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धारा 4 बाल विवाह प्रतिषेध | Section 4 of Child Marriage Act Hindi

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Section 4 of Child Marriage Act

आज के इस आर्टिकल में मै आपको “बाल-विवाह के बंधन में आने वाली महिला पक्षकार के भरण-पोषण और निवास के लिए उपबंध | बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम की धारा 4 क्या है | Section 4 Child Marriage Act in Hindi | Section 4 of Child Marriage Act | धारा 4 बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम | Provision for maintenance and residence to female contracting party to child marriage के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम की धारा 4 |  Section 4 of Child Marriage Act | Section 4 Child Marriage Act in Hindi

[ Child Marriage Act Section 4 in Hindi ] –

“बाल-विवाह के बंधन में आने वाली महिला पक्षकार के भरण-पोषण और निवास के लिए उपबंध”

(1) धारा 3 के अधीन डिक्री प्रदान करते समय, जिला न्यायालय बाल-विवाह के बंधन में आने वाले पुरुष पक्षकार को और यदि ऐसे विवाह के बंधन में आने वाला पुरुष पक्षकार अवयस्क है, तो उसके माता-पिता या सरंक्षक को, विवाह के बंधन में आने वाली महिला पक्षकार को, उसके पुनर्विवाह तक, भरण-पोषण का संदाय करने के लिए निदेश देते हुए अंतरिम या अंतिम आदेश भी कर सकेगा।

(2) संदेय भरण-पोषण की मात्रा का अवधारण जिला न्यायालय द्वारा, बालक की आवश्यकताओं, अपने विवाह के दौरान ऐसे बालक द्वारा भोगी गई जीवन शैली और संदाय करने वाले पक्षकार की आय के साधनों को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा।

(3) भरण-पोषण की रकम का मासिक या एकमुश्त राशि के रूप में संदाय करने का निदेश दिया जा सकेगा।

(4) यदि धारा 3 के अधीन अर्जी देने वाला पक्षकार विवाह के बंधन में आने वाली महिला पक्षकार है तो जिला न्यायालय उसके पुनर्विवाह तक उसके निवास के लिए उपयुक्त आदेश भी कर सकेगा।

धारा 4 Child Marriage Act

[ Child Marriage Act Sec. 4 in English ] –

Provision for maintenance and residence to female contracting party to child marriage”–

(1) While granting a decree under section 3, the district court may also make an interim or final order directing the male contracting party to the child marriage, and in case the male contracting party to such marriage is a minor, his parent or guardian to pay maintenance to the female contracting party to the marriage until her remarriage. 

(2) The quantum of maintenance payable shall be determined by the district court having regard to the needs of the child, the lifestyle enjoyed by such child during her marriage and the means of income of the paying party. 

(3) The amount of maintenance may be directed to be paid monthly or in lump sum. 

(4) In case the party making the petition under section 3 is the female contracting party, the district court may also make a suitable order as to her residence until her remarriage. 

धारा 4 Child Marriage Act


बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम  

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Child Marriage Act

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Section 67A of Indian Evidence Act Section 1 of Child Labour Act
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