Home LAW कंपनी अधिनियम धारा 26 | Section 26 of Companies Act in Hindi

कंपनी अधिनियम धारा 26 | Section 26 of Companies Act in Hindi

1437
0

आजके इस आर्टिकल में मैआपको ” प्रास्पेक्टस में कथित किये जाने वाले विषय  | कंपनी अधिनियम धारा 26  | Section 26 of Companies Act in Hindi | कंपनी अधिनियम की धारा 26 | के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

Section 26 of Companies Act in Hindi

[ Companies Act Sec. 26 in Hindi ] –

प्रास्पेक्टस में कथित किये जाने वाले विषय

 (1) किसी पब्लिक कंपनी द्वारा या उसकी ओर से या किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा या उसकी ओर से, जो ऐसी पब्लिक कंपनी के गठन में लगा हुआ है या हितबद्ध है या लगा रहा है या हितबद्ध रहा है, जारी प्रत्येक प्रास्पेक्टस पर, चाहे वह उसके गठन या उसके पश्चात के प्रतिनिर्देश से, तारीख डाली जाएगी और वह हस्ताक्षरित होगा तथा उसमें

(क) निम्नलिखित जानकारी दी जाएगी, अर्थात् :

(6) कंपनी के रजिस्ट्रीकृत कार्यालय, कंपनी सचिव, मुख्य वित्तीय अधिकारी, लेखापरीक्षकों, विधिक सलाहकारों, बैंककारों, न्यासियों, यदि कोई हो, हामीदारों और ऐसे अन्य व्यक्तियों के नाम और पते, जो विहित किए

जाएं:

(ii) निर्गम प्रारंभ करने और बंद करने की तारीखें और विहित समय के भीतर आबंटन पत्रों और प्रतिदायों के आबंटन के निर्गम के बारे में घोषणा;

(iii) निदेशक बोर्ड द्वारा उस.पृथक् बैंक खाते के बारे में कथन, जहां निर्गम से प्राप्त सभी धन अंतरित किए जाने हैं और सभी ऐसे धनों के ब्यौरों का प्रकटन, जिनके अंतर्गत विहित रीति से पूर्व निर्गम से प्रयुक्त और अप्रयुक्त धन भी हैं;

(iv) निर्गम के हामीदारों के बारे में ब्यौरे;

(v) निदेशकों, लेखापरीक्षकों, निर्गम के बैंककारों, विशेषज्ञों की राय, यदि कोई हो और ऐसे अन्य व्यक्तियों की सहमति जिनको विहित किया जाए:

(vi) निर्गम के लिए प्राधिकार और उसके लिए पारित संकल्प के ब्यौरे;

(vii) प्रतिभूतियों के आबंटन और निर्गम के लिए प्रक्रिया और समय अनुसूची;

(viii) विहित रीति से कंपनी की पूंजी संरचना;

(ix) लोक प्रस्थापना के मुख्य उद्देश्य, वर्तमान निर्गम के निबंधन और ऐसी अन्य विशिष्टियां, जो विहित की जाएं:

(x) कंपनी के मुख्य उद्देश्य और वर्तमान कारबार तथा उसकी अवस्थिति, परियोजना के कार्यान्वयन की अनुसूची;

(xi) निम्नलिखित से संबंधित विशिष्टियां,

(क) परियोजना से विनिर्दिष्ट जोखिम कारकों का प्रबंध अवगम, (ख) परियोजना की गर्भावधि, (ग) परियोजना में की गई प्रगति की मात्रा, (घ) परियोजना के पूरा होने का अंतिम समय,

(ङ) कंपनी के संप्रवर्तकों के विरुद्ध प्रास्पेक्टस के निर्गम के वर्ष के ठीक पूर्ववर्ती पांच वर्षों के दौरान किसी सरकारी विभाग या कानूनी निकाय द्वारा लंबित या किया गया मुकदमा या की गई कोई विधिक कार्रवाई;

(xii) न्यूनतम अभिदाय, प्रीमियम के रूप में संदेय रकम, नकद से भिन्न शेयरों के निर्गम; .

(xiii) निदेशकों के ब्यौरे, जिनके अंतर्गत उनकी नियुक्तियां और पारिश्रमिक भी हैं और कंपनी में उनके हितों की प्रकृति और सीमा की ऐसी विशिष्टियां, जो विहित की जाएं; और

(xiv) संप्रवर्तक के अभिदाय के स्रोतों के बारे में, ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, प्रकटन;

(ख) वित्तीय जानकारी के प्रयोजनों के लिए निम्नलिखित रिपोर्ट उपवर्णित की जाएंगी, अर्थात्:

(6) कंपनी के लेखापरीक्षकों द्वारा उसकी लाभ और हानियों तथा आस्तियों और दायित्वों तथा ऐसे अन्य विषयों के, जो विहित किए जाएं, संबंध में रिपोर्ट;

