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धारा 41 साक्ष्य अधिनियम | Section 41 of Indian Evidence Act Hindi

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Section 41 of Indian Evidence Act

आज के इस आर्टिकल में मै आपको “प्रोबेट इत्यादि विषयक अधिकारिता के किन्हीं निर्णयों की सुसंगति | साक्ष्य अधिनियम की धारा 41 क्या है | Section 41 Indian Evidence Act in Hindi | Section 41 of Indian Evidence Act | धारा 41 साक्ष्य अधिनियम | Relevancy of certain judgments in probate, etc., jurisdiction  के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

साक्ष्य अधिनियम की धारा 41 |  Section 41 of Indian Evidence Act | Section 41 Indian Evidence Act in Hindi

[ Indian Evidence Act Section 41 in Hindi ] –

” प्रोबेट इत्यादि विषयक अधिकारिता के किन्हीं निर्णयों की सुसंगति “

किसी सक्षम न्यायालय के प्रोबेट-विषयक, विवाहविषयक, नावधिकरण-विषयक या दिवाला-विषयक अधिकारिता के प्रयोग में दिया हुआ अन्तिम निर्णय, आदेश या डिक्री, जो किसी व्यक्ति को, या से, कोई विधिक हैसियत प्रदान करती या ले लेती है या जो सर्वतः न कि किसी विनिर्दिष्ट व्यक्ति के विरुद्ध किसी व्यक्ति को ऐसी किसी हैसियत का हकदार या किसी विनिर्दिष्ट चीज का हकदार घोषित करती है, तब सुसंगत हैं जब कि किसी ऐसी विधिक हैसियत, या किसी ऐसी चीज पर किसी ऐसे व्यक्ति के हक का अस्तित्व सुसंगत है। ऐसा निर्णय, आदेश या डिक्री इस बात का निश्चायक सबूत है

कि कोई विधिक हैसियत, जो वह प्रदत्त करती है, उस समय प्रोद्भूत हुई जब ऐसा निर्णय, आदेश या डिक्री परिवर्तन में आई,

कि कोई विधिक हैसियत, जिसके लिए वह किसी व्यक्ति को हकदार घोषित करती है उस व्यक्ति को उस समय प्रोद्भूत हुई जो समय ऐसे निर्णय, [आदेश या डिक्री] द्वारा घोषित है कि उस समय यह उस व्यक्ति को प्रोद्भूत हुई,

कि कोई विधिक हैसियत, जिसे वह किसी ऐसे व्यक्ति से ले लेती है उस समय खत्म हुई जो समय ऐसे निर्णय, [आदेश या डिक्री] द्वारा घोषित है कि उस समय से वह हैसियत खत्म हो गई थी या खत्म हो जानी चाहिए,

और कि कोई चीज जिसके लिए वह किसी व्यक्ति को ऐसा हकदार घोषित करती है उस व्यक्ति की उस समय सम्पत्ति थी जो समय ऐसे निर्णय, [आदेश या डिक्री] द्वारा घोषित है कि उस समय से बह चीज उसकी सम्पत्ति थी या होनी चाहिए।

धारा 41 Indian Evidence Act

[ Indian Evidence Act Sec. 41 in English ] –

“Relevancy of certain judgments in probate, etc., jurisdiction”–

 A final judgment, order or decree of a competent Court, in the exercise of probate, matrimonial, admiralty or insolvency jurisdiction, which confers upon or takes away from any person any legal character, or which declares any person to be entitled to any such character, or to be entitled to any specific thing, not as against any specified person but absolutely, is relevant when the existence of any such legal character, or the title of any such person to any such thing, is relevant. 

Such judgment, order or decree is conclusive proof –– 

that any legal character which it confers accrued at the time when such judgment, order or decree came into operation; 

that any legal character, to which it declares any such person to be entitled, accrued to that person at the time when such judgment 1[order or decree] declares it to have accrued to that person; 

that any legal character which it takes away from any such person ceased at the time from which such judgment, 1[order or decree] declared that it had ceased or should cease; 

and that anything to which it declares any person to be so entitled was the property of that person at the time from which such judgment, 1[order or decree] declares that it had been or should be his property. 

धारा 41 Indian Evidence Act 

साक्ष्य अधिनियम  

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