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धारा 326 CrPC | Section 326 CrPC in Hindi | CrPC Section 326

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आज के इस आर्टिकल में मै आपको “भागत: एक न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट द्वारा और भागत: दूसरे न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट द्वारा अभिलिखित साक्ष्य पर दोषसिद्धि या सुपुर्दी | दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 326 क्या है | section 326 CrPC in Hindi | Section 326 in The Code Of Criminal Procedure | CrPC Section 326 | Conviction or commitment on evidence partly recorded by one Magistrate and partly by anotherके विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 326 |  Section 326 in The Code Of Criminal Procedure

[ CrPC Sec. 326 in Hindi ] –

भागत: एक न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट द्वारा और भागत: दूसरे न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट द्वारा अभिलिखित साक्ष्य पर दोषसिद्धि या सुपुर्दी–

(1) जब कभी किसी जांच या विचारण में साक्ष्य को पूर्णतः या भागतः सुनने और अभिलिखित करने के पश्चात् कोई अन्यायाधीश या मजिस्ट्रेट] उसमें अधिकारिता का प्रयोग नहीं कर सकता है और कोई अन्य न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट], जिसे ऐसी अधिकारिता है और जो उसका प्रयोग करता है, उसका उत्तरवर्ती हो जाता है, तो ऐसा उत्तरवर्ती न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट] अपने पूर्ववर्ती द्वारा ऐसे अभिलिखित या भागतः अपने पूर्ववर्ती द्वारा अभिलिखित और भागतः अपने द्वारा अभिलिखित साक्ष्य पर कार्य कर सकता है:

परन्तु यदि उत्तरवर्ती न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट] की यह राय है कि साक्षियों में से किसी की जिसका साक्ष्य पहले ही अभिलिखित किया जा चुका है, अतिरिक्त परीक्षा करना न्याय के हित में आवश्यक है तो वह किसी भी ऐसे साक्षी को पुनः समन कर सकता है और ऐसी अतिरिक्त परीक्षा, प्रतिपरीक्षा और पुनःपरीक्षा के, यदि कोई हो, जैसी वह अनुज्ञात करे, पश्चात् वह साक्षी उन्मोचित कर दिया जाएगा।

(2) जब कोई मामला एक न्यायाधीश से दूसरे न्यायाधीश को या एक मजिस्ट्रेट से दूसरे मजिस्ट्रेट को] इस संहिता के उपबंधों के अधीन अंतरित किया जाता है तब उपधारा (1) के अर्थ में पूर्वकथित मजिस्ट्रेट के बारे में समझा जाएगा कि वह उसमें अधिकारिता का प्रयोग नहीं कर सकता है और पश्चात्कथित मजिस्ट्रेट उसका उत्तरवर्ती हो गया है।

(3) इस धारा की कोई बात संक्षिप्त विचारणों को या उन मामलों को लागू नहीं होती हैं जिनमें कार्यवाहियां धारा 322 के अधीन रोक दी गई है या जिसमें कार्यवाहियां वरिष्ठ मजिस्ट्रेट को धारा 325 के अधीन भेज दी गई हैं।

धारा 326 CrPC

[ CrPC Sec. 326 in English ] –

“Conviction or commitment on evidence partly recorded by one Magistrate and partly by another ”–

(1) Whenever any 1 Judge or Magistrate], after having heard and recorded the whole or any part of the evidence in an inquiry or a trial, ceases to exercise jurisdiction therein and is succeeded by another 1 Judge or Magistrate] who has and who exercises such jurisdiction, the 1 Judge or Magistrate] so succeeding may act on the evidence so recorded by his predecessor, or partly recorded by his predecessor and partly recorded by himself:
Provided that if the succeeding 1 Judge or Magistrate] is of opinion that further examination of any of the witnesses whose evidence has already been recorded is necessary in the interests of justice, he may re- summon any such witness, and after such further examination, cross- examination and re- examination, if any, as he may permit, the witness shall be discharged.
(2) When a case is transferred under the provisions of this Code 2 [ from one Judge to another Judge or from one Magistrate to another Magistrate], the former shall be deemed to cease to exercise jurisdiction therein, and to be succeeded by the latter, within the meaning of sub- section (1).
(3) Nothing in this section applies to summary trials or to cases in which proceedings have been stayed under section 322 or in which proceedings have been submitted to a superior Magistrate under section 325.

धारा 326 CrPC

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