी। उसको मरा समझकर और स्वयं को हत्या के लिए पकड़े जाने से बचने के लिए ‘अ’ ने पत्नी को रस्सी से पंखे पर लटका दिया । पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि उसकी मृत्यु लटकने से हुई है। ‘अ’ दोषी है :

(अ) हत्या के लिए

(ब) आपराधिक मानववध के लिए

(स) उपहति के लिए

(द) घोर उपहति के लिए

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69 – ‘ब’ पर ‘झ’ आघात करता है। ‘ब’ को इस प्रकोपन से तीव्र क्रोध आ जाता है। ‘अ’ जो निकट खड़ा हआ है, ‘ब’ के क्रोध का लाभ उठाने और उससे ‘झ’ का वध कराने के आशय से उसके हाथ से छुरी ‘ब’ को देता है। ‘ब’ उस छुरी से ‘झ’ का वध कर देता है। ‘अ’ किस अपराध का दोषी है ? 

(अ) हत्या की कोटि में न आने वाला आपराधिक मानववध

(ब) आपराधिक मानववध करने के लिए दुष्प्रेरण

(स) हत्या का प्रयत्न

(द) हत्या

 

70 – पति और पत्नी के झगड़े में पति डंडे से पत्नी को पीटने का प्रयास करता है जो दुर्घटनावश उसके हाथ में लिए नवजात शिशु पर गिर जाता है और शिशु की तत्काल मृत्यु हो जाती है। पति दोषी है :

(अ) हत्या का

(ब) हत्या की कोटि में नहीं आने वाले आपराधिक मानववध का

(स) घोर उपहति का

(द) सदोष मानववध की कोटि में नहीं आने वाले उपेक्षापूर्ण कार्य द्वारा मृत्यु कारित करने का

Ipc quiz in hindi part 5

71 – ‘क’ को ‘म’ गम्भीर और अचानक प्रकोपन देता है। ‘क’ इस प्रकोपन से ‘म’ पर पिस्तौल चलाता है जिसमें न तो उसका आशय ‘य’ का जो समीप ही है, किन्तु दृष्टि से बाहर है, वध करने का है और न वह यह जानता है कि संभाव्य है कि वह ‘य’ का वध कर दे। ‘क’ ‘य’ का वध करता है। ‘क’ दोषी है:

(अ) हत्या का

(ब) केवल आपराधिक मानववध का

(स) हत्या के प्रयास का

(द) किसी अपराध का नहीं क्योंकि उसका कृत्य सामान्य अपवाद के अन्तर्गत आता है

 

72 – ‘ ज’ एक पुजारी एक लड़की को प्रेतात्मा (भूत) से छुड़ाने के लिए पीटता है। लड़की की मृत्यु हो जाती ‘ज’ –

(अ) किसी अपराध का दोषी नहीं है

(ब) वह सदोष मानववध का दोषी है

(स) वह सद्भावना के बचाव का हकदार है

(द) वह हत्या के प्रयास का दोषी है

 

73 – निम्न दृष्टांतों में से किसमें ‘अ’ सदोष मानववध हेतु दायित्वाधीन है :

(अ) ‘अ’ एक भिखारी ‘ब’ को भोजन देने में लोप करता है

(ब) ‘अ’, ‘ब’ को यह चेतावनी देने में लोप करता है कि नदी में बाढ़ है और उसे पार करना खतरनाक है

(स) ‘अ’ अपने 5 वर्ष के शिशु को भोजन खिलाने में लोप करता है

(द) ‘अ’ जो एक तैराक है, नदी में डूब रहे बच्चे को बचाने में असफल रहता है

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74 – निम्नलिखित में से कौनसा हत्या के अपराध का दृष्टान्त है :

(अ) ‘अ’ लोकमार्ग के समीप एक लक्ष्य पर गोली चलाता है

(ब) ‘अ’, मनुष्य की एक भीड़ पर गोली चलाता है

(स) ‘अ’ अपनी बग्गी उपेक्षापूर्वक एक संकरी भीड़युक्त गली में हाँकता है

(द) ‘अ’ ने ‘द’ पर, जो प्लीहा का रोगी था, एक हल्की बाँस की लाठी से प्रहार किया और ‘द’ की मृत्यु हो गयी

 

