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धारा 6 साक्ष्य अधिनियम | Section 6 of Indian Evidence Act Hindi

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Section 6 of Indian Evidence Act

आज के इस आर्टिकल में मै आपको “एक ही संव्यवहार के भाग होने वाले तथ्यों की सुसंगति | साक्ष्य अधिनियम की धारा 6 क्या है | Section 6 Indian Evidence Act in hindi | Section 6 of Indian Evidence Act | धारा 6 साक्ष्य अधिनियम | Relevancy of facts forming part of same transaction के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

साक्ष्य अधिनियम की धारा 6 |  Section 6 of Indian Evidence Act | Section 6 Indian Evidence Act in Hindi

[ Indian Evidence Act Section 6 in Hindi ] –

“एक ही संव्यवहार के भाग होने वाले तथ्यों की सुसंगति “

जो तथ्य विवाद्य न होते हुए भी किसी विवाद्यक तथ्य से उस प्रकार संसक्त है कि वे एक ही संन्यवहार के भाग हैं, वे तथ्य सुसंगत हैं, चाहे वे उसी समय और स्थान पर या विभिन्न समयों और स्थानों पर घटित हुए हों।

दृष्टात

(क) ख को पीट कर उसकी हत्या करने का क अभियुक्त है। क या ख या पास खड़े लोगों द्वारा जो कुछ भी पिटाई के समय या उससे इतने अल्पकाल पूर्व या पश्चात् कहा या किया गया था कि वह उसी संत्र्यवहार का भाग बन गया है, वह सुसंगत तथ्य है।

(ख) क एक सशस्त्र विप्लव में भाग लेकर, जिसमें सम्पत्ति नष्ट की जाती है, फौजों पर आक्रमण किया जाता है और जेलें तोड़ कर खोली जाती हैं, ‘[भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करने का अभियुक्त है । इन तथ्यों का घटित होना साधारण संव्यवहार का भाग होने के नाते सुसंगत है, चाहे क उन सभी में उपस्थित न रहा हो।

(ग) क एक पत्र में, जो एक पत्र-व्यवहार का भाग है, अन्तर्विष्ट अपमान-लेख के लिए ख पर वाद लाता है। जिस विषय में अपमान-लेख उद्भूत हुआ है, उससे सम्बन्ध रखने वाली पक्षकारों के बीच जितनी चिट्ठियां उस पत्र-त्र्यवहार का भाग हैं जिसमें वह अन्तर्विष्ट, वे सुसंगत है तथ्य हैं, चाहे उनमें वह अपमान-लेख स्वयं अन्तर्विष्ट न हो।

(घ) प्रश्न यह है कि क्या ख से आदिष्ट अमुक माल क को परिदत्त किया गया था। वह माल, अनुक्रमशः कई मध्यवर्ती व्यक्तियों को परिदत्त किया गया था। हर एक परिदान सुसंगत तथ्य है।

धारा 6 Indian Evidence Act

[ Indian Evidence Act Sec. 6 in English ] –

Relevancy of facts forming part of same transaction”–

Facts which, though not in issue, are so connected with a fact in issue as to form part of the same transaction, are relevant, whether they occurred at the same time and place or at different times and places. 

Illustrations 

(a) A is accused of the murder of B by beating him. Whatever was said or done by A or B or the by-standers at the beating, or so shortly before or after it as to form part of the transaction, is a relevant fact. 

(b) A is accused of waging war against the 1[Government of India] by taking part in an armed insurrection in which property is destroyed, troops are attacked and gaols are broken open. The occurrence of these facts is relevant, as forming part of the general transaction, though A may not have been present at all of them. 

(c) A sues B for a libel contained in a letter forming part of a correspondence. Letters between the parties relating to the subject out of which the libel arose, and forming part of the correspondence in which it is contained, are relevant facts, though they do not contain the libel itself. 

(d) The question is, whether certain goods ordered from B were delivered to A. The goods were delivered to several intermediate persons successively. Each delivery is a relevant fact. 

धारा 6 Indian Evidence Act 

साक्ष्य अधिनियम  

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