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धारा 27 CrPC | Section 27 CrPC in Hindi | CrPC Section 27

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आज के इस आर्टिकल में मै आपको “ किशोरों के मामलों में अधिकारिता | दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 27 क्या है | section 27 CrPC in Hindi | Section 27 in The Code Of Criminal Procedure | CrPC Section 27 | Jurisdiction in the case of juveniles के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 27 |  Section 27 in The Code Of Criminal Procedure

[ CrPC Sec. 27 in Hindi ] –

किशोरों के मामलों में अधिकारिता—

किसी ऐसे अपराध का विचारण, जो मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय नहीं है और जो ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया है, जिसकी आयु उस तारीख को, जब वह न्यायालय के समक्ष हाजिर हो या लाया जाए, सोलह वर्ष से कम है, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय द्वारा या किसी ऐसे न्यायालय द्वारा किया जा सकता है जिसे बालक अधिनियम, 1960 (1960 का 60) या किशोर अपराधियों के उपचार, प्रशिक्षण और पुनर्वास के लिए उपबंध करने वाली तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन विशेष रूप से सशक्त किया गया है।

धारा 27 CrPC

[ CrPC Sec. 27 in English ] –

“ Jurisdiction in the case of juveniles ”–

Any offence not punishable with death or imprisonment for life, committed by any person who at the date when he appears or is brought before the court is under the age of sixteen years, may be tried by the court of’ a Chief- Judicial Magistrate, or by any court specially empowered under the Children Act, 1960 (60 of 1960), or any other law for the time being in force providing for the treatment, training and rehabilitation of youthful offenders.

धारा 27 CrPC

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