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कंपनी अधिनियम धारा 66 | Section 66 of Companies Act in Hindi

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Section 66 of Companies Act in Hindi

आजके इस आर्टिकल में मैआपको ” शेयर पूंजी में कमी |  Reduction of share capital | कंपनी अधिनियम धारा 66  | Section 66 of Companies Act in Hindi | कंपनी अधिनियम की धारा 66  के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

Section 66 of Companies Act in Hindi

[ Companies Act Sec. 66 in Hindi ] –

शेयर पूंजी में कमी-

(1) कंपनी द्वारा आवेदन पर अधिकरण द्वारा पुष्टि के अधीन रहते हुए, शेयरों द्वारा परिसीमित या गारंटी द्वारा परिसीमित और शेयर पूंजी वाली कोई कंपनी विशेष संकल्प द्वारा, शेयर पूंजी में किसी भी रीति में, कमी कर सकेगी और विशिष्टतया

(क) समादत्त न की गई शेयर पूंजी की बाबत अपने शेयरों के किसी दायित्व को निर्वापित या कम कर सकेगी; या

(ख) अपने शेयरों पर किसी दायित्व को निर्वापित करके या निर्वापित किए _ बिना या कम करके,

. (i) किसी ऐसी समादत्त शेयर पूंजी को रद्द कर सकेगी, जो खो गई है या उपलब्ध आस्तियों द्वारा उपदर्शित नहीं की गई है;

(ii) किसी ऐसी समादत्त शेयर पूंजी को चुका सकेगी, जो कंपनी की

वांछा से अधिक है, तदनुसार अपनी शेयर पूंजी और अपने शेयरों की रकम को कम करके अपने ज्ञापन में परिवर्तन कर सकेगी :

परंतु ऐसी कोई कमी तब नहीं की जाएगी, यदि कंपनी पर इस अधिनियम के प्रारंभ से पहले या उसके पश्चात् उसके द्वारा स्वीकार किए गए किसी निक्षेप का प्रतिसंदाय या उस पर संदेय ब्याज बकाया है | .

(2) अधिकरण उपधारा (1) के अधीन उसको किए गए प्रत्येक आवेदन की सूचना, सूचीबद्ध कंपनियों और कंपनियों के लेनदारों की दशा में केन्द्रीय सरकार, रजिस्ट्रार और प्रतिभूति विनिमय बोर्ड को देगा और उस सरकार, रजिस्ट्रार तथा प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड तथा लेनदारों द्वारा उसको किए गए प्रतिवेदनों पर, यदि कोई हों, सूचना की प्राप्ति की तारीख से तीन मास की अवधि के भीतर विचार करेगा :

परंतु जहां केन्द्रीय सरकार रजिस्ट्रार और प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड या लेनदारों की ओर से उक्त अवधि के भीतर कोई अभ्यावेदन प्राप्त नहीं होता है, वहां यह उपधारणा की जाएगी कि उनको कमी के बारे कोई आक्षेप नहीं है |

(3) अधिकरण, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि कंपनी के प्रत्येक लेनदार के ऋण या दावे का उन्मोचन या अवधारण हो गया है या वह प्रतिभूत हो गया है या उसकी

सहमति अभिप्राप्त हो गई है, तो ऐसे निबंधनों और शर्तों पर जिन्हें वह ठीक समझे, शेयर पूंजी की कमी को पुष्टि करने वाला आदेश कर सकेगा :

परंतु शेयर पूंजी की कमी के लिए कोई आवेदन, अधिकरण द्वारा तब तक मंजूर नहीं किया जाएगा जब तक कि ऐसी कमी के लिए कंपनी द्वारा प्रस्तावित ऐसा कोई लेखा व्यवहार इस अधिनियम की धारा 133 या किसी अन्य उपबंध में विनिर्दिष्ट लेखा मानकों के अनुरूप नहीं है और कंपनी के संपरीक्षक द्वारा इस प्रभाव का कोई प्रमाणपत्र अधिकरण के पास फाइल नहीं कर दिया गया है । ___ (4) उपधारा (3) के अधीन अधिकरण द्वारा शेयर पूंजी की कमी की पुष्टि का आदेश कंपनी द्वारा उस रीति में प्रकाशित किया जाएगा, जो अधिकरण निदेश दे ।

