Home LAW कंपनी अधिनियम धारा 7 | Section 7 of Companies Act in Hindi

कंपनी अधिनियम धारा 7 | Section 7 of Companies Act in Hindi

284
0
Section 7 of Companies Act in Hindi

आजके इस आर्टिकल में मैआपको ” कंपनी का निगमन | कंपनी अधिनियम धारा 7  | Section 7 of Companies Act in Hindi | कंपनी अधिनियम की धारा 7 | के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

Section 7 of Companies Act in Hindi

[ Companies Act Sec. 7 in Hindi ] –

कंपनी का निगमन

(1) उस रजिस्ट्रार के पास, जिसकी अधिकारिता के भीतर किसी कंपनी का रजिस्ट्रीकृत कार्यालय स्थित किया जाना प्रस्तावित है, रजिस्ट्रीकरण के लिए निम्नलिखित दस्तावेज और जानकारी फाइल की जाएगी, अर्थात्:

(क) ज्ञापन के सभी अभिदाताओं द्वारा, ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, सम्यक रूप से हस्ताक्षरित कंपनी के ज्ञापन और अनुच्छेद;

(ख) किसी व्यवसायरत अधिवक्ता, चार्टर्ड अकाउंटेंट, लागत लेखापाल या कंपनी सचिव द्वारा, जो कंपनी के गठन में लगा हुआ है और कंपनी के निदेशक, प्रबंधक या सचिव के रूप में अनुच्छेदों में नामित किसी व्यक्ति द्वारा विहित प्ररूप में यह घोषणा कि रजिस्ट्रीकरण और पूर्व निर्णय या उसके आनुषंगिक विषयों की बाबत इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों की सभी अपेक्षाओं का अनुपालन किया गया है।

(ग) ज्ञापन के प्रत्येक अभिदाता से और अनुच्छेदों में प्रथम निदेशकों के रूप में नामित व्यक्तियों से, यदि कोई हों, यह शपथ-पत्र कि उनको किसी कंपनी के संवर्धन, गठन या प्रबंधन के संबंध में किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध नहीं किया गया है या कि उनको पूर्ववर्ती पांच वर्षों के दौरान इस अधिनियम या किसी पूर्व कंपनी विधि के अधीन, किसी कपट या अपकरण या किसी कंपनी के कर्तव्य के किसी भंग का दोषी नहीं पाया गया है और कि कंपनी के रजिस्ट्रीकरण के लिए रजिस्ट्रार के पास फाइल किए गए सभी दस्तावेजों में जो जानकारी अंतर्विष्ट है वह उसकी सर्वोत्तम जानकारी और विश्वास के अनुसार सही और पूर्ण तथा सत्य है;

(ग) ज्ञापन के प्रत्येक अभिदाता से और अनुच्छेदों में प्रथम निदेशकों के रूप में नामित व्यक्तियों से, यदि कोई हों, यह शपथ-पत्र कि उनको किसी कंपनी के संवर्धन, गठन या प्रबंधन के संबंध में किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध नहीं किया गया है या कि उनको पूर्ववर्ती पांच वर्षों के दौरान इस अधिनियम या किसी पूर्व कंपनी विधि के अधीन, किसी कपट या अपकरण या किसी कंपनी के कर्तव्य के किसी भंग का दोषी नहीं पाया गया है और कि कंपनी के रजिस्ट्रीकरण के लिए रजिस्ट्रार के पास फाइल किए गए सभी दस्तावेजों में जो जानकारी अंतर्विष्ट है वह उसकी सर्वोत्तम जानकारी और विश्वास के अनुसार सही और पूर्ण तथा सत्य है।

(घ) उसका रजिस्ट्रीकृत कार्यालय स्थापित किए जाने तक पत्र-व्यवहार का पता;

(ङ) नाम की विशिष्टियां, जिसके अंतर्गत पहचान के सबूत के साथ, ज्ञापन के प्रत्येक अभिदाता का उपनाम या कुटुंब नाम, निवास स्थान का पता, राष्ट्रीयता और ऐसी अन्य विशिष्टियां भी हैं, जो विहित की जाएं और ऐसे अभिदाता की दशा में, जो निगमित निकाय है, ऐसी विशिष्टियां, जो विहित की जाएं।

