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धारा 265b CrPC | Section 265b CrPC in Hindi | CrPC Section 265b

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section 265b CrPC in Hindi

आज के इस आर्टिकल में मै आपको “सौदा अभिवाक् के लिए आवेदन | दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 265b क्या है | section 265b CrPC in Hindi | Section 265b in The Code Of Criminal Procedure | CrPC Section 265b | Application for plea bargaining के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 265b |  Section 265b in The Code Of Criminal Procedure

[ CrPC Sec. 265b in Hindi ] –

सौदा अभिवाक् के लिए आवेदन–

(1) किसी अपराध का अभियुक्त व्यक्ति, सौदा अभिवाक् के लिए उस न्यायालय में आवेदन फाइल कर सकेगा जिसमें ऐसे अपराध का विचारण लंबित है।

(2) उपधारा (1) के अधीन आवेदन में उस मामले का संक्षिप्त वर्णन होगा जिसके संबंध में आवेदन फाइल किया गया है, और उसमें उस अपराध का वर्णन भी होगा जिससे वह मामला संबंधित है तथा उसके साथ अभियुक्त का शपथ पत्र होगा जिसमें यह कथित होगा कि उसने विधि के अधीन उस अपराध के लिए उपबंधित दंड की प्रकृति और सीमा को समझने के पश्चात् अपने मामले में स्वेच्छा से सौदा अभिवाक् दाखिल किया है और यह कि उसे किसी न्यायालय ने इससे पूर्व किसी ऐसे मामले में, जिसमें उसे उसी अपराध से आरोपित किया गया था, यह कि सिद्धदोष नहीं ठहराया गया है।

(3) न्यायालय उपधारा (1) के अधीन आवेदन प्राप्त होने के पश्चात्, यथास्थिति, लोक अभियोजक या परिवादी को और साथ ही अभियुक्त को मामले में नियत तारीख को हाजिर होने के लिए सूचना जारी करेगा।

(4) जहाँ उपधारा (3) के अधीन नियत तारीख को, यथास्थिति, लोक अभियोजक या मामले का परिवादी और अभियुक्त हाजिर होते हैं, वहां न्यायालय अपना समाधान करने के लिए कि अभियुक्त ने आवेदन स्वेच्छा से दाखिल किया है, अभियुक्त की बंद कमरे में परीक्षा करेगा, जहां मामले का दूसरा पक्षकार उपस्थित नहीं होगा और जहां

(क) न्यायालय का यह समाधान हो जाता है कि वह आवेदन अभियुक्त द्वारा स्वेच्छा से फाइल किया गया है, वहां वह, यथास्थिति, लोक अभियोजक या परिवादी और अभियुक्त को मामले के पारस्परिक संतोषप्रद निपटाने के लिए समय देगा जिसमें अभियुक्त द्वारा पीड़ित व्यक्ति को मामले के दौरान प्रतिकर और अन्य खर्च देना सम्मिलित है और तत्पश्चात् मामले की आगे सुनवाई के लिए तारीख नियत करेगा;

(ख) न्यायालय को यह पता चलता है कि आवेदन अभियुक्त द्वारा स्वेच्छा से फाइल नहीं किया गया है, या उसे किसी न्यायालय द्वारा किसी मामले में जिसमें उस पर उसी अपराध का आरोप था, सिद्धदोष ठहराया गया है तो वह इस संहिता के उपबंधों के अनुसार, उस प्रक्रम से जहां उपधारा (1) के अधीन ऐसा आवेदन फाइल किया गया है, आगे कार्यवाही करेगा।

धारा 265b CrPC

[ CrPC Sec. 265b in English ] –

“ Application for plea bargaining ”–

  1. A person accused of an offence may file an application for plea bargaining in the Court in which such offence is pending for trial.
  2. The application under Sub-Section (1) shall contain a brief description of the case relating to which the application is filed including the offence to which the case relates and shall be accompanied by an affidavit sworn by the accused stating therein that he has voluntarily preferred, after understanding the nature and extent of punishment provided under the law for the offence, the plea bargaining in his case and that he has not previously been convicted by a Court in a case in which he had been charged with the same offence.
  3. After receiving the application under Sub-Section (1), the Court shall issue notice to the Public Prosecutor or the complainant of the case, as the case may be, and to the accused to appear on the date fixed for the case.
  4. When the Public Prosecutor or the complainant of the case, as the case may be, and the accused appear on the date fixed under Sub-Section (3), the Court shall examine the accused in camera, where the other party in the case shall not be present, to satisfy itself that the accused has filed the application voluntarily and where—
    1. the Court is satisfied that the application has been filed by the accused voluntarily, it shall provide time to the Public Prosecutor or the complainant of the case, as the case may be, and the accused to work out a mutually satisfactory disposition of the case which may include giving to the victim by the accused the compensation and other expenses during the case and thereafter fix the date for further hearing of the case;
    2. the Court finds that the application has been filed involuntarily by the accused or he has previously been convicted by a Court in a case in which he had been charged with the same offence, it shall proceed further in accordance with the provisions of this Code from the stage such application has been filed under Sub-Section (1).

धारा 265b CrPC

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