Home LAW धारा 330 CrPC | Section 330 CrPC in Hindi | CrPC Section...

धारा 330 CrPC | Section 330 CrPC in Hindi | CrPC Section 330

1246
0
section 330 CrPC in Hindi

आज के इस आर्टिकल में मै आपको “अन्वेषण या विचारण के लंबित रहने तक विकृतचित्त व्यक्ति का छोड़ा जाना | दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 330 क्या है | section 330 CrPC in Hindi | Section 330 in The Code Of Criminal Procedure | CrPC Section 330 | Release of person of unsound mind pending investigation or trial के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 330 |  Section 330 in The Code Of Criminal Procedure

[ CrPC Sec. 330 in Hindi ] –

अन्वेषण या विचारण के लंबित रहने तक विकृतचित्त व्यक्ति का छोड़ा जाना—

(1) जब कभी कोई व्यक्ति धारा 328 या धारा 329 के अधीन चित्तविकृति या मानसिक मंदता के कारण अपनी प्रतिरक्षा करने में असमर्थ पाया जाता है तब, यथास्थिति, मजिस्ट्रेट या न्यायालय, चाहे मामला ऐसा हो जिसमें जमानत ली जा सकती है या ऐसा न हो, ऐसे व्यक्ति को जमानत पर छोड़े जाने का आदेश देगा:

परंतु अभियुक्त ऐसी चित्तविकृति या मानसिक मंदता से ग्रस्त है जो अंतरंग रोगी उपचार के लिए समादेशित नहीं करती हो और

कोई मित्र या नातेदार किसी निकटतम चिकित्सा सुविधा से नियमित बाह्य रोगी मनि चिकित्सा उपचार कराने और उसे अपने आपको या किसी अन्य व्यक्ति को क्षति पहुंचाने से निवारित रखने का वचन देता है।

(2) यदि मामला ऐसा है जिसमें, यथास्थिति, मजिस्ट्रेट या न्यायालय की राय में, जमानत नहीं दी जा सकतीया यदि कोई समुचित वचनबंध नहीं दिया गया है तो वह अभियुक्त को ऐसे स्थान में रखे जाने का आदेश देगा, जहां नियमित मनि चिकित्सा उपचार कराया जा सकता है और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट राज्य सरकार को देगा :

परंतु पागलखाने में अभियुक्त को निरुद्ध किए जाने के लिए कोई आदेश राज्य सरकार द्वारा मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 1987 (1987 का 14) के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार ही किया जाएगा, अन्यथा नहीं।

(3) जब कभी कोई व्यक्ति धारा 328 या धारा 329 के अधीन चित्त विकृति या मानसिक मंदता के कारण अपनी प्रतिरक्षा करने में असमर्थ पाया जाता है तब, यथास्थिति, मजिस्ट्रेट या न्यायालय कारित किए गए कार्य की प्रकृति और चित्तविकृति या मानसिक मंदता की सीमा को ध्यान में रखते हुए आगे यह अवधारित करेगा कि क्या अभियुक्त को छोड़ने का आदेश दिया जा सकता है: परंतु

(क) यदि चिकत्सा राय या किसी विशेषज्ञ की राय के आधार पर, यथास्थिति, मजिस्ट्रेट या न्यायालय धारा 328 या धारा 329 के अधीन उपबंधित रीति में अभियुक्त के उन्मोचन का आदेश करने का विनिश्चय करता है तो ऐसे छोड़े जाने का आदेश किया जा सकेगा, यदि पर्याप्त प्रतिभूति दी जाती है कि अभियुक्त को अपने आपको या किसी अन्य व्यक्ति को क्षति पहुंचाने से निवारित किया जाएगा:

(ख) यदि, यथास्थिति, मजिस्ट्रेट या न्यायालय की यह राय है कि अभियुक्त के उन्मोचन का आदेश नहीं दिया जा सकता है तो अभियुक्त को चित्त विकृति या मानसिक मंदता के व्यक्तियों के लिए आवासीय सुविधा में अंतरित करने का आदेश दिया जा सकता है जहां अभियुक्त की देखभाल की जा सके और समुचित शिक्षा और प्रशिक्षण दिया जा सके।]

धारा 330 CrPC

[ CrPC Sec. 330 in English ] –

“Release of person of unsound mind pending investigation or trial ”–

  1. Whenever a person if found under section 328 or section 329 to be incapable of entering defence by reason of unsoundness of mind or mental retardation, the Magistrate or Court, as the case may be shall, whether the case is one in which bail may be taken or not, order release of such person on bail:Provided that the accused is suffering from unsoundness of mind or mental retardation which does not mandate in-patient treatment and a friend or relative undertakes to obtain regular outpatient psychiatric treatment from the nearest medical facility and to prevent from doing injury to himself or to any other person.
  2. If the case is one in which, in the opinion of the Magistrate or Court, as the case may be, bail cannot be granted or if an appropriate undertaking is not given, he or it shall order the accused to be kept in such a place where regular psychiatric treatment can be provided, and shall report the action taken to the State Government:Provided that no order for the detention of the accused in a lunatic asylum shall be made
    otherwise than in accordance with such rules as the State Government may have made under the Mental Health Act, 1987.
  3. Whenever a person is found under section 328 or section 329 to be incapable of entering
    defence by reason of unsoundness of mind or mental retardation, the Magistrate or Court, as the case may be, shall keeping in view the nature of the act committed and the extent of unsoundness of mind or mental retardation, further determine if the release of the accused can be ordered:Provided that—

    1. if on the basis of medical opinion or opinion of a specialist, the Magistrate or Court, as the case may be, decide to order discharge of the accused, as provided under section 328 or section 329, such release may be ordered, if sufficient security is given that the accused shall be prevented from doing injury to himself or to any other person;
    2. if the Magistrate or Court, as the case may be, is of opinion that discharge of the accused cannot be ordered, the transfer of the accused to a residential facility for persons of unsound mind or mental retardation may be ordered wherein the accused may be provided care and appropriate education and training.

धारा 330 CrPC

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here