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आपराधिक षडयंत्र क्या है | Criminal conspiracy | Dhara 120a & 120b Ipc

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Criminal conspiracy | Dhara 120a & 120b Ipc

आपराधिक षडयंत्र क्या है | Criminal conspiracy | Dhara 120a & 120b Ipc

Criminal conspiracy | Dhara 120a & 120b Ipc

इस आर्टिकल में मै आपको भारतीय दंड संहिता की बहुत ही महत्वपूर्ण धारा 120A आपराधिक षडयंत्र (Criminal conspiracy)  के बारे में बताने का प्रयास कर रहा हूँ . आशा करता हूँ की मेरा यह प्रयास आपको पसंद आएगा . तो चलिए जान लेते हैं की –

आपराधिक षडयंत्र क्या है ? 

धारा 120 A – जबकि दो या अधिक व्यक्ति –

(1) कोई अवैध कार्य ,अथवा

(2) कोई ऐसा कार्य , जो अवैध नहीं है , अवैध साधनों द्वारा , करने या कराने को सहमत होते हैं , तब ऐसी सहमती आपराधिक षडयंत्र कहलाती है .

परन्तु किसी अपराध को करने की सहमती के सिवाय ,कोई सहमती आपराधिक षडयंत्र तब तक न हो सकेगी , जब तक की सहमती के आलावा कोई कार्य उसके अनुसरण में उस सहमती के एक या अधिक पक्षकारो द्वारा नहीं कर दिया जाता .

स्पष्टीकरण – यह तत्वहीन् है की अवैध कार्य ऐसी सहमती का चरम उद्देश्य है , या उस उद्देश्य का अनुसांगिक मात्र है .

Criminal conspiracy | Dhara 120a & 120b Ipc

आपराधिक षडयंत्र के लिए दंड –

धारा 120 B –

१ – मृत्यु दंड , आजीवन कारावास या दो वर्ष या उससे अधिक सश्रम कारावास से दंडनीय अपराध का षडयंत्रकर्ता दुष्प्रेरक की भांति दंडनीय होगा . यदि ऐसे षडयंत्र को दण्डित करने हेतु संहिता में कोई अन्य स्पष्ट उपबंध न हो .

२ – किसी अन्य अपराध का षडयंत्रकर्ता 6 माह तक का कारावास या जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जायेगा .

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आपराधिक षडयंत्र के आवश्यक तत्व

१ – दो या दो से अधिक व्यक्ति –  आपराधिक षड्यंत्र के लिए  दो या दो से अधिक व्यक्तियों का होना आवश्यक है क्योंकि यह नहीं कहा जा सकता है की किसी व्यक्ति ने स्वयं अपने साथ षड्यंत्र किया था . षड्यंत्र के सम्बन्ध में यह नियम है की पति पत्नी एक दुसरे के साथ षड्यंत्र नहीं कर सकते अर्थात उन्हें दो या दो से अधिक व्यक्ति नहीं माना जा सकता ,परन्तु वे अन्य के साथ षड्यंत्र कर सकते हैं .

२ – दो या दो से अधिक व्यक्तियों में अवैध लोप करने का समझौता – समझौता ही षड्यंत्र के सम्बन्ध में अपराध का सार है . केवल दो व्यक्ति होने मात्र से षड्यंत्र की संरचना नहीं हो जाती , बल्कि उन व्यक्तियों में आपस में समझौता होना चाहिए .

३ – समझौता अवैध अथवा वैध साधनों द्वारा करने का हो – केवल दो या दो से अधिक व्यक्तियों में समझौता हो जाने से ही आपराधिक षड्यंत्र का गठन नहीं हो जाता जब तक की वह समझौता अवैध कार्य करने के लिए अथवा अवैध कार्य को अवैध साधनों द्वारा करने के लिए किया गया हो .

४ – समझौते के अनुसरण में कार्य का किया जाना – साधरणतः आपराधिक षड्यंत्र के मामलो में व्यक्ति का आपस में सहमत होना पर्याप्त होता है , परन्तु धारा 120a का दूसरा भाग स्पष्ट रूप से उपबंधित करता है की यदि दो व्यक्तियों में से कोई किसी अपराध कार्य को करने से भिन्न किसी बात के लिए सहमत होते हैं तो मात्र सहमती पर्याप्त नहीं मानी जाती वरन समझौते के आलावा कुछ कार्य भी किया जाना चाहिए .

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आपराधिक षडयंत्र और दुष्प्रेरण में अंतर 

आपराधिक षड्यंत्र दुष्प्रेरण
१ - आपराधिक षड्यंत्र एक प्रकार से ही होता है दुष्प्रेरण तीन प्रकार से होता है
१ - उकसाने द्वारा
२ - सहायता द्वारा
३ - षड्यंत्र द्वारा
२ - षड्यंत्र में दो या अधिक व्यक्तियों का समझौता होता है दुष्प्रेरण में समझौता नहीं होता
३ - षड्यंत्र अपने आप में अपराध है दुष्प्रेरण केवल कुछ अपवादों को छोड़कर अपराध नहीं है
४ - आपराधिक षड्यंत्र दुष्प्रेरण का ही भाग है दुष्प्रेरण में ऐसा कुछ नहीं है

भारतीय दंड संहिता की धारा 120 A (आपराधिक षड्यंत्र) की परिभाषा एवं आपराधिक षड्यंत्र करने का दंड ओरिजनल बुक के अनुसार नीचे पीडीएफ फाइल में देखिये .

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