(ii) प्रास्पेक्टस निर्गम के वित्तीय वर्ष के ठीक पूर्ववर्ती पांच वित्तीय वर्षों में से प्रत्येक वर्ष की लाभ और हानियों के संबंध में रिपोर्ट जिनके अंतर्गत उसकी समनुषंगियों की ऐसी रिपोर्ट भी हैं और ऐसी रीति से, जो विहित की जाएं :

परंतु ऐसी किसी कंपनी की दशा में, जिसके संबंध में निगमन की तारीख से पांच वर्ष की अवधि व्यपगत नहीं हुई है, प्रास्पेक्टस, ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, प्रास्पेक्टस निर्गम के वित्तीय वर्ष से ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्षों में से प्रत्येक के लिए लाभ और हानियों से संबंधित रिपोर्दै, उसके समनुषंगियों की ऐसी रिपोर्टों सहित उपवर्णित करेगा;

(iii) निर्गम के ठीक पूर्ववर्ती पांच वित्तीय वर्षों में से प्रत्येक के लिए कंपनी के कारबार की लाभ और हानियों और ऐसी अंतिम तारीख को, जिसको कारबार के लेखे तैयार किए गए थे, जो प्रास्पेक्टस के निर्गम से पूर्व एक सौ अस्सी दिन की तारीख से अधिक न हो, उसके कारबार की आस्तियों और दायित्वों के संबंध में संपरीक्षकों द्वारा, विहित रीति से, तैयार की गई रिपोर्ट :

परंतु ऐसी कंपनी की दशा में, जिसके संबंध में पांच वर्ष की अवधि, निगमन की तारीख से व्यपगत नहीं हुई है, प्रास्पेक्टस, उसके निगमन की तारीख से सभी वित्तीय वर्षों के लिए कंपनी के कारबार के लाभ और हानियों तथा प्रास्पेक्टस निर्गम से पूर्व अंतिम तारीख को उसके कारबार की आस्तियों और दायित्वों पर लेखापरीक्षकों द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट विहित रीति से, उपवर्णित करेगा; और

(iv) उस कारबार या संव्यवहार के बारे में रिपोर्टे, जिसके लिए प्रतिभूतियों के आगमों का प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः उपयोग किया जाना है;

(ग) इस अधिनियम के उपबंधों के अनुपालन के बारे में घोषणा करेगा तथा इस प्रभाव का कथन करेगा कि प्रास्पेक्टस की कोई बात इस अधिनियम, प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 के उपबंधों और उनके अधीन बनाए गए नियमों तथा विनियमों के प्रतिकूल नहीं है; और .

(घ) ऐसे अन्य विषयों का कथन करेगा और ऐसी अन्य रिपोर्ट, जो विहित की जाएं, उपवर्णित करेगा।

(2) उपधारा (1) की कोई बात,

(क) किसी कंपनी के विद्यमान सदस्यों या डिबेंचर धारकों को कंपनी में शेयरों या उसके डिबेंचरों के संबंध में प्रास्पेक्टस के निर्गम या आवेदन पत्र को लागू नहीं होगी, चाहे किसी आवेदक को धारा 62 की उपधारा (1) के खंड (क) के उपखंड (ii) के अधीन किसी अन्य व्यक्ति के पक्ष में शेयरों का त्यजन करने का अधिकार हो या नहीं;

(ख) ऐसे शेयरों या डिबेंचरों से संबंधित प्रास्पेक्टस के निर्गम या आवेदन पत्र को लागू नहीं होगी, जो पूर्व में जारी किए गए शेयरों या डिबेंचरों से सभी प्रकार से समान हैं या समान होने हैं और तत्समय किसी मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में व्यौहार किए जाते हैं या उत्कथित किए जाते हैं अथवा व्यौहार किया जाना है या उत्कथित किया जाना है।

(3) उपधारा (2) के अधीन रहते हुए, उपधारा (1) के उपबंध किसी प्रास्पेक्टस को या आवेदन पत्र को लागू होंगे, चाहे किसी कंपनी के बनाए जाने पर या उसके प्रतिनिर्देश से या बाद में जारी किया गया हो ।

स्पष्टीकरण-प्रास्पेक्टस में उपदर्शित तारीख को उसके प्रकाशन की तारीख समझा जाएगा।

(4) किसी कंपनी द्वारा या उसकी ओर से या किसी आशयित कंपनी के संबंध में कोई प्रास्पेक्टस तब तक जारी नहीं किया जाएगा, जब तक उसके प्रकाशन की तारीख को या उसके पूर्व प्रत्येक ऐसे व्यक्ति द्वारा, जिसका नाम उसमें कंपनी के निदेशक या प्रस्तावित निदेशक के रूप में है या उसके द्वारा सम्यक् रूप से प्राधिकृत अटर्नी द्वारा हस्ताक्षरित उसकी एक प्रति रजिस्ट्रीकरण के लिए रजिस्ट्रार को परिदत्त न कर दी गई हो ।