(5) कंपनी, उपधारा (3) के अधीन अधिकरण के आदेश की एक सत्यापित प्रति और अधिकरण द्वारा अनुमोदित कार्यवृत्त की प्रति निम्नलिखित को दर्शित करते हुए,

(क) शेयर पूंजी की रकमः ।

(ख) उन शेयरों की संख्या, जिनमें इन्हें विभाजित किया जाना है;

(ग) प्रत्येक शेयर की रकम; और ‘

(घ) वह रकम, यदि कोई हो, जो रजिस्ट्रीकरण की तारीख को प्रत्येक शेयर

पर समादत्त समझी गई हो, आदेश की प्रति प्राप्त होने के तीस दिन के भीतर रजिस्ट्रार को परिदत्त करेगी, जो उसे रजिस्टर करेगा और उस आशय का प्रमाणपत्र जारी करेगा ।

(6) इस धारा की कोई बात धारा 68 के अधीन कंपनी द्वारा अपनी स्वयं की प्रतिभूतियों के क्रय द्वारा वापसी को लागू नहीं होगी ।

(7) कंपनी का कोई भूतपूर्व या वर्तमान सदस्य, यथास्थिति, उसके द्वारा शेयर पर संदत्त रकम या कम की गई ऐसी रकम, यदि कोई हो, जिसे उस पर संदत्त किया गया समझा गया है और कमी के आदेश द्वारा यथा नियत शेयर की रकम के बीच के अंतर की, यदि कोई हो, रकम से अधिक रकम के उसके द्वारा धारित किसी शेयर की बाबत कोई मांग या अभिदाय करने के लिए दायी नहीं होगा ।

(8) जहां ऐसे किसी लेनदार का नाम, जो इस धारा के अधीन शेयर पूंजी की कमी के बारे में आक्षेप करने का हकदार है, कमी के लिए कार्यवाहियों या उनकी प्रकृति और ऋण या दावे की बाबत उसके प्रभाव की उसकी अज्ञानता के कारण, लेनदारों की सूची में दर्ज नहीं किया गया है और ऐसी कमी के पश्चात्, कंपनी धारा 271 की उपधारा (2) के अर्थान्तर्गत अपने ऋण या दावे की रकम का संदाय करने में असमर्थ है, वहां

(क) प्रत्येक ऐसा व्यक्ति, जो रजिस्ट्रार द्वारा कमी के आदेश के रजिस्ट्रीकरण की तारीख को कंपनी का सदस्य था, उस ऋण या दावे के संदाय के लिए उस रकम से अनधिक रकम का अभिदाय करने के लिए दायी होगा, जिसके अभिदाय के लिए वह तब दायी होता, यदि कंपनी ने परिसमापन उक्त तारीख से ठीक पूर्व के दिन को आरंभ किया होता; और

(ख) यदि कंपनी का परिसमापन हो चुका है तो अधिकरण ऐसे लेनदार के आवेदन पर और उसकी यथापूर्वोक्त अज्ञानता के सबूत पर यदि वह ठीक समझे,

अभिदाय करने के लिए इस प्रकार दायी व्यक्तियों की सूची तय करेगी और सूची पर परिनिर्धारित अभिदाताओं पर मांग और आदेश को इस प्रकार करेगी तथा प्रवृत्त करेगी मानो वे परिसमापन में सामान्य अभिदाता हों ।

(9) उपधारा (8) की कोई बात अभिदाताओं के बीच उनके अधिकारों पर प्रभाव नहीं डालेगी ।

(10) यदि कंपनी का कोई अधिकारी

(क) जानबूझकर कमी पर आक्षेप करने के लिए हकदार किसी लेनदार के नाम को छिपाता है;

(ख) जानबूझकर किसी लेनदार के ऋण या दावे की प्रकृति या रकम का दुर्व्यपदेशन करता है; या

(ग) यथापूर्वोक्त किसी ऐसे छिपाए जाने या दुर्व्यपदेशन को दुष्प्रेरित करता है या उससे संसर्गित है, तो वह धारा 447 के अधीन दायी होगा ।

(11) यदि कंपनी उपधारा (4) के उपबंधों का अनुपालन करने में असफल रहती है तो वह जुर्माने से, जो पांच लाख रुपए से कम का नहीं होगा, किंतु जो पच्चीस लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगी ।

