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धारा 334 CrPC | Section 334 CrPC in Hindi | CrPC Section 334

2001
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आज के इस आर्टिकल में मै आपको “ चित्त-विकृति के आधार पर दोष-मुक्ति का निर्णय | दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 334 क्या है | section 334 CrPC in Hindi | Section 334 in The Code Of Criminal Procedure | CrPC Section 334 | Judgment of acquittal on ground of unsoundness of mindके विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 334 |  Section 334 in The Code Of Criminal Procedure

[ CrPC Sec. 334 in Hindi ] –

चित्त-विकृति के आधार पर दोष-मुक्ति का निर्णय-

जब कभी कोई व्यक्ति इस आधार पर दोषमुक्त किया जाता है कि उस समय जबकि यह अभिकथित है कि उसने अपराध किया वह चित्त-विकृति के कारण उस कार्य का स्वरूप, जिसका अपराध होना अभिकथित है, या यह कि वह दोषपूर्ण या विधि के प्रतिकूल है जानने में असमर्थ था, तब निष्कर्ष में यह विनिर्दिष्टतः कथित होगा कि उसने वह् कार्य किया या नहीं किया।

धारा 334 CrPC

[ CrPC Sec. 334 in English ] –

“Judgment of acquittal on ground of unsoundness of mind”–

Whenever any person is acquitted upon the ground that, at the time at which he is alleged to have committed an offence, he was, by reason of unsoundness of mind, incapable of knowing the nature of the act alleged as constituting the offence, or that it was wrong or contrary to law, the finding shall state specifically whether he committed the act or not.

धारा 334 CrPC

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