(5) उपधारा (1) के अधीन जारी प्रास्पेक्टस में किसी विशेषज्ञ द्वारा किए जाने के लिए तात्पर्यित कोई कथन तब तक सम्मिलित नहीं होगा, जब तक विशेषज्ञ ऐसा व्यक्ति न हो, जो किसी कंपनी के गठन या संवर्धन या उसके प्रबंध में नहीं लगा है या नहीं लगा रहा है या हितबद्ध नहीं रहा है, और उसने प्रास्पेक्टस जारी करने के लिए अपनी लिखित सहमति नहीं दी हो और ऐसी सहमति रजिस्ट्रार को रजिस्ट्रीकरण के लिए प्रास्पेक्टस की कोई प्रति परिदत्त करने से पूर्व वापस नहीं ली हो तथा प्रास्पेक्टस में उस प्रभाव का कथन सम्मिलित किया जाएगा । (6) उपधारा (1) के अधीन जारी प्रत्येक प्रास्पेक्टस में प्रत्यक्षतः

(क) यह कथन होगा कि उपधारा (4) के अधीन यथा अपेक्षित एक प्रति रजिस्ट्रीकरण के लिए रजिस्ट्रार को परिदत्त कर दी गई है और

(ख) इस धारा द्वारा अपेक्षित ऐसे कोई दस्तावेज विनिर्दिष्ट किए जाएंगे, जो इस प्रकार परिदत्त प्रति से संलग्न किए जाने हैं या ऐसे प्रास्पेक्टस में सम्मिलित विवरणों में निर्दिष्ट किए जाने हैं, जो इन दस्तावेजों को विनिर्दिष्ट करें ।

(7) रजिस्ट्रार किसी प्रास्पेक्टस को तब तक रजिस्ट्रीकृत नहीं करेगा, जब तक उसके रजिस्ट्रीकरण के संबंध में इस धारा की अपेक्षाओं का पालन न किया गया हो और प्रास्पेक्टस के साथ, प्रास्पेक्टस में नामित सभी व्यक्तियों की लिखित में सहमति न संलग्न हो ।

(8) कोई प्रास्पेक्टस विधिमान्य नहीं होगा, यदि वह उस तारीख से, जिसको उसकी एक प्रति, उपधारा (4) के अधीन रजिस्ट्रार को परिदत्त की जाती है, नब्बे से अधिक दिन के पश्चात् जारी किया जाता है ।

(9) यदि कोई प्रास्पेक्टस इस धारा के उपबंधों के उल्लंघन में जारी किया जाता है, तो कंपनी, ऐसे जुर्माने से, जो पचास हजार रुपए से कम का नहीं होगा, किंतु जो तीन लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगी और ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जो जानते हुए ऐसे प्रास्पेक्टस के जारी होने का पक्षकार है, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो पचास हजार रुपए से कम का नहीं होगा, किंतु तीन लाख रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा ।

कंपनी अधिनियम धारा 26

[ Companies Act Section 26  in English ] –

Matters to be stated in prospectus”–

(1) Every prospectus issued by or on behalf of a public  company either with reference to its formation or subsequently, or by or on behalf of any person who is  or has been engaged or interested in the formation of a public company, shall be dated and signed and  shall— 

(a) state the following information, namely:— 

(i) names and addresses of the registered office of the company, company secretary, Chief  Financial Officer, auditors, legal advisers, bankers, trustees, if any, underwriters and such other  persons as may be prescribed; 

(ii) dates of the opening and closing of the issue, and declaration about the issue of allotment  letters and refunds within the prescribed time; 

(iii) a statement by the Board of Directors about the separate bank account where all monies  received out of the issue are to be transferred and disclosure of details of all monies including  utilised and unutilised monies out of the previous issue in the prescribed manner; 

(iv) details about underwriting of the issue; 

(v) consent of the directors, auditors, bankers to the issue, expert‘s opinion, if any, and of  such other persons, as may be prescribed; 

(vi) the authority for the issue and the details of the resolution passed therefor; 

(vii) procedure and time schedule for allotment and issue of securities; 

(viii) capital structure of the company in the prescribed manner; 

(ix) main objects of public offer, terms of the present issue and such other particulars as may  be prescribed; 

(x) main objects and present business of the company and its location, schedule of  implementation of the project; 

(xi) particulars relating to— 

(A) management perception of risk factors specific to the project; 

(B) gestation period of the project; 

(C) extent of progress made in the project; 