(च) अनुच्छेदों में कंपनी के प्रथम निदेशकों के रूप में वर्णित व्यक्तियों की विशिष्टियां, उनके नाम, जिसके अंतर्गत पहचान के सबूत के साथ उपनाम या कुटुंब नाम, निदेशक पहचान संख्या, निवास स्थान का पता, राष्ट्रीयता और ऐसी अन्य विशिष्टियां भी हैं, जो विहित की जाएं; और . (छ) कंपनी के प्रथम निदेशकों के रूप में अनुच्छेदों में वर्णित व्यक्तियों के

ऐसे प्ररूप और रीति में, जो विहित की जाएं, कंपनी के निदेशकों के रूप में कार्य करने की उनकी सहमति के साथ अन्य फर्मों या निगमित निकायों में हितों की विशिष्टियां।

(2) रजिस्ट्रार उपधारा (1) के अधीन फाइल किए गए दस्तावेजों और जानकारी के आधार पर, उस उपधारा में निर्दिष्ट सभी दस्तावेजों और जानकारी को रजिस्टर में रजिस्टर करेगा और विहित प्ररूप में इस प्रभाव का निगमन प्रमाणपत्र जारी करेगा कि प्रस्तावित कंपनी इस अधिनियम के अधीन निगमित कर दी गई है ।

(3) उपधारा (2) के अधीन जारी किए गए निगमन प्रमाणपत्र में वर्णित तारीख से ही, रजिस्ट्रार, कंपनी को, निगम पहचान संख्या आबंटित करेगा, जो कंपनी के लिए एक सुभिन्न पहचान होगी और जिसे प्रमाणपत्र में भी सम्मिलित किया जाएगा |

(4) कंपनी, अपने रजिस्ट्रीकृत कार्यालय में उपधारा (1) के अधीन मूल रूप में फाइल किए गए सभी दस्तावेजों और जानकारी की प्रतियां इस अधिनियम के अधीन उसका विघटन होने तक बनाए रखेगी और परिरक्षित रखेगी ।

(5) यदि कोई व्यक्ति, किसी कंपनी के रजिस्ट्रीकरण के संबंध में रजिस्ट्रार के पास फाइल किए गए किन्हीं दस्तावेजों में कोई मिथ्या जानकारी या किसी जानकारी की गलत विशिष्टियां देगा या किसी सारवान् जानकारी को छिपाएगा, जिसकी उसे जानकारी है, तो वह धारा 447 के अधीन कार्रवाई के लिए भागी होगा |

(6) उपधारा (5) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जहां किसी कंपनी के निगमन के पश्चात् किसी समय यह साबित हो जाता है कि कंपनी को, ऐसी कंपनी के · निगमन के लिए फाइल किए गए किन्हीं दस्तावेजों या दस्तावेज में कोई मिथ्या या गलत

जानकारी देकर या दुर्व्यपदेशन या कोई सारवान् तथ्य या जानकारी को छिपाकर या किसी कपटपूर्ण कार्रवाई द्वारा निगमित करा लिया गया है, वहां कंपनी के संप्रवर्तकों, प्रथम निदेशकों के रूप में नामित व्यक्ति और उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन घोषणा करने वाले व्यक्तियों में से प्रत्येक व्यक्ति, धारा 447 के अधीन कार्रवाई के लिए भागी होगा।

(7) उपधारा (6) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जहां किसी कंपनी को, ऐसी कंपनी के निगमन के लिए फाइल किए गए किन्हीं दस्तावेजों या दस्तावेज में कोई मिथ्या या गलत जानकारी देकर या दुर्व्यपदेशन करके या कोई सारवान् तथ्य या जानकारी को छिपाकर या किसी कपटपूर्वक कार्रवाई द्वारा निगमित करा लिया गया है, वहां अधिकरण का, उसे किए गए किसी आवेदन पर अपना यह समाधान हो जाता है कि परिस्थितियां ऐसा समर्थन करती हैं, तो वह,

(क) कंपनी के प्रबंधन के विनियमन के लिए, जिसके अंतर्गत उसके ज्ञापन और अनुच्छेदों में परिवर्तन, यदि कोई हो, भी हैं, लोकहित में या कंपनी और उसके सदस्यों और लेनदारों के हित में ऐसे आदेश पारित कर सकेगा, जो वह ठीक समझे;

(ख) यह निदेश दे सकेगा कि सदस्यों का दायित्व अपरिसीमित होगा; या (ग) कंपनियों के रजिस्टर से कंपनी के नाम को हटाने का निर्देश दे सकेगा;

(घ) कंपनी के परिसमापन का कोई आदेश पारित कर सकेगा; या ।

(ङ) ऐसे अन्य आदेश पारित कर सकेगा, जो वह ठीक समझे: परंतु इस उपधारा के अधीन कोई आदेश करने के पूर्व,

