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धारा 362 CrPC | Section 362 CrPC in Hindi | CrPC Section 362

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आज के इस आर्टिकल में मै आपको “न्यायालय का अपने निर्णय में परिवर्तन न करना | दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 362 क्या है | section 362 CrPC in Hindi | Section 362 in The Code Of Criminal Procedure | CrPC Section 362 | Court not to after judgement के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 362 |  Section 362 in The Code Of Criminal Procedure

[ CrPC Sec. 362 in Hindi ] –

न्यायालय का अपने निर्णय में परिवर्तन न करना—

इस संहिता या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा जैसा उपबंधित है उसके सिवाय कोई न्यायालय जब उसने किसी मामले को निपटाने के लिए अपने निर्णय या अंतिम आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं तब लिपिकीय या गणितीय भूल को ठीक करने के सिवाय उसमें कोई परिवर्तन नहीं करेगा या उसका पुनर्विलोकन नहीं करेगा।

धारा 362 CrPC

[ CrPC Sec. 362 in English ] –

“Court not to after judgement”–

Save as otherwise provided by this Code or by any other law for the time being in force, no Court, when it has signed its judgment or final order disposing of a case, shall alter or review the same except to correct a clerical or arithmetical error.

धारा 362 CrPC

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