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धारा 65a सम्पत्ति अन्तरण | Section 65a of Transfer of property Act

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Section 65a of Transfer of property Act

आज के इस आर्टिकल में मै आपको “ बंधककर्ता की पट्टा करने की शक्ति | सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम की धारा 65a क्या है | Section 65a Transfer of property Act in hindi | Section 65a of Transfer of property Act | धारा 65a सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम | Mortgagor’s power to lease ”  के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम की धारा 65a |  Section 65a of Transfer of property Act | Section 65a Transfer of property Act in Hindi

[ Transfer of property Act Section 65a in Hindi ] –

बंधककर्ता की पट्टा करने की शक्ति–

(1) उपधारा (2) के उपबन्धों के अध्यधीन जब बन्धककर्ता का बन्धक-सम्पत्ति पर विधिपूर्ण रूप से कब्जा हो तब उसकी यह शक्ति होगी कि उसे पट्टों पर दे दे, जो पट्टे बन्धकदार पर आबद्धकर होंगे।

(2) (क) हर ऐसा पट्टा ऐसा होगा जो सम्पृक्त सम्पत्ति के प्रबन्ध के मामूली अनुक्रम में और किसी स्थानीय विधि, रूढ़ि या प्रथा के अनुसार किया जाता।

(ख) हर ऐसे पट्टे में वह सर्वोत्तम भाटक आरक्षित होगा जो युक्तियुक्तत: अभिप्राप्त किया जा सकता हो और कोई भी प्रीमियम न तो दिया जाएगा और न उसके लिए वचन दिया जाएगा तथा कोई भी भाटक अग्रिम देय नहीं होगा।

(ग) किसी भी ऐसे पट्टे में नवीकरण के लिए प्रसंविदा अन्तर्विष्ट नहीं होगी।

(घ) हर ऐसा पट्टा ऐसी तारीख से प्रभावी होगा जो उसके लिए किए जाने की तारीख से छह मास से अधिक पश्चात् की न हो।

(ङ) निर्माणों के पट्टे की दशा में, चाहे वे उस भूमि के, जिस पर वे स्थित हैं, सहित या बिना पट्टे पर दिए गए हों, पट्टे की अस्तित्वावधि किसी दशा में भी तीन वर्ष से अधिक की न होगी और पट्टे में भाटक देने के लिए प्रसंविदा और उसमें विनिर्दिष्ट समय के भीतर भाटक न चुकाए जाने पर पुनः प्रवेश करने की शर्त अन्तर्विष्ट होगी।

(3) उपधारा (1) के उपबन्ध केवल तभी और वहीं तक लागू होते हैं जब और जहां तक कि बन्धक विलेख में कोई तत्प्रतिकूल आशय अभिव्यक्त न किया गया हो और उपधारा (2) के उपबन्धों में फेरफार या उनका विस्तारण बन्धक विलेख द्वारा किया जा सकेगा और इस प्रकार फेरफार किए गए या विस्तारित उपबन्ध यावत्शक्य वैसे ही प्रकार से और वैसी ही प्रसंगतियों, प्रभावों और परिणामों के सहित प्रवर्तित होंगे, मानो ऐसे फेरफार या विस्तारण उस उपधारा में अन्तर्विष्ट हों।]

धारा 65a Transfer of property Act

[ Transfer of property Act Sec. 65a in English ] –

Mortgagor’s power to lease”–

(1) Subject to the provisions of sub-section (2), a mortgagor, while lawfully in possession of the mortgaged property, shall have power to make leases thereof which shall be binding on the mortgagee. 

(2) (a) Every such lease shall be such as would be made in the ordinary course of management of the property concerned, and in accordance with any local law, custom or usage. 

(b) Every such lease shall reserve the best rent that can reasonably be obtained, and no premium shall be paid or promised and no rent shall be payable in advance. 

(c) No such lease shall contain a covenant for renewal. (d) Every such lease shall take effect from a date not later than six months from the date on which it is made. 

(e) In the case of a lease of buildings, whether leased it or without the land on which they stand, the duration of the lease shall in no case exceed three years, and the lease shall contain a covenant for payment of the rent and a condition of re-entry on the rent not being paid within a time therein specified. 

(3) The provisions of sub-section (1) apply only if and as far as a contrary intention is not expressed in the mortgage-deed; and the provisions of sub-section (2) may be varied or extended by the mortgage-deed and, as so varied and extended, shall, as far as may be, operate in like manner and with all like incidents, effects and consequences, as if such variations or extensions were contained in that sub-section.

धारा 65a Transfer of property Act 

सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम  

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Transfer of property Act

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