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कंपनी अधिनियम धारा 46 | Section 46 of Companies Act in Hindi

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Section 46 of Companies Act in Hindi

आजके इस आर्टिकल में मैआपको ” शेयर प्रमाणपत्र | कंपनी अधिनियम धारा 46  | Section 46 of Companies Act in Hindi | कंपनी अधिनियम की धारा 46 | के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

Section 46 of Companies Act in Hindi

[ Companies Act Sec. 46 in Hindi ] –

शेयर प्रमाणपत्र

(1) किसी व्यक्ति द्वारा धारित शेयरों को विनिर्दिष्ट करने वाला कंपनी की सामान्य मुद्रा के अधीन जारी प्रमाणपत्र, ऐसे शेयरों पर व्यक्ति के हक का प्रथमदृष्ट्या साक्ष्य होगा ।

(2) शेयर प्रमाणपत्र की दूसरी प्रति उस दशा में जारी की जा सकेगी, यदि

(क) यह साबित कर दिया जाता है कि ऐसा प्रमाणपत्र खो गया है या नष्ट हो गया है; या

(ख) ऐसा प्रमाणपत्र विरूपित या विकृत हो गया है या फट गया है और कंपनी को अभ्यर्पित कर दिया गया है ।

(3) कंपनी के अनुच्छेदों में किसी बात के होते हुए भी, कोई प्रमाणपत्र या उसकी दूसरी प्रति जारी करने की रीति, ऐसे प्रमाणपत्र का प्ररूप, सदस्यों के रजिस्टर में प्रविष्ट की जाने वाली विशिष्टियां और अन्य विषय वे होंगे, जो विहित किए जाएं ।

(4) जहां कोई शेयर निक्षेपागार प्ररूप में धारित किया जाता है, वहां निक्षेपागार का अभिलेख फायदाग्राही स्वामी के हित का प्रथमदृष्ट्या साक्ष्य है ।

(5) यदि कोई कंपनी प्रवंचना करने के आशय से शेयर प्रमाणपत्र की दूसरी प्रति जारी करती है तो कंपनी जुर्माने से, जो प्रमाणपत्र की दूसरी प्रति जारी करने में अंतर्वलित शेयरों के अंकित मूल्य के पांच गुने से कम का नहीं होगा, किंतु जो ऐसे शेयरों के अंकित मूल्य के दस गुने या दस करोड़ रुपए, जो भी अधिक हो, तक का हो सकेगा, दंडनीय होगी

और कंपनी का प्रत्येक ऐसा अधिकारी, जो व्यतिक्रमी है, धारा 447 के अधीन कार्रवाई के लिए दायी होगा ।

कंपनी अधिनियम धारा 46

[ Companies Act Section 46  in English ] –

Certificate of shares”–

(1) A certificate, 1[issued under the common seal, if any, of the company or signed by two directors or by a director and the Company Secretary, wherever the company has  appointed a Company Secretary], specifying the shares held by any person, shall be prima facie evidence  of the title of the person to such shares. 

(2) A duplicate certificate of shares may be issued, if such certificate — 

(a) is proved to have been lost or destroyed; or 

(b) has been defaced, mutilated or torn and is surrendered to the company. 

(3) Notwithstanding anything contained in the articles of a company, the manner of issue of a  certificate of shares or the duplicate thereof, the form of such certificate, the particulars to be entered in  the register of members and other matters shall be such as may be prescribed. 

(4) Where a share is held in depository form, the record of the depository is the prima facie evidence  of the interest of the beneficial owner. 

(5) If a company with intent to defraud issues a duplicate certificate of shares, the company shall be  punishable with fine which shall not be less than five times the face value of the shares involved in the  issue of the duplicate certificate but which may extend to ten times the face value of such shares or rupees  ten crores whichever is higher and every officer of the company who is in default shall be liable for action  under section 447. 

कंपनी अधिनियम धारा 46


कंपनी अधिनियम 2013  

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