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कंपनी अधिनियम धारा 58 | Section 58 of Companies Act in Hindi

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Section 58 of Companies Act in Hindi

आजके इस आर्टिकल में मैआपको ” रजिस्ट्रीकरण से इंकार करना और इंकार किये जाने के विरुद्ध अपील | Refusal of registration and appeal against refusal | कंपनी अधिनियम धारा 58  | Section 58 of Companies Act in Hindi | कंपनी अधिनियम की धारा 58  के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

Section 58 of Companies Act in Hindi

[ Companies Act Sec. 58 in Hindi ] –

रजिस्ट्रीकरण से इंकार करना और इंकार किये जाने के विरुद्ध अपील-

(1) यदि शेयरों द्वारा परिसीमित कोई प्राइवेट कंपनी चाहे अपने अनुच्छेदों के अधीन या अन्यथा कंपनी की किसी शक्ति के अनुसरण में विधि के प्रचालन द्वारा कंपनी में किसी सदस्य की किसी प्रतिभूति या हित के अंतरण या पारेषण को रजिस्टर करने से इन्कार करती है तो वह उस तारीख से एक मास के भीतर, जिसको, यथास्थिति, अंतरण की लिखत या ऐसे पारेषण की सूचना कंपनी को परिदत्त की गई थी, ऐसे इंकार किए जाने के कारण देते हुए इंकार किए जाने की सूचना, यथास्थिति, अंतरक और अंतरिती या ऐसे पारेषण की सूचना देने वाले व्यक्ति को भेजेगी ।

(2) उपधारा (1) पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, किसी पब्लिक कंपनी में किसी सदस्य की प्रतिभूतियां या अन्य हित स्वच्छंद रूप से अंतरणीय होंगे:

परंतु प्रतिभूतियों के अंतरण की बाबत एक या अधिक व्यक्तियों के बीच कोई संविदा या ठहराव, संविदा के रूप में प्रवर्तनीय होगा।

(3) अंतरिती, सूचना की प्राप्ति से एक मास के भीतर या जहां कंपनी द्वारा कोई सूचना नहीं भेजी गई है, उस तारीख से चार मास के भीतर जिसको, यथास्थिति, अंतरण की लिखत या पारेषण की सूचना कंपनी को परिदत्त की गई थी, इंकार किए जाने के विरुद्ध अधिकरण को अपील कर सकेगा ।

(4) यदि कोई पब्लिक कंपनी, पर्याप्त कारण के बिना, उस तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर जिसको, यथास्थिति, अंतरण की लिखत या पारेषण की सूचना कंपनी को परिदत्त की गई थी, प्रतिभूतियों का अंतरण रजिस्टर करने से इंकार करती है तो अंतरिती, यथास्थिति, ऐसे इंकार किए जाने के साठ दिन की अवधि के भीतर या जहां कंपनी से कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है, वहां अंतरण की लिखत या पारेषण की सूचना के परिदान के नब्बे दिन के भीतर, अधिकरण को अपील कर सकेगा ।

(5) अधिकरण, उपधारा (3) या उपधारा (4) के अधीन की गई किसी अपील के संबंध में कार्रवाई करते समय, पक्षकारों की सुनवाई करने के पश्चात्, या तो अपील को खारिज कर सकेगा या आदेश द्वारा,

(क) यह निदेश दे सकेगा कि अंतरण या पारेषण कंपनी द्वारा रजिस्ट्रीकृत किया जाएगा और कंपनी, आदेश की प्राप्ति के दस दिन के भीतर उस आदेश का पालन करेगी; या

(ख) रजिस्टर का परिशोधन करने का निदेश देगा और कंपनी को यह भी निदेश देगा कि किसी व्यथित पक्षकार को हुई किसी नुकसानी, यदि कोई हो, का संदाय करे ।

(6) यदि कोई व्यक्ति इस धारा के अधीन अधिकरण के आदेश का उल्लंघन करेगा, तो वह ऐसी अवधि के कारावास से, जो एक वर्ष से कम की नहीं होगी किंतु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो एक लाख रुपए से कम का नहीं होगा, किंतु जो पांच लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।

कंपनी अधिनियम धारा 58

[ Companies Act Section 58 in English ] –

Refusal of registration and appeal against refusal”–

(1) If a private company limited by shares  refuses, whether in pursuance of any power of the company under its articles or otherwise, to register the  transfer of, or the transmission by operation of law of the right to, any securities or interest of a member  in the company, it shall within a period of thirty days from the date on which the instrument of transfer, or 

the intimation of such transmission, as the case may be, was delivered to the company, send notice of the  refusal to the transferor and the transferee or to the person giving intimation of such transmission, as the  case may be, giving reasons for such refusal. 

(2) Without prejudice to sub-section (1), the securities or other interest of any member in a public  company shall be freely transferable: 

Provided that any contract or arrangement between two or more persons in respect of transfer of  securities shall be enforceable as a contract. 

(3) The transferee may appeal to the Tribunal against the refusal within a period of thirty days from  the date of receipt of the notice or in case no notice has been sent by the company, within a period of sixty  days from the date on which the instrument of transfer or the intimation of transmission, as the case may  be, was delivered to the company. 

(4) If a public company without sufficient cause refuses to register the transfer of securities within a  period of thirty days from the date on which the instrument of transfer or the intimation of transmission,  as the case may be, is delivered to the company, the transferee may, within a period of sixty days of such  refusal or where no intimation has been received from the company, within ninety days of the delivery of  the instrument of transfer or intimation of transmission, appeal to the Tribunal. 

(5) The Tribunal, while dealing with an appeal made under sub-section (3) or sub-section (4), may,  after hearing the parties, either dismiss the appeal, or by order— 

(a) direct that the transfer or transmission shall be registered by the company and the company  shall comply with such order within a period of ten days of the receipt of the order; or 

(b) direct rectification of the register and also direct the company to pay damages, if any,  sustained by any party aggrieved. 

(6) If a person contravenes the order of the Tribunal under this section, he shall be punishable with  imprisonment for a term which shall not be less than one year but which may extend to three years and  with fine which shall not be less than one lakh rupees but which may extend to five lakh rupees.

कंपनी अधिनियम धारा 58


कंपनी अधिनियम 2013  

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