कंपनी अधिनियम धारा 66

[ Companies Act Section 66 in English ] –

Reduction of share capital”–

(1) Subject to confirmation by the Tribunal on an application by  the company, a company limited by shares or limited by guarantee and having a share capital may, by a special resolution, reduce the share capital in any manner and in particular, may— 

(a) extinguish or reduce the liability on any of its shares in respect of the share capital not paid up; or 

(b) either with or without extinguishing or reducing liability on any of its shares,— (i) cancel any paid-up share capital which is lost or is unrepresented by available assets; or (ii) pay off any paid-up share capital which is in excess of the wants of the company, 

alter its memorandum by reducing the amount of its share capital and of its shares accordingly: 

Provided that no such reduction shall be made if the company is in arrears in the repayment of any  deposits accepted by it, either before or after the commencement of this Act, or the interest payable  thereon. 

(2) The Tribunal shall give notice of every application made to it under sub-section (1) to the Central  Government, Registrar and to the Securities and Exchange Board, in the case of listed companies, and the  creditors of the company and shall take into consideration the representations, if any, made to it by that  Government, Registrar, the Securities and Exchange Board and the creditors within a period of three  months from the date of receipt of the notice:

Provided that where no representation has been received from the Central Government, Registrar, the  Securities and Exchange Board or the creditors within the said period, it shall be presumed that they have  no objection to the reduction. 

(3) The Tribunal may, if it is satisfied that the debt or claim of every creditor of the company has been  discharged or determined or has been secured or his consent is obtained, make an order confirming the  reduction of share capital on such terms and conditions as it deems fit: 

Provided that no application for reduction of share capital shall be sanctioned by the Tribunal unless  the accounting treatment, proposed by the company for such reduction is in conformity with the  accounting standards specified in section 133 or any other provision of this Act and a certificate to that  effect by the company‘s auditor has been filed with the Tribunal. 

(4) The order of confirmation of the reduction of share capital by the Tribunal under sub-section (3)  shall be published by the company in such manner as the Tribunal may direct. 

(5) The company shall deliver a certified copy of the order of the Tribunal under sub-section (3) and  of a minute approved by the Tribunal showing— 

(a) the amount of share capital; 

(b) the number of shares into which it is to be divided; 

(c) the amount of each share; and 

(d) the amount, if any, at the date of registration deemed to be paid-up on each share, 

to the Registrar within thirty days of the receipt of the copy of the order, who shall register the same and  issue a certificate to that effect. 

(6) Nothing in this section shall apply to buy-back of its own securities by a company under section  68. 

(7) A member of the company, past or present, shall not be liable to any call or contribution in respect  of any share held by him exceeding the amount of difference, if any, between the amount paid on the  share, or reduced amount, if any, which is to be deemed to have been paid thereon, as the case may be,  and the amount of the share as fixed by the order of reduction. 

(8) Where the name of any creditor entitled to object to the reduction of share capital under this  section is, by reason of his ignorance of the proceedings for reduction or of their nature and effect with  respect to his debt or claim, not entered on the list of creditors, and after such reduction, the company is  unable, within the meaning of sub-section (2) of section 271, to pay the amount of his debt or claim,— 

(a) every person, who was a member of the company on the date of the registration of the order  for reduction by the Registrar, shall be liable to contribute to the payment of that debt or claim, an  amount not exceeding the amount which he would have been liable to contribute if the company had  commenced winding up on the day immediately before the said date; and 

(b) if the company is wound up, the Tribunal may, on the application of any such creditor and  proof of his ignorance as aforesaid, if it thinks fit, settle a list of persons so liable to contribute, and  make and enforce calls and orders on the contributories settled on the list, as if they were ordinary  contributories in a winding up. 

(9) Nothing in sub-section (8) shall affect the rights of the contributories among themselves. (10) If any officer of the company— 

(a) knowingly conceals the name of any creditor entitled to object to the reduction; (b) knowingly misrepresents the nature or amount of the debt or claim of any creditor; or (c) abets or is privy to any such concealment or misrepresentation as aforesaid,  he shall be liable under section 447.

(11) If a company fails to comply with the provisions of sub-section (4), it shall be punishable with  fine which shall not be less than five lakh rupees but which may extend to twenty-five lakh rupees. 

कंपनी अधिनियम धारा 66


कंपनी अधिनियम 2013  

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