75 – ‘अ’ का ‘ब’ को मारने का कोई आशय नहीं था । वह ‘ब’ के उदर में एक कुंडलीदार भाला घुसेड़कर ‘ब’ को केवल एक पाठ पढ़ाना चाहता था । उसने ऐसा ही किया। ‘ब’ मर गया । ‘अ’ जिम्मेदार है –

(अ) गहरे आघात के लिए

(ब) आघात के लिए

(स) हत्या के लिए

(द) सदोष मानववध जो हत्या नहीं है, के लिए

 

76 – ‘अ’ ,’ब’की हत्या करने के उद्देश्य से ‘ब’ की झोपड़ी तक गया । उसने यह सुनिश्चित कर लिया कि ‘ब’ झोपडी में सो रहा है। झोपड़ी में केवल एक दरवाजा था और कोई खिड़की नहीं थी। उसने दरवाजा बाहर से बंद करके ताला लगा दिया। तत्पश्चात् उसने झोपड़ी में आग लगा दी। ‘ब’ जलकर मर गया। क्या ‘अ’ दायी है :

(अ) घोर उपहति के लिए 

(ब) हत्या के लिए

(स) आपराधिक मानववध के लिए जो हत्या नहीं है

(द) इनमें से कोई नहीं

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77 – अ गंभीर प्रकोपन की ऐसी परिस्थितियों के अधीन ज पर आक्रमण करता है कि ज का उसके द्वारा वध किया जाना केवल ऐसा आपराधिक मानववथ है, जो हत्या की कोटि में नहीं आता है। ब जो ज से वैमनस्य रखता है, उसका वध करने के आशय से और प्रकोपन से वशीभूत न होते हुए ज का वध करने में अ की सहायता करता है:

(अ) अ एवं ब दोनों आपराधिक मानव वध के दोषी हैं

(ब) अ एवं ब दोनों हत्या के दोषी हैं

(स) ब हत्या का दोषी है और अ केवल आपराधिक मानव वध का दोषी है

(द) अ हत्या का दोषी है और ब आपराधिक मानव वध का दोषी है

 

78 – ‘क’ ने इस आशय से कि दूसरे व्यक्ति की मृत्यु हो जाये, लकड़ी से उसके सिर पर तीन प्रहार किये और फिर यह निश्चित करते हुए कि उसकी मृत्यु हो गई है, अपराध सम्बन्धी समस्त साक्ष्य नष्ट कर देने के उद्देश्य से झोपड़ी में आग लगा दी। यह पाया गया कि प्रहारों से मृतक केवल अचेत हो गया था और मृत्यु वास्तव में झोपड़ी में अभियुक्त द्वारा लगाई गई आग में जलने के कारण हुई थी। ‘क’ अपराध का दोषी है :

(अ) हत्या

(ब) आपराधिक मानववध जो हत्या की कोटि में नहीं आता

(स) हत्या करने का प्रयत्न

(द) उपहति

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79 – आपराधिक मानववध और हत्या के बीच अन्तर करने के लिए निम्न में से कौन निर्णायक तत्व है :

(अ) कार्य

(ब) आशय

(स) जानकारी

(द) मानव जीवन के प्रति जोखिम की मात्रा

 

80 – ‘क’ ने ‘ख’ का मुँह चिपकने वाले प्लास्टर से ढंक दिया, प्लास्टर को कसकर रुमाल से बाँध दिया नासिका के छिद्रों को क्लोरोफार्म में भिगाई रूई से बन्द कर दिया, उसके हाथों और पैरों को रस्सी से बाँधकर एक छिछली नाली में डाल दिया और उसके सिर के नीचे अपनी कमीज का तकिया बनाकर रख दिया ‘ख’ की मृत्यु हो गई। यहाँ :

(अ) ‘क’ हत्या के अपराध का दोषी है

(ब) ‘क’ सदोष मानववध के अपराध का दोषी है

(स) ‘क’ हत्या के प्रयत्न का दोषी है

(द) ‘क’ उपेक्षा द्वारा मृत्यु कारित करने का दोषी है

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81 – ‘अ’ को ‘ब’ अचानक और गम्भीर प्रकोपन देता है । ‘अ’ इस प्रकोपन से ‘ब’ पर पिस्तौल चलाता है। वह गोली ‘स’ को लगती है, जो दृष्टि से बाहर था और ‘स’ मर जाता है। ‘अ’ ने निम्नलिखित में से कौनसा अपराध किया है :