(D) deadlines for completion of the project; and 

(E) any litigation or legal action pending or taken by a Government Department or a  statutory body during the last five years immediately preceding the year of the issue of  prospectus against the promoter of the company; 

(xii) minimum subscription, amount payable by way of premium, issue of shares otherwise  than on cash; 

(xiii) details of directors including their appointments and remuneration, and such particulars  of the nature and extent of their interests in the company as may be prescribed; and 

(xiv) disclosures in such manner as may be prescribed about sources of promoter‘s  contribution; 

(b) set out the following reports for the purposes of the financial information, namely:— 

(i) reports by the auditors of the company with respect to its profits and losses and assets and  liabilities and such other matters as may be prescribed; 

(ii) reports relating to profits and losses for each of the five financial years immediately  preceding the financial year of the issue of prospectus including such reports of its subsidiaries  and in such manner as may be prescribed:

Provided that in case of a company with respect to which a period of five years has not  elapsed from the date of incorporation, the prospectus shall set out in such manner as may be  prescribed, the reports relating to profits and losses for each of the financial years immediately  preceding the financial year of the issue of prospectus including such reports of its subsidiaries; 

(iii) reports made in the prescribed manner by the auditors upon the profits and losses of the  business of the company for each of the five financial years immediately preceding issue and  assets and liabilities of its business on the last date to which the accounts of the business were  made up, being a date not more than one hundred and eighty days before the issue of the  prospectus: 

Provided that in case of a company with respect to which a period of five years has not  elapsed from the date of incorporation, the prospectus shall set out in the prescribed manner, the  reports made by the auditors upon the profits and losses of the business of the company for all  financial years from the date of its incorporation, and assets and liabilities of its business on the  last date before the issue of prospectus; and 

(iv) reports about the business or transaction to which the proceeds of the securities are to be  applied directly or indirectly; 

(c) make a declaration about the compliance of the provisions of this Act and a statement to the  effect that nothing in the prospectus is contrary to the provisions of this Act, the Securities Contracts  (Regulation) Act, 1956 (42 of 1956) and the Securities and Exchange Board of India Act, 1992 (15 of  1992) and the rules and regulations made thereunder; and 

(d) state such other matters and set out such other reports, as may be prescribed. 

(2) Nothing in sub-section (1) shall apply— 

(a) to the issue to existing members or debenture-holders of a company, of a prospectus or form  of application relating to shares in or debentures of the company, whether an applicant has a right to  renounce the shares or not under sub-clause (ii) of clause (a) of sub-section (1) of section 62 in favour  of any other person; or 

(b) to the issue of a prospectus or form of application relating to shares or debentures which are,  or are to be, in all respects uniform with shares or debentures previously issued and for the time being  dealt in or quoted on a recognised stock exchange. 

(3) Subject to sub-section (2), the provisions of sub-section (1) shall apply to a prospectus or a form  of application, whether issued on or with reference to the formation of a company or subsequently. 

Explanation.—The date indicated in the prospectus shall be deemed to be the date of its publication. 

(4) No prospectus shall be issued by or on behalf of a company or in relation to an intended company  unless on or before the date of its publication, there has been delivered to the Registrar for registration, a  copy thereof signed by every person who is named therein as a director or proposed director of the  company or by his duly authorised attorney. 

(5) A prospectus issued under sub-section (1) shall not include a statement purporting to be made by  an expert unless the expert is a person who is not, and has not been, engaged or interested in the formation  or promotion or management, of the company and has given his written consent to the issue of the  prospectus and has not withdrawn such consent before the delivery of a copy of the prospectus to the  Registrar for registration and a statement to that effect shall be included in the prospectus. 

(6) Every prospectus issued under sub-section (1) shall, on the face of it,— 

(a) state that a copy has been delivered for registration to the Registrar as required under sub section (4); and 

(b) specify any documents required by this section to be attached to the copy so delivered or refer  to statements included in the prospectus which specify these documents.

(7) The Registrar shall not register a prospectus unless the requirements of this section with respect to  its registration are complied with and the prospectus is accompanied by the consent in writing of all the  persons named in the prospectus. 

(8) No prospectus shall be valid if it is issued more than ninety days after the date on which a copy  thereof is delivered to the Registrar under sub-section (4). 

(9) If a prospectus is issued in contravention of the provisions of this section, the company shall be  punishable with fine which shall not be less than fifty thousand rupees but which may extend to three lakh  rupees and every person who is knowingly a party to the issue of such prospectus shall be punishable with  imprisonment for a term which may extend to three years or with fine which shall not be less than fifty  thousand rupees but which may extend to three lakh rupees, or with both. 

कंपनी अधिनियम धारा 26


कंपनी अधिनियम 2013  

PDF download in Hindi

Companies Act 2013 PDF

Pdf download in English 


Section 1 Forest Act in Hindi Section 1 Forest Act in Hindi

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here