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कंपनी अधिनियम धारा 62 | Section 62 of Companies Act in Hindi

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Section 62 of Companies Act in Hindi

आजके इस आर्टिकल में मैआपको ” शेयर पूंजी का आगे और जारी किया जाना |  Further issue of share capital | कंपनी अधिनियम धारा 62  | Section 62 of Companies Act in Hindi | कंपनी अधिनियम की धारा 62  के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

Section 62 of Companies Act in Hindi

[ Companies Act Sec. 62 in Hindi ] –

शेयर पूंजी का आगे और जारी किया जाना-

(1) जहां किसी समय, कोई कंपनी, जिसकी शेयर पूंजी है, शेयरों के निर्गमन ‘द्वारा अपनी अभिदाय पूंजी को बढ़ाने का प्रस्ताव करती है, वहां ऐसे शेयर निम्नलिखित को प्रस्थापित किए जाएंगे

(क) उन व्यक्तियों को, जो प्रस्थापना की तारीख को प्रस्थापना पत्र के परिचालन द्वारा उन शेयरों पर समादत्त शेयर पूंजी के, उन परिस्थितियों में यथा निकटतम अनुपात में कंपनी के साधारण शेयर धारक हैं, जो निम्नलिखित शर्तों के अधीन हैं, अर्थात् :

(i) प्रस्थापना, प्रस्थापित शेयरों की संख्या विनिर्दिष्ट करते हुए और प्रस्थापना की ऐसी तारीख से, जिसके भीतर, प्रस्थापना को यदि स्वीकार नहीं किया जाता है तो इंकार किया जाना समझा जाएगा, पंद्रह दिन से कम और तीस दिन से अनधिक समय को सीमित करते हुए, सूचना द्वारा, की जाएगी;

(ii) जब तक कि कंपनी के अनुच्छेद अन्यथा उपबंधित न करते हों, पूर्वोक्त प्रस्थापना में, उसको या किसी अन्य व्यक्ति के पक्ष में प्रस्थापित शेयरों का त्यजन करने के लिए संबद्ध व्यक्ति द्वारा प्रयोग किए जाने योग्य किसी अधिकार को सम्मिलित करना समझा जाएगा; और खंड (i) में निर्दिष्ट सूचना में इस अधिकार का एक कथन अंतर्विष्ट होगा;

(iii) पूर्वोक्त सूचना में विनिर्दिष्ट समय की समाप्ति के पश्चात् या उस व्यक्ति से जिसको ऐसी सूचना दी गई है, ऐसी पूर्व जानकारी की प्राप्ति पर कि उसने प्रस्थापित शेयरों को स्वीकार करने से इंकार किया है, तो निदेशक बोर्ड उनका, ऐसी रीति से जो शेयर धारकों और कंपनी के लिए अफायदाप्रद न हो, निपटारा कर सकेगा;

(ख) कर्मचारी स्टाक विकल्प की स्कीम के अधीन कर्मचारियों को, कंपनी द्वारा पारित विशेष संकल्प के अधीन रहते हुए और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो विहित की जाएं; या

(ग) किन्हीं व्यक्तियों को, यदि उसे किसी विशेष संकल्प द्वारा प्राधिकृत • किया गया है, चाहे वे व्यक्ति, खंड (क) या खंड (ख) में निर्दिष्ट व्यक्तियों में

सम्मिलित हों या न हों, या तो नकद या किसी प्रतिफल के लिए नकद से भिन्न, यदि ऐसे शेयरों का मूल्य, रजिस्ट्रीकृत मूल्यांकक की मूल्यांकन रिपोर्ट द्वारा ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए. जो विहित की जाएं, अवधारित किया गया है ।

(2) उपधारा (1) के खंड (क) के उपखंड (i) में निर्दिष्ट सूचना, निर्गमन को खोले जाने से पूर्व कम से कम तीन दिन पूर्व सभी विद्यमान शेयर धारकों को रजिस्ट्रीकृत डाक या स्पीड पोस्ट के माध्यम से या इलैक्ट्रानिक पद्धति द्वारा प्रेषित की जाएगी।

(3) इस धारा की कोई बात किसी पब्लिक कंपनी की अभिदाय पूंजी की वृद्धि को लागू नहीं होगी, जो ऐसे डिबेंचरों या ऋणों के कंपनी में शेयरों में संपरिवर्तन करने के लिए कंपनी द्वारा जारी किए गए डिबेंचरों या उठाए गए ऋणों से संलग्न निबंधनों के अनुसार किसी विकल्प के प्रयोग द्वारा हुई है :

परंतु ऐसे डिबेंचरों को जारी करने के निबंधनों या ऐसे ऋण के निबंधनों को, जिनमें ऐसा कोई विकल्प अंतर्विष्ट है, ऐसे डिबेंचरों के निर्गमन या ऋणों को उठाने से पूर्व कंपनी द्वारा साधारण अधिवेशन में पारित किसी विशेष संकल्प द्वारा अनुमोदित कर दिया गया है।

(4) उपधारा (3) में किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी कंपनी द्वारा किसी सरकार को कोई डिबेंचर जारी किए जाते हैं या ऋण अभिप्राप्त किया जाता है और यदि वह सरकार लोकहित में ऐसा करना आवश्यक समझती है, वहां वह आदेश द्वारा यह निदेश दे सकेगी कि ऐसे डिबेंचर या ऋण या उसके किसी भाग को, ऐसे डिबेंचर को जारी करने या ऐसे ऋणों को जुटाने के निबंधनों में ऐसे संपरिवर्तन के लिए किसी विकल्प का उपबंध करने वाले निबंधन के सम्मिलित न होने के बावजूद भी, ऐसे निबंधनों और शर्तों पर जो मामले की परिस्थितियों के अनुसार सरकार को युक्तियुक्त प्रतीत हों, कंपनी के शेयरों में संपरिवर्तित किया जा सकेगा:

परंतु जहां ऐसे परिवर्तन के निबंधन और शर्ते कंपनी को स्वीकार्य नहीं हैं, वहां वह उस आदेश की संसूचना की तारीख से साठ दिन के भीतर अधिकरण को अपील कर सकेगी, जो कंपनी और सरकार को सुनने के पश्चात् ऐसा आदेश पारित करेगा, जो वह ठीक समझे ।

(5) सरकार उपधारा (4) के अधीन संपरिवर्तन के निबंधनों और शर्तों का अवधारण करने में, यथास्थिति, कंपनी की वित्तीय स्थिति, डिबेंचरों या ऋणों को जारी करने के निबंधन, ऐसे डिबेंचरों या ऋणों पर संदेय ब्याज की दर तथा ऐसे अन्य विषयों को सम्यक रूप से ध्यान में रखेगी, जो वह आवश्यक समझे ।

(6) जहां सरकार ने, उपधारा (4) के अधीन किए गए आदेश द्वारा यह निदेश दिया है कि कोई डिबेंचर या ऋण या उसका कोई भाग कंपनी के शेयरों में संपरिवर्तित किया जाएगा और जहां उपधारा (4) के अधीन अधिकरण में कोई अपील नहीं की गई है या जहां ऐसी अपील खारिज की जा चुकी है, वहां ऐसी कंपनी का ज्ञापन, जहां ऐसा आदेश कंपनी की प्राधिकृत शेयर पूंजी की वृद्धि पर प्रभाव डालता है, परिवर्तित हो जाएगा और उस कंपनी की प्राधिकृत शेयर पूंजी की रकम में शेयरों के मूल्य की रकम के बराबर, जिनमें ऐसे डिबेंचर या ऋण या उसके भाग को संपरिवर्तित किया गया है, वृद्धि हो जाएगी।

कंपनी अधिनियम धारा 62

[ Companies Act Section 62 in English ] –

Further issue of share capital”–

(1) Where at any time, a company having a share capital  proposes to increase its subscribed capital by the issue of further shares, such shares shall be offered— 

(a) to persons who, at the date of the offer, are holders of equity shares of the company in  proportion, as nearly as circumstances admit, to the paid-up share capital on those shares by sending a  letter of offer subject to the following conditions, namely:— 

(i) the offer shall be made by notice specifying the number of shares offered and limiting a  time not being less than fifteen days and not exceeding thirty days from the date of the offer  within which the offer, if not accepted, shall be deemed to have been declined; 

(ii) unless the articles of the company otherwise provide, the offer aforesaid shall be deemed  to include a right exercisable by the person concerned to renounce the shares offered to him or  any of them in favour of any other person; and the notice referred to in clause (i) shall contain a  statement of this right; 

(iii) after the expiry of the time specified in the notice aforesaid, or on receipt of earlier  intimation from the person to whom such notice is given that he declines to accept the shares  offered, the Board of Directors may dispose of them in such manner which is not dis advantageous to the shareholders and the company;

(b) to employees under a scheme of employees‘ stock option, subject to special resolution passed  by company and subject to such conditions as may be prescribed; or 

(c) to any persons, if it is authorised by a special resolution, whether or not those persons include  the persons referred to in clause (a) or clause (b), either for cash or for a consideration other than  cash, if the price of such shares is determined by the valuation report of a registered valuer subject to  such conditions as may be prescribed. 

(2) The notice referred to in sub-clause (i) of clause (a) of sub-section (1) shall be despatched through  registered post or speed post or through electronic mode to all the existing shareholders at least three days  before the opening of the issue. 

(3) Nothing in this section shall apply to the increase of the subscribed capital of a company caused  by the exercise of an option as a term attached to the debentures issued or loan raised by the company to  convert such debentures or loans into shares in the company: 

Provided that the terms of issue of such debentures or loan containing such an option have been  approved before the issue of such debentures or the raising of loan by a special resolution passed by the  company in general meeting. 

(4) Notwithstanding anything contained in sub-section (3), where any debentures have been issued, or  loan has been obtained from any Government by a company, and if that Government considers it  necessary in the public interest so to do, it may, by order, direct that such debentures or loans or any part  thereof shall be converted into shares in the company on such terms and conditions as appear to the  Government to be reasonable in the circumstances of the case even if terms of the issue of such  debentures or the raising of such loans do not include a term for providing for an option for such  conversion: 

Provided that where the terms and conditions of such conversion are not acceptable to the company, it  may, within sixty days from the date of communication of such order, appeal to the Tribunal which shall  after hearing the company and the Government pass such order as it deems fit. 

(5) In determining the terms and conditions of conversion under sub-section (4), the Government  shall have due regard to the financial position of the company, the terms of issue of debentures or loans,  as the case may be, the rate of interest payable on such debentures or loans and such other matters as it  may consider necessary. 

(6) Where the Government has, by an order made under sub-section (4), directed that any debenture  or loan or any part thereof shall be converted into shares in a company and where no appeal has been  preferred to the Tribunal under sub-section (4) or where such appeal has been dismissed, the  memorandum of such company shall, where such order has the effect of increasing the authorised share  capital of the company, stand altered and the authorised share capital of such company shall stand  increased by an amount equal to the amount of the value of shares which such debentures or loans or part  thereof has been converted into. 

कंपनी अधिनियम धारा 62


कंपनी अधिनियम 2013  

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