संविधान अनुच्छेद 213 | Article 213 of Indian Constitution in Hindi

आजके इस आर्टिकल में मैआपकोविधानमंडल के विश्रांतिकाल में अध्यादेश प्रख्यापित करने की राज्यपाल  की शक्ति | भारतीय संविधान अनुच्छेद 213 | Article 213 of Indian Constitution in Hindi | Article 213 in Hindi | भारतीय संविधान का अनुच्छेद 213 |  Power of Governor to promulgate Ordinances during recess of Legislature” के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

भारतीय संविधान अनुच्छेद 213 | Article 213 of Indian Constitution in Hindi

[ Indian Constitution Article 213 in Hindi ] –

विधानमंडल के विश्रांतिकाल में अध्यादेश प्रख्यापित करने की राज्यपाल  की शक्ति 

(1) उस समय को छोड़ कर जब किसी राज्य की विधान सभा सत्र में है या विधान परिषद  वाले राज्य में विधान-मंडल के दोनों सदन सत्र में है, यदि किसी समय राज्यपाल  का यह समाधान हो जाता है कि ऐसी  परिास्थितियां विद्यमान हैं जिनके कारण तुरंत कार्रवाई करना उसके लिए आवश्यक हो गया है तो वह ऐसे अध्यादेश प्रख्यापित कर सकेगा जो उसे उन परिास्थितियां में अपेक्षित प्रतीत हों :

परंतु  राज्यपाल , राष्ट्रपति  के अनुदेशों के बिना, कोई ऐसा  अध्यादेश प्रख्याफपित नहीं  करेगा यदि–

(क) वैसे ही उपबंध  अंतर्विष्ट करने वाले विधेयक को विधान-मंडल में पुर : स्थाफित किए  जाने के लिए राष्ट्रपति  की पूर्व  मंजूरी की अपेक्षा  इस संविधान के अधीन होती ;या

(ख) वह वैसे ही उपबंध  अंतर्विष्ट करने वाले विधेयक को राष्ट्रपति  के विचार के लिए  आरक्षित रखना आवश्यक समझता ; या

(ग) वैसे हर उपबंध  अंतर्विष्ट करने वाला राज्य के विधान-मंडल का अधिनियम इस संविधान के अधीन तब तक अविधिमान्य होता जब तक राष्ट्रपति  के विचार के लिए  आरक्षित रखे जाने पर  उसे राष्ट्रपति  की अनुमति प्राप्त नहीं  हो गई होती ।

(2) इस अनुच्छेद के अधीन प्रख्यापित अध्यादेश का वही बल और प्रभाव होगा जो राज्य के विधान-मंडल के ऐसे अधिनियम का होता है जिसे राज्यपाल ने अनुमति दे दी है, किंतु  प्रत्येक ऐसा अध्यादेश–

(क) राज्य की विधान सभा के समक्ष और विधान परिषद वाले राज्य में दोनों सदनों के समक्ष रखा जाएगा तथा विधान-मंडल के पुनः समवेत होने से छह सप्ताह की समाप्ति  पर  या यदि उस अवधि की समाप्ति  से पहले विधान सभा उसके अननुमोदन का संकल्प  पारित  कर देती है और यदि विधान परिषद  है तो वह उससे सहमत हो जाती है तो, यथास्थिति, संकल्प  के पारित  होने पर या विधान परिषद  द्वारा संकल्प  से सहमत होने पर  प्रवर्तन में नहीं  रहेगा ;और

(ख) राज्यपाल  द्वारा किसी भी समय वापस  लिया जा सकेगा ।  

स्पष्टीकरण जहां विधान परिषद  वाले राज्य के विधान-मंडल के सदन, भिन्न-भिन्न तारीखों को पुनः समवेत होने के लिए , आहूत किए  जाते हैं वहां इस खंड के प्रयोजनों के लिए  छह सप्ताह की अवधि की गणना उन तारीखों में से पश्चातवर्ती तारीख से की जाएगी  ।

(3) यदि और जहां तक इस अनुच्छेदके अधीन अध्यादेश कोई ऐसा उपबंध करता है जो राज्य के विधान-मंडल के ऐसे  अधिनियम में जिसे राज्यपाल  ने अनुमति दे दी है, अधिनियमित किए जाने पर विधिमान्य नहीं होता तो और वहां तक वह अध्यादेश शून्य होगा : परंतु राज्य के विधान-मंडल के ऐसे  अधिनियम के, जो समवर्ती सूची में प्रगणित किसी विषय के बारे में संसद् के किसी अधिनियम या किसी विद्यमान विधि के विरुद्ध है, प्रभाव से संबंधित इस संविधान के उपबंधों के प्रयोजनों के लिए यह है कि कोई अध्यादेश, जो राष्ट्रपति के अनुदेशों के अनुसरण में इस अनुच्छेद के अधीन प्रख्यापित किया जाता है, राज्य के विधान-मंडल का ऐसा  अधिनियम समझा जाएगा  जो राष्ट्रपति  के विचार के लिए  आरक्षित रखा गया था और जिसे उसने अनुमति दे दी है ।

[42]* * * * *

भारतीय संविधान अनुच्छेद 213

[ Indian Constitution Article 213 in English ] –

“  Power of Governor to promulgate Ordinances during recess of Legislature ”–

(1) If at any
time, except when the Legislative Assembly of a State is in session, or where there is a Legislative Council
in a State, except when both Houses of the Legislature are in session, the Governor is satisfied that
circumstances exist which render it necessary for him to take immediate action, he may promulgate such
Ordinances as the circumstances appear to him to require:
Provided that the Governor shall not, without instructions from the President, promulgate any such
Ordinance if—
(a) a Bill containing the same provisions would under this Constitution have required the previous
sanction of the President for the introduction thereof into the Legislature; or
(b) he would have deemed it necessary to reserve a Bill containing the same provisions for the
consideration of the President; or
(c) an Act of the Legislature of the State containing the same provisions would under this
Constitution have been invalid unless, having been reserved for the consideration of the President, it
had received the assent of the President.
(2) An Ordinance promulgated under this article shall have the same force and effect as an Act of the
Legislature of the State assented to by the Governor, but every such Ordinance—
(a)shall be laid before the Legislative Assembly of the State, or where there is a Legislative Council in the State, before both the Houses, and shall cease to operate at the expiration of six weeks from thereassembly of the Legislature, or if before the expiration of that period a resolution disapproving it is
passed by the Legislative Assembly and agreed to by the Legislative Council, if any, upon the passing
of the resolution or, as the case may be, on the resolution being agreed to by the Council; and

 


भारतीय संविधान अनुच्छेद 213

भारतीय संविधान

Pdf download in hindi

Indian Constitution

Pdf download in English


Article 1 of Indian Constitution in Hindi Article 1 of Indian Constitution in Hindi
Updated: August 16, 2020 — 1:19 pm

Leave a Reply

Your email address will not be published.