(अ) हत्या

(ब) आपराधिक मानववध

(स) उपेक्षा द्वारा मृत्यु कारित करना

(द) इनमें से कोई भी नहीं

 

82 – P,M को गम्भीर और अचानक प्रकोपन देता है। M इस प्रकोपन पर P की ओर पिस्टल तान देता है | M, न तो आशय और न ही जानते हुए कि Q जो पास ही है किन्तु दृष्टि से विलुप्त है, एको मार देता है। M ने कारित किया है –

(अ) हत्या

(ब) आपराधिक मानव वध

(स) न तो हत्या और न ही आपराधिक मानव वध

(द) उपर्युक्त सभी

 

83- क लूट को आसान बनाने के प्रयोजन से बसे हए गृह में रात को आग लगाता है और इस आग से एक व्यक्ति की मृत्यु कारित कर देता है, ‘क’ का कृत्य अपराध है:

(अ) मात्र गृह में आग लगाने का

(ब) आपराधिक मानववध का

(स) स्वेच्छया मृत्यु कारित करने का

(द) दुर्घटनावश मृत्यु कारित करने का

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84 – ‘य’ जो एक मजिस्ट्रेट है, के समक्ष साक्षी के रूप में ‘क’ उपसंजात होता है। ‘य’ यह कहता है कि वह ‘क’ के अभिसाक्ष्य के एक शब्द पर भी विश्वास नहीं करता है और यह कि ‘क’ ने शपथ भंग किया है। ‘क’ को इन शब्दों से अचानक आवेश आ जाता है और वह ‘य’ का वध कर देता है। यह है –

(अ) गम्भीर और अचानक प्रकोपन

(ब) हत्या

(स) हत्या की कोटि में न आने वाला मानववध

(द) उपर्युक्त सभी

 

85 – ‘अ’, ‘ब’ की मृत्यु कारित करने के आशय से उसे सिर पर गंभीर (भयंकर) चूंसा मारता है, ‘ब’ बेहोश हो जाता है, ‘अ’ यह विश्वास करते हए कि ‘ब’ की मृत्यु हो चुकी है उसे तालाब में फेंक देता है। रिपोर्ट में ‘ब’ की मृत्यु का कारण पानी में डूबने से हई बताया । ‘अ’ कौन से अपराध का दोषी है :

(अ) हत्या

(ब) हत्या की कोटि में न आने वाला आपराधिक मानववध

(स) हत्या का प्रयास

(द) हत्या की कोटि में आने वाला आपराधिक मानववध

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86 – सही उत्तर दीजिए :

(अ) हत्या के मामले में मृत्यु कारित करने का आशय सदैव आवश्यक नहीं है

(ब) यह ज्ञान की कार्य का प्राकृतिक और अधिसम्भाव्य परिणाम मृत्यु होगा, हत्या के मामले को बनाता है 

(स) (अ) तथा (ब) दोनों

(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं

 

87 – आई.पी.सी. की धारा 299 तथा 300 के बीच अन्तर का पहली बार निम्नलिखित केस में विस्तारपूर्वक परीक्षण किया गया:

(अ) वासुदेव बनाम उत्तरप्रदेश

(ब) दाऊ दयाल बनाम स्टेट

(स) ओम प्रकाश बनाम पंजाब राज्य

(द) आर. बनाम गोविन्दा

 

88 – आपराधिक मानववध व हत्या से संबंधित प्रमुख वाद है:

(अ) के.सी. मैथ्यू का वाद

(ब) वीरेन्द्र कुमार घोष बनाम ऐम्परर

(स) रेक्स बनाम गोविन्दा

(द) उपर्युक्त सभी

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89 – ‘अ’ ने ‘ब’ पर साशय पिस्तौल से गोली चलाई किन्तु वह ‘स’ को लगी जिसने गई। ‘अ’ ने कौनसा अपराध किया :

(अ) हत्या का प्रयत्न

(ब) आपराधिक मानववध का प्रयत्न

(स) धारा 300 के अन्तर्गत हत्या

(द) धारा 301 के अन्तर्गत आपराधिक मानववध

 

90 – x एवं Y दोनों Z की हत्या करने जाते हैं। x हाथ में भाला लिए चौकन्ना खड़ा रहता है। वह Z पर कोई वार नहीं करता । वह Y, Z को मार डालता है:

(अ) Z की हत्या के लिए केवल Y दोषी है

(ब) Z की हत्या के लिए X और Y दोनों दोषी हैं

(स) X ने वार नहीं किया, इसलिए वह दोषी नहीं है

(द) (अ) और (स) दोनों उत्तर सही हैं।

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91 – हत्या के अपराध का दण्ड प्रावधानित है:

(अ) भारतीय दण्ड संहिता की धारा 300 में

(ब) भारतीय दण्ड संहिता की धारा 302 में

(स) भारतीय दण्ड संहिता की धारा 304 में

(द) भारतीय दण्ड संहिता की धारा 304 (A) में

 

92 –  हत्या के अपराध का दण्ड है :

(अ) केवल मृत्यु

(ब) केवल आजीवन कारावास

(स) जीवनपर्यन्त एकाकी परिरोध

(द) मृत्यु दण्ड या आजीवन कारावास और जुर्माना

 

93 – निम्नलिखित में से किस वाद में यह निर्णीत किया गया कि मृत्युदण्ड ‘बिरल से बिरलतम’ मामलों में ही दिया जाना चाहिए –

(अ) आर बनाम गोविन्दा

(ब) हुसैन आरा खातून बनाम बिहार राज्य

(स) सुनील बत्रा बनाम देहली एडमिनिस्ट्रेशन

(द) बचन सिंह बनाम स्टेट ऑफ पंजाब

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94 – ‘अ’ बिना किसी प्रतिहेतु के भीड़ पर गोली चलाता है जिससे दो व्यक्ति मर जाते हैं । ‘अ’ ने क्या अपराध किया :

(अ) हत्या – धारा 302

(ब) उपेक्षापूर्ण कार्य से मृत्यु – धारा 304A

(स) आपराधिक मानववध – धारा 304

(द) कोई अपराध नहीं

 

95 – अ, जो किसी खतरनाक आयुध से सुसजित नहीं था और जिसने वध करने का आशय भी प्रकट नहीं किया था, ने ब को रस्सियों की सहायता से एक बिजली के खंभे से बाँध दिया और उस पर हमला कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप ब की मृत्यु हो गई, अ ने किस धारा के अंतर्गत दण्डनीय अपराध किया है –

(अ) 302

(ब) 304

(स) 304अ

(द) 326 

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96 – निम्नलिखित में से किस वाद में उच्चतम न्यायालय ने भारतीय दण्ड संहिता की धारा 303 को असंवैधानिक घोषित कर दिया:

(अ) शेरसिंह बनाम पंजाब राज्य

(ब) मिठू सिंह बनाम पंजाब राज्य

(स) वचनसिंह बनाम पंजाब राज्य

(द) त्रिवेणी बेन बनाम गुजरात राज्य

 

97. भारतीय दण्ड संहिता की धारा 303 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय के किस वाद में असंवैधानिक तथा शून्य घोषित किया गया ?

(अ) प्यारा सिंह बनाम राज्य

(ब) मिठु बनाम पंजाब राज्य

(स) कुलदीप बनाम पंजाब राज्य

(द) प्यारेलाल बनाम मध्यप्रदेश राज्य

 

98 – सदोष मानववध जो हत्या नहीं है, दण्डनीय है, के लिए :

(अ) आजीवान कारावास से

(ब) मृत्यु से

(स) आजीवन कारावास अथवा दस वर्ष के कारावास से

(द) दस वर्ष के कारावास से

 

99 – हत्या की कोटि में न आने वाले बिना आशय से आपराधिक मानव-वध के लिए अधिकतम कितनी सजा दी जा सकती है?

(अ) 10 वर्ष का कारावास या जुर्माना से या दोनों से

(ब) आजीवन कारावास एवं जुर्माना

(स) आजीवन कारावास

(द) सात वर्ष का कारावास

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100 –  भारतीय दण्ड संहिता के किस प्रावधान के अन्तर्गत ‘उतावलेपन और उपेक्षापूर्ण कार्य से मृत्यु कारित करने’ का उल्लेख है ?

(अ) धारा 304

(ब) धारा 304-ए में

(स) धारा 300 (अपवाद) में

(द) धारा 301 में

Updated: October 20, 2020 — 1:47 pm

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