(i) कंपनी को मामले में सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिया जाएगा; और

(ii) अधिकरण, कंपनी द्वारा किए गए संव्यवहारों पर, जिनके अंतर्गत संविदा की गई बाध्यताएं, यदि कोई हों, पर या किसी दायित्व का संदाय भी है, विचार करेगा।

कंपनी अधिनियम धारा 7

[ Companies Act Section 7 in English ] –

Incorporation of company ”–

 (1) There shall be filed with the Registrar within whose jurisdiction  the registered office of a company is proposed to be situated, the following documents and information  for registration, namely:— 

(a) the memorandum and articles of the company duly signed by all the subscribers to the  memorandum in such manner as may be prescribed; 

(b) a declaration in the prescribed form by an advocate, a chartered accountant, cost accountant or  company secretary in practice, who is engaged in the formation of the company, and by a person  named in the articles as a director, manager or secretary of the company, that all the requirements of  this Act and the rules made thereunder in respect of registration and matters precedent or incidental  thereto have been complied with; 

(c) an affidavit from each of the subscribers to the memorandum and from persons named as the  first directors, if any, in the articles that he is not convicted of any offence in connection with the  promotion, formation or management of any company, or that he has not been found guilty of any  fraud or misfeasance or of any breach of duty to any company under this Act or any previous  company law during the preceding five years and that all the documents filed with the Registrar for  registration of the company contain information that is correct and complete and true to the best of his  knowledge and belief; 

(d) the address for correspondence till its registered office is established; 

(e) the particulars of name, including surname or family name, residential address, nationality and  such other particulars of every subscriber to the memorandum along with proof of identity, as may be  prescribed, and in the case of a subscriber being a body corporate, such particulars as may be  prescribed; 

(f) the particulars of the persons mentioned in the articles as the first directors of the company,  their names, including surnames or family names, the Director Identification Number, residential  address, nationality and such other particulars including proof of identity as may be prescribed; and 

(g) the particulars of the interests of the persons mentioned in the articles as the first directors of  the company in other firms or bodies corporate along with their consent to act as directors of the  company in such form and manner as may be prescribed. 

(2) The Registrar on the basis of documents and information filed under sub-section (1) shall register  all the documents and information referred to in that subsection in the register and issue a certificate of  incorporation in the prescribed form to the effect that the proposed company is incorporated under this  Act. 

(3) On and from the date mentioned in the certificate of incorporation issued under sub-section (2),  the Registrar shall allot to the company a corporate identity number, which shall be a distinct identity for  the company and which shall also be included in the certificate. 

(4) The company shall maintain and preserve at its registered office copies of all documents and  information as originally filed under sub-section (1) till its dissolution under this Act. 

(5) If any person furnishes any false or incorrect particulars of any information or suppresses any  material information, of which he is aware in any of the documents filed with the Registrar in relation to  the registration of a company, he shall be liable for action under section 447. 

(6) Without prejudice to the provisions of sub-section (5) where, at any time after the incorporation of  a company, it is proved that the company has been got incorporated by furnishing any false or incorrect  information or representation or by suppressing any material fact or information in any of the documents  or declaration filed or made for incorporating such company, or by any fraudulent action, the promoters,  the persons named as the first directors of the company and the persons making declaration under clause  (b) of subsection (1) shall each be liable for action under section 447. 

(7) Without prejudice to the provisions of sub-section (6), where a company has been got  incorporated by furnishing any false or incorrect information or representation or by suppressing any  material fact or information in any of the documents or declaration filed or made for incorporating such 

27 

company or by any fraudulent action, the Tribunal may, on an application made to it, on being satisfied  that the situation so warrants,— 

(a) pass such orders, as it may think fit, for regulation of the management of the company  including changes, if any, in its memorandum and articles, in public interest or in the interest of the  company and its members and creditors; or 

(b) direct that liability of the members shall be unlimited; or 

(c) direct removal of the name of the company from the register of companies; or (d) pass an order for the winding up of the company; or 

(e) pass such other orders as it may deem fit: 

Provided that before making any order under this sub-section,— 

(i) the company shall be given a reasonable opportunity of being heard in the matter; and 

(ii) the Tribunal shall take into consideration the transactions entered into by the company,  including the obligations, if any, contracted or payment of any liability. 

कंपनी अधिनियम धारा 7


कंपनी अधिनियम 2013  

PDF download in Hindi

Companies Act 2013 PDF

Pdf download in English 


Section 1 Forest Act in Hindi Section 1 Forest Act in Hindi

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here